Bhopal Commercial Sealing: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस समय रहवासी (रेजिडेंशियल) इलाकों में चल रही व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और जन-आक्रोश चरम पर है।
नगर निगम द्वारा सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों का हवाला देकर दुकानदारों और मकान मालिकों को नोटिस थमाए जा रहे हैं, जिससे पूरे शहर के कारोबारियों में भारी दहशत का माहौल बन गया है।
अब तक 7,100 से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं और यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंचने की आशंका है।
इसी कार्रवाई के विरोध में भोपाल के व्यापारी, छोटे दुकानदार और ब्यूटीशियन भी सड़कों पर उतर आए हैं।

मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे पर विशाल प्रदर्शन किया गया, जहां व्यापारियों ने साफ कर दिया कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे अनिश्चितकालीन ‘भोपाल बंद’ करेंगे, सड़कें जाम करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
व्यापारियों की सरकार से 3 प्रमुख मांगें
10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी और अन्य व्यापारी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए 3 प्रमुख ऑप्शन रखे हैं:
* 2005 से पेंडिंग मास्टर प्लान को तुरंत लागू किया जाए: शहर के विकास और जोनिंग को लेकर जो ड्राफ्ट सालों से अटका हुआ है, उसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
* गुजरात की तर्ज पर ‘मिक्स लैंड यूज’ नीति लागू हो: जिस तरह गुजरात जैसे राज्यों में रहवासी इलाकों में सीमित कमर्शियल गतिविधियों (मिक्स लैंड यूज) को कानूनी मान्यता दी गई है, वही नियम मध्य प्रदेश में भी अपनाए जाएं।
* सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगे: नगर निगम द्वारा दुकानदारों को परेशान करने और दुकानें सील करने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार लाखों लोगों को एक झटके में बेरोजगार करने पर तुली है।
यदि भोपाल के 90% छोटे-बड़े व्यापार बंद करा दिए गए, तो इसका सीधा असर पूरे शहर की अर्थव्यवस्था और आम जनता की दैनिक जरूरतों पर पड़ेगा।

“कर्ज़ में डूबे हैं, बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरेंगे?”
इस पूरी कार्रवाई का सबसे दर्दनाक पहलू छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी पर मंडराता संकट है।
हाउसिंग बोर्ड और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के दुकानदारों का कहना है कि वे सालों से निगम को सभी तरह के टैक्स दे रहे हैं, बिजली का कमर्शियल बिल भर रहे हैं और रजिस्ट्री भी नियमानुसार कराई गई है।
दुकानदारों का सवाल है कि जब सरकार ने खुद उनसे कमर्शियल टैक्स वसूला, तो अब अचानक यह कार्रवाई अवैध कैसे हो गई?
पहले से कर्ज़ में डूबे व्यापारियों के सामने अब बच्चों की स्कूल फीस भरने और परिवार का पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है।
इस विरोध प्रदर्शन में पहली बार ब्यूटी पार्लर और सैलून चलाने वाली महिलाएं और ब्यूटिशियन भी शामिल हुईं, जिन्होंने सांकेतिक रूप से सड़क पर मेकअप करके अपना विरोध जताया।
क्या है कानूनी और प्रशासनिक पेंच?
इस पूरे मामले की जड़ सुप्रीम कोर्ट के वे आदेश हैं जो वर्ष 2024 और 2025 में रेजिडेंशियल इलाकों में अवैध कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर दिए गए थे।
तमिलनाडु में दायर एक याचिका के बाद मध्य प्रदेश को भी इसमें पार्टी बनाया गया।
सीनियर एडवोकेट एहतेशाम कुरैशी के अनुसार, नगर निगम ने खुद अदालत में दिए गए हलफनामे (शपथ पत्र) में स्वीकार किया है कि भोपाल का नया मास्टर प्लान वर्ष 2005 से नहीं आया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखती और समय पर मास्टर प्लान लागू कर देती, तो आज शहर के लाखों कारोबारियों को यह दिन न देखना पड़ता।
सरकार चाहे तो अब भी वर्तमान व्यावसायिक गतिविधियों को ‘रेगुलराइज’ (नियमित) कर सकती है।
7,000 से ज्यादा नोटिस, 62 हजार से अधिक प्रॉपर्टी रडार पर
नगर निगम की कार्रवाई अब काफी तेज हो चुकी है:
* कुल जारी नोटिस: अब तक 7,158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
* लिस्टेड संपत्तियां: संपत्ति कर (Property Tax) के आधार पर 62,500 ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई है, जो रहवासी इलाकों में कमर्शियल रूप से इस्तेमाल हो रही हैं।
* क्षेत्रवार बंटवारा: सबसे ज्यादा नोटिस नरेला (1,470), गोविंदपुरा (1,250), मध्य भोपाल (1,093) और हुजूर (1,032) विधानसभा क्षेत्रों में थमाए गए हैं।
* 3 दिन का अल्टीमेटम: लगभग 1,000 ऐसे नोटिस हैं, जिनकी 3 दिन की समय-सीमा समाप्त हो रही है। इसके बाद सुनवाई कर अतिक्रमण हटाने और दुकानें सील करने की अंतिम कार्रवाई शुरू होगी।
सर्वे का दायरा अब शहर के मुख्य मार्गों से हटकर गलियों, ग्रीन बेल्ट, कैचमेंट एरिया, नदी-तालाबों के किनारे और मैरिज गार्डनों तक बढ़ाया जा रहा है।

मास्टर प्लान की नाकामी और ‘तीसरा भोपाल’
भोपाल का आखिरी मास्टर प्लान 1995 में लागू हुआ था।
नियम के मुताबिक नया प्लान 2005 में आना चाहिए था, जिससे शहर के आबादी विस्तार, सड़कों, और कमर्शियल-रेजिडेंशियल जोनिंग का सही निर्धारण होता।
लेकिन नया प्लान न आने के कारण भोपाल का फैलाव बेतरतीब और बिना योजना के होता गया।
नर्मदापुरम रोड, कोलार, रायसेन रोड और नीलबड़ जैसे इलाकों में पहले बस्तियां और दुकानें बसीं, और सुविधाएं बाद में पहुंचीं।
इसी अनियोजित फैलाव को आज ‘तीसरा भोपाल’ कहा जा रहा है।
यदि मास्टर प्लान समय पर आ जाता, तो रहवासी और कमर्शियल क्षेत्र अलग-अलग चिन्हित होते और आज हजारों लोगों के रोजगार पर सीलिंग की तलवार न लटकती।
फिलहाल, भोपाल के व्यापारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी आजीविका बचाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस बड़े जन-आक्रोश और बंद की चेतावनी के बाद क्या बीच का रास्ता निकालती है।
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