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स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के कार्यक्रम से फिर गायब रहे राहुल गांधी और खड़गे, 2024 के सीटिंग विवाद से जुड़ा है तार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi Absence Red Fort: दिल्ली के लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक बार फिर प्रमुख विपक्षी नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार दूसरे साल इस राष्ट्रीय समारोह में शामिल नहीं हुए।

रक्षा मंत्रालय के निमंत्रण के बावजूद बनाई दूरी

रक्षा मंत्रालय की तरफ से दोनों नेताओं को इस कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था।

इसके बावजूद दोनों में से कोई भी लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में नजर नहीं आया।

2024 के सीटिंग अरेंजमेंट विवाद से जुड़े तार

खबरों के मुताबिक, इस दूरी की वजह साल 2024 में हुआ सीटिंग अरेंजमेंट (बैठक व्यवस्था) का विवाद माना जा रहा है।

2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राहुल गांधी को 5वीं पंक्ति (पांचवीं लाइन) में बैठाया गया था।

इस पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे नेता प्रतिपक्ष के पद का अपमान बताया था।

हालांकि, उस समय सरकार और आयोजकों की ओर से सफाई दी गई थी कि ओलंपिक में हिस्सा लेकर आए खिलाड़ियों और विशेष मेहमानों को आगे की पंक्तियों में जगह दी गई थी, जिसकी वजह से बैठने की व्यवस्था में बदलाव हुआ था।

भाजपा का हमला: “राहुल की सोच दिमागी नक्सल जैसी”

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के लगातार दूसरे साल इस राष्ट्रीय समारोह से दूर रहने पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा ऐतराज जताया है।

भाजपा ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद के योग्य नहीं हैं।

भाजपा प्रवक्ताओं और नेताओं ने बयान जारी कर कहा कि राहुल गांधी की मानसिकता ‘दिमागी नक्सल इकोसिस्टम’ जैसी होती जा रही है, जो देश के राष्ट्रीय पर्वों और संवैधानिक परंपराओं का सम्मान करने से बचते हैं।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसर देश की एकता और अखंडता के प्रतीक होते हैं।

ऐसे में प्रमुख विपक्षी नेताओं का इन समारोहों में न पहुंचना सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहराते राजनीतिक मतभेदों को साफ दर्शाता है।

फिलहाल इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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