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सेंसरशिप और सुरक्षा के बीच फंसी ‘सतलुज’: IT रूल्स का हवाला देकर ZEE5 से हटाया गया, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Satluj Movie Removed ZEE5: बॉलीवुड और पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की  फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों जबरदस्त चर्चा और विवादों में है।

यह फिल्म 2 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई थी, लेकिन महज तीन दिन बाद यानी 5 जुलाई को इसे अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

बिना किसी पूर्व सूचना के फिल्म के गायब होने से फैंस हैरान रह गए और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।

अब इस मामले में नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को किसी तकनीकी खराबी के कारण नहीं, बल्कि भारत सरकार के कड़े आदेश के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया गया है।

सरकार ने इसके लिए ‘आईटी रूल्स 2021’ (IT Rules 2021) का हवाला दिया है।

क्या है फिल्म को हटाने की असली वजह?

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ZEE5 को इस फिल्म को तुरंत हटाने का निर्देश दिया था।

अधिकारियों का कहना है कि फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी और इसके कुछ दृश्यों का गलत इस्तेमाल भारत विरोधी ताकतें कर सकती हैं।

सरकार को अंदेशा है कि फिल्म के कुछ हिस्सों का सहारा लेकर खालिस्तान समर्थक आंदोलन को हवा दी जा सकती है और पंजाब में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा सकती है।

खासकर पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह के संवेदनशील कंटेंट को दिखाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं माना गया।

सरकार का साफ कहना है कि देश की सुरक्षा के मामलों में कोई समझौता नहीं किया जा सकता और यह राजनीति का नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता का विषय है।

पंजाब 95′ से ‘सतलुज’ बनने की कहानी और सेंसर बोर्ड का विवाद

यह पूरा विवाद समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा।

दरअसल, यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है।

साल 2023 में जब यह फिल्म बनकर तैयार हुई, तब इसका नाम ‘पंजाब 95’ रखा गया था।

फिल्म के मेकर्स ने साल 2022 में ही इसके सर्टिफिकेशन के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड के पास आवेदन किया था।

सेंसर बोर्ड ने फिल्म को देखने के बाद इसके टाइटल और कई दृश्यों पर गंभीर आपत्ति जताई।

बोर्ड ने मेकर्स को फिल्म में 127 कट लगाने और कई बदलाव करने का सुझाव दिया।

लेकिन फिल्म मेकर्स इन कट्स के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने सेंसर बोर्ड के सुझावों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण फिल्म की भारत में थियेट्रिकल रिलीज रुक गई।

इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया।

साल 2023 में ही इसका वर्ल्ड प्रीमियर ‘टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ (TIFF) में हुआ, जहाँ दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग और फिल्म की कहानी की खूब तारीफ हुई।

फरवरी 2025 में इसे दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में रिलीज भी किया गया।

ओटीटी (OTT) का फायदा उठाने की कोशिश और सरकार का एक्शन

एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, जब सेंसर बोर्ड ने फिल्म को पास नहीं किया, तो मेकर्स ने एक नया रास्ता निकाला।

उन्होंने बिना कट्स के इस फिल्म का नाम ‘सतलुज’ रखा और चुपके से इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर स्ट्रीम कर दिया।

चूंकि भारत में ओटीटी पर रिलीज होने वाले कंटेंट को सेंसर बोर्ड (CBFC) रेगुलेट नहीं करता है, इसलिए मेकर्स को लगा कि वे बिना कट्स के फिल्म दर्शकों तक पहुँचा देंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ‘सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021’ के भाग-3 के तहत आते हैं।

जैसे ही यह मामला सरकार के संज्ञान में आया कि सेंसर बोर्ड द्वारा रोकी गई फिल्म को बिना कट्स के ओटीटी पर लाइव कर दिया गया है, सरकार ने तुरंत एक्शन लिया और आईटी रूल्स का इस्तेमाल करते हुए ZEE5 को फिल्म हटाने का ऑर्डर दे दिया।

अनुराग कश्यप का फूटा गुस्सा, ईरानी डायरेक्टर से की तुलना

फिल्म को अचानक हटाए जाने से फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग बेहद नाराज हैं।

मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का कड़ा विरोध किया है।

उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान का समर्थन करते हुए लिखा, “सतलुज… मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हनी त्रेहान को भी उसी स्थिति और सेंसरशिप का सामना करना पड़ेगा, जिससे ईरान में जाफर पनाही को गुजरना पड़ा था।”

बता दें कि जाफर पनाही ईरान के एक ऐसे फिल्ममेकर हैं, जिन्हें अपनी फिल्मों में अभिव्यक्ति की आजादी की वकालत करने के लिए वहां की सरकार द्वारा जेल, पाबंदियों और भारी सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है।

अनुराग कश्यप द्वारा की गई यह तुलना इस समय इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रही है।

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पायरेसी का बढ़ा खतरा: दिलजीत ने की शेयर करने की अपील, ZEE5 परेशान

फिल्म हटने के बाद लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ का भी एक बड़ा बयान सामने आया है।

उन्होंने बेबाकी से कहा, “मुझे इस बात की कोई फिक्र नहीं है। मुझे पहले से ही अंदाजा था कि इस फिल्म को हटा लिया जाएगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि कई लोगों ने इसे हटने से पहले ही डाउनलोड कर लिया था। मैं फैंस से कहूँगा कि इस फिल्म को जितना हो सके डाउनलोड करके एक-दूसरे से शेयर करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाएं।”

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दिलजीत की इस अपील का असर यह हुआ कि फैंस अब यूट्यूब, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म के पायरेटेड वर्जन अपलोड कर रहे हैं।

इस बढ़ती पायरेसी को देखकर ZEE5 की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ZEE5 ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर फैंस से अपील की है, “कृपया पायरेसी का समर्थन न करें। हम इस फिल्म को कानूनी तरीके से वापस लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

फिलहाल फिल्म पर रोक जारी है और देखना होगा कि ‘सतलुज’ कानूनी लड़ाई जीतकर वापस आ पाती है या नहीं।

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