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‘कॉकरोच’ विवाद पर बोले CJI सूर्यकांत: ‘मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया, युवाओं को भटकाने की कोशिश’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

CJI on Cockroach Controversy: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने अपने हालिया बयानों पर मचे बवाल और विवादों पर चुप्पी तोड़ी है।

सर्वोच्च अदालत में एक सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बातों का गलत मतलब निकालकर देश के युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया गया है।

CJI ने अदालती कार्यवाहियों के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप्स (Viral Clips) को सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ (Context) के प्रसारित किए जाने पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) लाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) शुरू की गई थी, लेकिन अब लोग अपने निजी और व्यावसायिक (Commercial) फायदों के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

CJI का कहना था कि अदालत में जो बात जिस संदर्भ में नहीं कही गई, उसे भी तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है, जिस पर रोक लगनी बेहद जरूरी है।

क्या था ‘कॉकरोच’ टिप्पणी का पूरा विवाद?

यह पूरा मामला मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई से जुड़ा है।

उस दौरान फर्जी डिग्रियों के आधार पर लीगल प्रैक्टिस करने वाले कुछ व्यक्तियों के संदर्भ में बातचीत चल रही थी।

CJI ने ऐसे तत्वों की तुलना “कॉकरोच” से की थी, जो बिना योग्यता के कानून और मीडिया जैसे क्षेत्रों में आकर भ्रम फैलाते हैं।

हालांकि, इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया और इसे युवाओं व बेरोजगारों से जोड़कर देखा जाने लगा।

इसके विरोध में अभिजीत दीपके नाम के एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक रूप से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का गठन किया।

देखते ही देखते यह डिजिटल अभियान एक बड़े आंदोलन में बदल गया और युवाओं ने रोजगार, शिक्षा व्यवस्था और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 35 दिनों तक प्रदर्शन किया।

NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद: छात्रों के पक्ष में आए CJI

CJI सूर्यकांत ने एक अन्य बड़े विवाद पर सुनवाई करते हुए हैदराबाद की प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR (नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च) के छात्रों का खुलकर बचाव किया।

दरअसल, यूनिवर्सिटी के करीब 450 छात्रों ने CJI को दीक्षांत समारोह (Convocation) में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध करते हुए प्रशासन को पत्र लिखा था। छात्र पुलिस बर्बरता पर CJI की एक पुरानी टिप्पणी से नाराज थे।

छात्रों के इस कदम के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सख्त रुख अपनाते हुए NALSAR के 2026 बैच के सभी ग्रेजुएट्स के वकील (Advocate) के रूप में नामांकन (Enrollment) पर रोक लगा दी थी।

BCI का तर्क था कि कानून के छात्रों को देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का सम्मान करना चाहिए।

इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए CJI सूर्यकांत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को कड़ी फटकार लगाई।

CJI ने कहा- “भले ही छात्रों का निर्णय गलत हो या उन्हें किसी ने गलत दिशा में मोड़ दिया हो, फिर भी लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का पूरा अधिकार है। यह मामला मेरे और छात्रों के बीच का है, इसमें बार काउंसिल को दखल देने की कोई जरूरत नहीं थी।”

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया कि यूनिवर्सिटी के किसी भी छात्र या शिक्षक (Factual/Faculty) के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) न की जाए।

अदालत के कड़े रुख के बाद BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया और सभी निर्दोष छात्रों को वकालत के लिए एनरोलमेंट की अनुमति दे दी।

न्यायपालिका किसी के पक्ष या विपक्ष की नहीं: CJI

अदालत की भूमिका पर बात करते हुए CJI सूर्यकांत ने दोहराया कि देश का संविधान ही सबसे बड़ी ताकत है।

न्यायपालिका का प्राथमिक कर्तव्य संविधान के मूल ढांचे की रक्षा करना और उसे मजबूत बनाए रखना है।

उन्होंने कहा कि अदालतें किसी राजनीतिक दल, पक्ष या विपक्ष के दबाव में काम नहीं करतीं।

न्यायपालिका का काम केवल और केवल संवैधानिक मूल्यों और कानून के तय दायरे में रहकर निष्पक्ष फैसले सुनाना है।

जब तक देश में संविधान का शासन है, तब तक हर नागरिक के मूलभूत अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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हालिया विवाद जिनसे जुड़ा CJI का नाम

पिछले कुछ महीनों में CJI की तीन अलग-अलग टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में काफी चर्चा रही:

* 15 मई (कॉकरोच टिप्पणी): फर्जी डिग्रियों और गैर-जिम्मेदार एक्टिविस्ट्स के संदर्भ में कही गई बात, जिसे बाद में छात्र आंदोलन से जोड़ दिया गया।

* 22 जुलाई (वीडियो सबूत देखने पर टिप्पणी): NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की याचिका पर सुनवाई के वक्त अदालत ने कहा था कि उनके पास हर वायरल वीडियो को देखने का समय नहीं है और समय बर्बाद न किया जाए।

* अगस्त (NALSAR छात्रों का विरोध): छात्रों द्वारा दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की मांग पर BCI द्वारा छात्रों पर की गई सख्त कार्रवाई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने ही खारिज कर दिया।

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