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“पठानों से कह दो, चौहान आ गया है”: ‘चौहान’ के इस डायलॉग पर मचा बवाल, जानें क्यों भड़का क्षत्रिय परिषद?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Chauhan Movie Controversy: अजय देवगन की आने वाली फिल्म ‘चौहान’ अपने टीजर रिलीज के बाद से ही विवादों के घेरे में आ गई है।

फिल्म के एक खास डायलॉग और उसमें दिखाए गए कुछ दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सामाजिक संगठनों तक में तीखी बहस छिड़ गई है।

क्षत्रिय परिषद नामक संगठन ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए फिल्म मेकर्स से इतिहास को सांप्रदायिक चश्मे से न दिखाने की अपील की है।

आइए जानते है क्या है पूरा विवाद…

फिल्म के टीजर और डायलॉग पर क्यों है बवाल?

बीती 25 जून को मेकर्स ने फिल्म ‘चौहान’ का टीजर जारी किया था।

इस टीजर में अभिनेता अजय देवगन की आवाज में एक डायलॉग सुनाई देता है—”पठानों से कह दो, चौहान आ गया है।”

इसी डायलॉग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

क्षत्रिय परिषद का मानना है कि इस तरह के संवादों का इस्तेमाल जातिगत और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने के लिए किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने इसे समाज में धार्मिक और सामाजिक विभाजन पैदा करने की एक कोशिश बताया है।

‘क्षत्रिय परिषद’ की मांग और आपत्ति

क्षत्रिय परिषद ने एक आधिकारिक बयान जारी कर फिल्म के निर्माताओं से अपील की है कि वे राजपूत विरासत और ‘चौहान’ कुलनाम (सरनेम) का इस्तेमाल समकालीन यानी आज की सांप्रदायिक राजनीति के लिए न करें। संगठन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

इतिहास का सम्मान: इतिहास की अपनी एक जटिलता होती है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

ऐतिहासिक किरदारों या नामों का इस्तेमाल किसी खास राजनीतिक या वैचारिक फायदे के लिए नहीं होना चाहिए।

कम प्रतिनिधित्व का हवाला: संगठन का कहना है कि आज के मुख्यधारा के मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में राजपूत समुदाय की आवाज को पहले ही कम जगह मिलती है।

ऐसे में किसी राजपूत सरनेम का इस्तेमाल सिर्फ विवाद खड़े करने, वोट बैंक या राजनीतिक माहौल बनाने के लिए करना बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अपमानजनक है।

इतिहास के उदाहरणों से दी सीख

विवाद को शांत करने और अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए क्षत्रिय परिषद ने इतिहास के कई अहम पन्नों का हवाला दिया।

उन्होंने बताया कि मध्यकाल में लड़ाइयां धर्म या संप्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि शासन, वफादारी और सैन्य नीतियों के आधार पर लड़ी जाती थीं। इसके लिए उन्होंने कई उदाहरण दिए:

  1. खानवा का युद्ध: इस ऐतिहासिक युद्ध में महाराणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी मिलकर लड़े थे।
  2. हल्दीघाटी का युद्ध: महाराणा प्रताप की सेना की तरफ से अफगान सेनापति हकीम खान सूर ने मुगलों के खिलाफ मोर्चा संभाला था।
  3. पानीपत का प्रथम युद्ध: महाराजा विक्रमादित्य तोमर ने इब्राहिम लोदी की सेना के साथ मिलकर युद्ध लड़ा था।
  4. शेरशाह सूरी का इतिहास: फरीद खान (जो बाद में शेरशाह सूरी बना) का राजा रायसल शेखावत के साथ गहरा और मजबूत जुड़ाव था।

इन उदाहरणों के जरिए संगठन ने साफ किया कि राजपूत और पठान कई मौकों पर कंधे से कंधा मिलाकर लड़े हैं, इसलिए आज के दौर में उन पर सांप्रदायिक नजरिया थोपना पूरी तरह गलत है।

कश्मीर और पैलेट गन के चित्रण पर भी आलोचना

फिल्म सिर्फ अपने डायलॉग की वजह से ही नहीं, बल्कि कश्मीर संघर्ष के चित्रण को लेकर भी विवादों में है।

टीजर में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि पैलेट गन से कम नुकसान होता है।

इस पर बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कश्मीर में पैलेट गन के शिकार हुए एक मासूम बच्चे से जुड़ी खबर साझा करते हुए लिखा कि पैलेट गन कोई मामूली चीज नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के दायरे में आता है।

इसके साथ ही उन्होंने फिल्म की आलोचना करते हुए इसे ‘बॉलीवुड का विवेक अग्निहोत्री-फिकेशन’ करार दिया।

स्वरा ने यह भी साफ किया कि मुख्यधारा के कश्मीरी लोग पठान नहीं हैं, इसलिए टीजर की समझ पर भी सवाल उठते हैं।

फिल्म की रिलीज और मेकर्स

तमाम विवादों और सोशल मीडिया पर हो रही मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच यह फिल्म 1 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।

इस फिल्म का निर्माण जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है, जिसके निर्माता ज्योति देशपांडे, आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा हैं।

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