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UCC पर फिर गरमाई देश की राजनीति: NDA के 3 सहयोगी दलों ने दिया समर्थन तो बिहार में JDU ने किया विरोध, जानें वजह

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

UCC in NDA States: देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने की दिशा में राजनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित सभी 21 राज्यों में UCC को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

इस बयान के बाद जहां केंद्र सरकार के तीन प्रमुख सहयोगी दलों—तेलुगु देशम पार्टी (TDP), शिवसेना (शिंदे गुट) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)—ने UCC का खुला समर्थन किया है, वहीं बिहार में भाजपा की मुख्य सहयोगी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने इस पर अलग राह चुन ली है।

JDU का कहना है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर विधेयक के सिद्धांतों से भले ही असहमत न हों, लेकिन इसे बिहार राज्य के भीतर लागू नहीं होने देंगे।

NDA सहयोगियों का क्या कहना है?

* तेलुगु देशम पार्टी (TDP):

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायुलु ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी UCC का समर्थन करेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसे अमलीजामा पहनाने से पहले समाज के सभी संबंधित पक्षों, धार्मिक समूहों और हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श किया जाना आवश्यक है।

* शिवसेना (शिंदे गुट): शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने UCC को समानता, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम करार दिया और इसका पूर्ण समर्थन किया।

* हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM): HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने अमित शाह के वक्तव्य का स्वागत करते हुए कहा कि देश में एक समान नागरिक व्यवस्था का निर्माण समय की मांग है।

JDU का विरोध और बिहार का राजनीतिक समीकरण

बिहार में JDU नेता श्याम रजक ने पार्टी का रुख दोहराते हुए कहा कि JDU देश के स्तर पर भले ही इस मुद्दे को समझे, पर बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा।

JDU का मानना है कि विविधता से भरे भारत में किसी भी बदलाव से पहले सर्वसम्मति बनाना जरूरी है।

इसी विषय पर चर्चा करने के लिए JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा गृह मंत्री अमित शाह से औपचारिक मुलाकात भी करेंगे।

विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया

 * जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला:

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केंद्र सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है तो वह इसे सीधे संसद के माध्यम से पूरे देश में क्यों नहीं लाती?

राज्यों के रास्ते इसे लागू करने की रणनीति यह दिखाती है कि स्वयं NDA के सभी घटक दल इस पर एकमत नहीं हैं।

 * मुस्लिम संगठनों का रुख:

केरल की प्रमुख संस्था ‘समस्त केरल जेम-इयातुल उलमा’ के अध्यक्ष मोहम्मद जिफ्री ने UCC का पुरजोर विरोध किया।

उनका कहना है कि विवाह, तलाक, संपत्ति का अधिकार और उत्तराधिकार जैसे विषय धार्मिक आस्था से जुड़े नियम-कायदों का हिस्सा हैं, जिन्हें एक कानून में बांधना कठिन है।

राज्यों में UCC का वर्तमान स्टेटस

वर्तमान में देश के 22 राज्यों में NDA की सरकारें हैं। उत्तराखंड में जनवरी 2025 से ही UCC कानून प्रभावी रूप से लागू है।

इसके अलावा गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं से यह बिल पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी व औपचारिक अधिसूचना की प्रतीक्षा में है।

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में राज्यस्तरीय ड्राफ्टिंग समितियां गठित की जा चुकी हैं।

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