NLSIU Convocation Cancelled: बेंगलुरु स्थित देश के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) ने अपने 34वें दीक्षांत समारोह को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है।
यह समारोह 12 सितंबर को आयोजित होना तय हुआ था।
हालांकि, यूनिवर्सिटी की तरफ से 27 अगस्त को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में समारोह रद्द करने के पीछे ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला दिया गया है और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का सीधा जिक्र नहीं किया गया है।
यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम रद्द होने के बावजूद सभी उत्तीर्ण छात्रों को उनकी डिग्रियां दे दी जाएंगी।

छात्र चाहें तो अपनी डिग्री और सर्टिफिकेट कूरियर के जरिए घर मंगवा सकते हैं या फिर यूनिवर्सिटी कैंपस में आकर खुद ले सकते हैं।
700 से अधिक छात्रों ने दर्ज कराई थी आपत्ति
समारोह रद्द करने की यह नौबत छात्रों और पूर्व छात्रों के तीखे विरोध के बाद आई है।
NLSIU के 700 से अधिक मौजूदा और पूर्व छात्रों ने एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करके चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने पर सख्त ऐतराज जताया था।

इस विरोध पत्र पर 165 मौजूदा स्नातक छात्र, 409 अन्य वर्तमान छात्र और 128 पूर्व छात्र शामिल थे।
छात्रों का कहना था कि दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी CJI सूर्यकांत की टिप्पणियों और हालिया कार्यशैली से वे आहत हैं।
साथ ही छात्रों ने BCI द्वारा हैदराबाद की नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों पर की गई कार्रवाई के लिए बिना शर्त माफी की मांग भी की थी।

3 बड़े संस्थानों में सामने आया विरोध का पैटर्न
NLSIU अकेला ऐसा संस्थान नहीं है, जहां CJI को चीफ गेस्ट बनाए जाने पर विवाद हुआ है।
इससे पहले देश के दो अन्य प्रमुख शिक्षण संस्थानों में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला था:
1. टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS)
मुंबई: मुंबई के TISS ने अपने 86वें दीक्षांत समारोह की तारीख बदलकर 2 अगस्त से 22 अगस्त की थी।
पहले संस्थान ने CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाया था, लेकिन छात्रों के संभावित विरोध और असंतोष की आशंका के चलते चीफ गेस्ट ही बदल दिया गया।
CJI की जगह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. सीएस प्रामेश को आमंत्रित किया गया।

2. नालसार यूनिवर्सिटी (NALSAR), हैदराबाद:
हैदराबाद के नालसार लॉ यूनिवर्सिटी में भी दीक्षांत समारोह के लिए CJI को आमंत्रित किया गया था, जिसका छात्रों ने जमकर विरोध किया।
विरोध से नाराज होकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 2026 बैच के सभी पास-आउट छात्रों के स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट (वकालत के लाइसेंस) पर रोक लगाने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया था।
हालांकि, चौतरफा दबाव के बाद BCI को यह फैसला महज 85 मिनट के भीतर वापस लेना पड़ा था।

दीक्षांत समारोहों में मुख्य अतिथियों को लेकर देश के शीर्ष लॉ और सोशल साइंस संस्थानों के छात्रों का यह रुख शिक्षा और न्यायपालिका से जुड़े गलियारों में गहरी चर्चा का विषय बन गया है।
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