AC Coach Theft Rule: भारतीय रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और उनके सामान की हिफाजत को लेकर रेलवे पुलिस मुख्यालय ने एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है।
अब ट्रेन के एसी (AC) कोच में अगर किसी यात्री का सामान चोरी होता है, तो इसे सिर्फ यात्री की बदकिस्मती मानकर नहीं छोड़ा जाएगा।
रेलवे पुलिस ने साफ कर दिया है कि ऐसी घटनाओं के लिए अब डिब्बे में तैनात कोच अटेंडेंट को भी सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और मामले की जांच में उसे आरोपी बनाया जाएगा।
रेलवे पुलिस मुख्यालय (GRP) का स्पष्ट तर्क है कि एसी कोच की देखरेख, यात्रियों की सहूलियत और उनके सामान की सुरक्षा की सीधी जिम्मेदारी अटेंडेंट की ड्यूटी का हिस्सा होती है।
जब कोच बंद रहता है और उसमें अनधिकृत लोगों का प्रवेश वर्जित होता है, तब वहां से सामान का गायब हो जाना अटेंडेंट की सतर्कता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इसी वजह से अब जांच का मुख्य बिंदु अटेंडेंट की भूमिका ही रहेगा।
विदिशा और ग्वालियर में तेजी से बढ़े मामले
रेलवे पुलिस के इस सख्त रुख के पीछे हाल के वर्षों में आए चौंकाने वाले आंकड़े हैं।
मध्य प्रदेश के विदिशा और ग्वालियर जैसे प्रमुख स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों में चोरी के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है।
* विदिशा जीआरपी थाना: पिछले तीन वर्षों के दौरान यहां चोरी के कुल 116 मामले दर्ज किए गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश वारदातें एसी कोचों के भीतर ही अंजाम दी गईं, जबकि जनरल और स्लीपर कोचों में ऐसी घटनाएं तुलनात्मक रूप से काफी कम रहीं।
* ग्वालियर जीआरपी क्षेत्र: ग्वालियर में स्थिति और भी गंभीर नजर आती है। साल 2022 में एसी डिब्बों में चोरी के 109 मामले सामने आए थे, जो 2023 में बढ़कर 129 हो गए। वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा सीधे उछलकर 334 तक पहुंच गया।
महज दो सालों के भीतर मामलों का करीब तीन गुना बढ़ जाना यह साफ दर्शाता है कि शातिर चोरों ने एसी डिब्बों को अपना आसान निशाना बना लिया था।
अटेंडरों पर क्यों बढ़ा संदेह?
लगातार होती चोरियों के अलावा कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिन्होंने अटेंडरों को सीधे शक के दायरे में ला खड़ा किया है।
इसी साल फरवरी के महीने में रेलवे नेटवर्क के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा मामला पकड़ा गया था।
इस मामले में एक ट्रेन के कोच अटेंडेंट को ही मुख्य आरोपी बनाया गया, जिसके पास से दो बैगों में छुपाकर रखे गए 311 दुर्लभ और प्रतिबंधित प्रजाति के जीवित कछुए बरामद किए गए थे।
इस घटना ने साफ कर दिया कि कई मामलों में बाहरी चोरों के बजाय अंदरूनी स्टाफ की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
यही कारण है कि अब रेलवे पुलिस किसी भी तरह की छूट देने के मूड में नहीं है।
डीजी रेल का बयान और यात्रियों को राहत
रेलवे पुलिस के महानिदेशक (DG Rail) राजाबाबू सिंह ने इस फैसले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यात्रियों की सुरक्षा जीआरपी की सबसे पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
बढ़ते अपराधों पर नकेल कसने के लिए अटेंडरों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य हो गया था।
अब एसी डिब्बे में चोरी होने पर अटेंडेंट के खिलाफ मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाएगी।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस कदम से जहां एक तरफ अटेंडेंट अपनी ड्यूटी के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों को भी अपनी यात्रा के दौरान अधिक सुरक्षा और राहत का अहसास होगा।
आने वाले दिनों में यह नियम पूरे रेलवे नेटवर्क पर बेहद सख्ती के साथ लागू किया जाएगा।
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