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शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का तलाक: 9 साल बाद कानूनी रूप से अलग हुए दोनों नेता

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Himadri Singh divorce: मध्य प्रदेश के शहडोल संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी अब कानूनी रूप से एक-दूसरे से अलग हो गए हैं।

शादी के लगभग 9 साल बाद दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से तलाक ले लिया है।

अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत 3 सितंबर 2026 को विवाह विच्छेद (तलाक) का आदेश जारी किया।

 

2017 में हुई थी शादी, 2019 में जन्मी बेटी

हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुआ था।

शादी के शुरुआती दौर में सब कुछ ठीक रहा और दोनों ने राजेंद्रग्राम में साथ रहते हुए अपने वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को निभाया।

20 जून 2019 को दोनों के घर एक बेटी का जन्म हुआ, जिसका नाम गिरिशा सिंह रखा गया।

छोटी-छोटी बातों से शुरू हुआ विवाद, 2021 से रह रहे थे अलग

बेटी के जन्म के कुछ समय बाद दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में कहासुनी और विवाद होने लगे।

धीरे-धीरे यह मनमुटाव इतना बढ़ गया कि दोनों के बीच बातचीत और मिलना-जुलना पूरी तरह बंद हो गया। 5 मई 2021 से दोनों एक-दूसरे से अलग रहने लगे थे।

लगभग 5 साल तक अलग रहने के बाद दोनों ने यह महसूस किया कि अब उनके बीच रिश्ते को सुधारने और साथ रहने की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

इसके बाद दोनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

आरोप-प्रत्यारोप से दूर, आपसी सहमति से लिया फैसला

कोर्ट में दायर की गई तलाक की याचिका में दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर कोई गंभीर या व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए।

दस्तावेज में साफ तौर पर कहा गया कि उनके विचार और राहें अलग हो चुकी हैं, इसलिए अब पति-पत्नी के रूप में सामान्य जीवन बिताना संभव नहीं रह गया है।

अदालत ने नियमानुसार दोनों पक्षों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और आपस में समझौता करने के लिए 6 महीने का समय (कूलिंग-ऑफ पीरियड) दिया था।

कोर्ट की तरफ से दोनों को फिर से साथ लाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन दोनों ही अपने फैसले पर कायम रहे।

6 महीने का समय पूरा होने के बाद कोर्ट ने माना कि अब इस रिश्ते को आगे चलाना संभव नहीं है और कानूनी तौर पर तलाक की मंजूरी दे दी।

बेटी की परवरिश करेंगी हिमाद्री, नहीं मांगा कोई गुजारा भत्ता

अदालत में दिए गए समझौतों के मुताबिक, बेटी गिरिशा सिंह की पूरी जिम्मेदारी और कस्टडी सांसद हिमाद्री सिंह के पास ही रहेगी।

बेटी के पालन-पोषण, उसकी पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य और भविष्य की शादी से जुड़े सभी खर्च खुद हिमाद्री सिंह उठाएंगी।

उन्होंने अपने या बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी भी तरह के गुजारा भत्ता या भरण-पोषण राशि की मांग नहीं की है।

इसके अलावा, शादी के समय दिए गए उपहारों और जेवरातों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच कोई विवाद नहीं है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नरेंद्र सिंह मरावी ने कहा कि तलाक आपसी सहमति से हुआ है और कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है, हालांकि उन्होंने अभी तक कोर्ट के लिखित आदेश की कॉपी नहीं देखी है।

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