Suvendu Adhikari support Dhirendra Shastri: पश्चिम बंगाल में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान ने राज्य में भारी राजनीतिक और सामाजिक बवाल खड़ा कर दिया है।
हावड़ा के लिलुआ में आयोजित 3 दिवसीय हनुमंत कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा और नवरात्रि के पावन पर्व को लेकर एक अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि पवित्र पर्व के दौरान पंडालों के आसपास मांस-मछली की बिक्री और सेवन नहीं होना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री के विरोध में भड़की राजनीति
शास्त्री के इस बयान के बाद बंगाल में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
कई स्थानीय संगठनों, विपक्षी नेताओं और आम लोगों ने इसे बंगाली संस्कृति और खान-पान की परंपराओं पर हस्तक्षेप करार दिया।
विरोध इतना बढ़ गया कि कोलकाता के भवानीपुर थाने के सामने और आसनसोल में प्रदर्शनकारियों ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के पोस्टर जलाए और उनकी तस्वीरों पर जूते-चप्पल मारकर नारेबाजी की।

विधानसभा में गूंजा मुद्दा, समर्थन में उतरे शुभेंदु अधिकारी
तस्वीरों को जलाने और अपमानजनक प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खुले समर्थन में उतर आए।
विधानसभा के पटल पर बोलते हुए उन्होंने संत समाज के प्रति इस तरह के आक्रामक व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “लिलुआ आए संत ने केवल देशप्रेम, राष्ट्रवाद, अखंड भारत और अपनी धार्मिक परंपराओं पर विचार व्यक्त किए थे। उन्होंने किसी के ऊपर अपनी बातें जबरन नहीं थोपीं। जिसे उनकी सलाह माननी है वह मानेगा और जिसे नहीं माननी, वह न माने। लेकिन संत समाज का इस तरह अपमान करना किसी भी सूरत में सही नहीं है।”

दोषियों को तुरंत जेल भेजने की मांग और पुलिस को सख्त हिदायत
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को सीधे निर्देश दिए कि भवानीपुर और आसनसोल में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीरें फूँकने और अपमान करने वाले लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राज्य में साधु-संतों का अपमान और इस तरह की उग्र घटनाएं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है और उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

तुष्टीकरण की राजनीति पर करारा हमला
सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधते हुए शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य में लंबे समय से जारी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ही ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि एक वर्ग को खुश करने के लिए संत परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को निशाना बनाया जा रहा है।
अधिकारी ने दावा किया कि जनता अब इस तरह के भेदभाव और तुष्टीकरण को समझ चुकी है।

विधानसभा में अपनी पार्टी की स्थिति मजबूत बताते हुए उन्होंने कहा कि जनता आने वाले उपचुनावों में तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों को कड़ा जवाब देगी।
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