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गरबा में सुंदर दिखने के लिए ‘ग्लो ड्रिप’ का जानलेवा ट्रेंड: इंस्टेंट चमक के चक्कर में फेल हो सकता है दिल और गुर्दा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Garba Beauty Trends Risks: त्योहारों के सीजन, विशेषकर नवरात्रि और गरबा के दौरान हर कोई सबसे अलग और खूबसूरत दिखना चाहता है।

इसके लिए लोग तरह-तरह के मेकअप, ब्यूटी ट्रीटमेंट और स्किन केयर का सहारा लेते हैं।

लेकिन इस बार अहमदाबाद, मुंबई और कई बड़े शहरों में एक नया और खतरनाक ट्रेंड देखने को मिल रहा है—IV ग्लो ड्रिप (IV Glow Drip)।

दावा किया जाता है कि यह ड्रिप नसों में लगते ही चेहरे को तुरंत निखार देती है, रंगत को साफ करती है और शरीर को हाइड्रेट करती है।

इसी “इंस्टेंट फेयरनेस” और तुरंत चमक पाने के चक्कर में कई लड़कियां और युवा बिना सोचे-समझे इन ड्रिप्स को ले रहे हैं।

क्या है इस ड्रिप में खास

इस ड्रिप में मुख्य रूप से विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और सबसे चर्चित तत्व ग्लूटाथियोन (Glutathione) को एक सलाइन (Saline) बोतल के जरिए सीधे इंसान की नसों में पहुंचाया जाता है।

सैलून और तथाकथित ‘ग्लो बार’ इसे एक सामान्य ब्यूटी सर्विस की तरह प्रमोट कर रहे हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद जोखिम भरा कदम है।

ग्लूटाथियोन (Glutathione) क्या है और त्वचा पर इसका असर?

ग्लूटाथियोन कोई नया कृत्रिम रसायन नहीं है; यह एक बहुत शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से यकृत (Liver) और कोशिकाओं द्वारा बनाया जाता है।

यह शरीर में टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और कोशिकाओं को स्वस्थ रखने का काम करता है।

त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार:

* रंगत का सच: हमारी त्वचा का रंग ‘मेलेनिन’ (Melanin) नामक एक पिगमेंट पर निर्भर करता है। ग्लूटाथियोन मेलेनिन के बनने की प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव करता है, जिससे त्वचा का रंग हल्का दिखाई देने लगता है।

* अधूरा दावा: बाजार में यह प्रचारित किया जा रहा है कि इसे नसों के जरिए हाई डोज में लेने से त्वचा हमेशा के लिए गोरी हो जाएगी। जबकि सच्चाई यह है कि इसका कोई पुख्ता और दीर्घकालिक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

* अस्थायी असर: यदि किसी को शुरुआती परिणाम मिलते भी हैं, तो वे बेहद सीमित और अस्थाई होते हैं। ड्रिप या इंजेक्शन बंद करते ही त्वचा वापस अपनी पुरानी स्थिति में आने लगती है।

नसों में ड्रिप लेना क्यों बन रहा है जानलेवा?

जब कोई दवा या सप्लीमेंट नसों के जरिए सीधे खून में भेजा जाता है, तो उसका असर शरीर पर तुरंत होता है।

अगर दवा की गुणवत्ता खराब हो, उसमें मिलावट हो या डोज सही न हो, तो यह सेकंडों में शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टरों ने इसके कई गंभीर दुष्परिणाम बताए हैं:

* एनाफिलैक्सिस (Anaphylaxis – गंभीर एलर्जी):

बिना डॉक्टरी जांच के ग्लूटाथियोन या किसी भी केमिकल का इंजेक्शन देने से अचानक भयानक एलर्जी हो सकती है।

इसमें सांस की नली बंद होने लगती है, ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है और मरीज सदमे (Shock) में चला जाता है।

* दिल पर असर: ब्लड प्रेशर के अचानक गिरने से दिल की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती हैं, जिससे कार्डियक अरेस्ट या हार्ट फेलियर का खतरा बन जाता है।

* संक्रमण का खतरा: ब्यूटी सैलून या ग्लो बार में अस्पताल जैसा स्वच्छ और बैक्टीरिया-मुक्त (Sterile) माहौल नहीं होता। दूषित सुई या ड्रिप से शरीर में सेप्सिस (Sepsis) जैसा गंभीर संक्रमण फैल सकता है।

मुंबई का मामला: 8 ड्रिप के बाद महिला की किडनी खतरे में

हाल ही में मुंबई के बांद्रा इलाके से एक डरावना मामला सामने आया है, जहां एक 28 वर्षीय महिला ने एक सैलून में गोरा होने के लिए ग्लूटाथियोन ड्रिप के 8 सेशन लिए।

* किडनी की स्थिति बिगड़ना: ड्रिप के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। जब मेडिकल टेस्ट कराया गया तो पाया गया कि उसके खून में क्रिएटिनिन (Creatinine) का स्तर 0.9 mg/dL (जो कि सामान्य है) से बढ़कर 2.8 mg/dL तक पहुंच गया।

* अस्पताल में भर्ती: क्रिएटिनिन का इतना हाई स्तर किडनी के काम न करने (Kidney Damage/Failure) का सीधा संकेत है।

महिला को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और उसकी किडनी को रिकवर करने के लिए लंबा इलाज चला।

अमेरिका की हेल्थ एजेंसी FDA (Food and Drug Administration) ने भी नसों के जरिए दिए जाने वाले ग्लूटाथियोन और अनअप्रूव्ड फेयरनेस इंजेक्शनों को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की है कि ये जानलेवा हो सकते हैं।

सैलून या ‘ग्लो बार’ में ड्रिप लगवाना कितना सुरक्षित है?

त्वचा विशेषज्ञों (Dermatologists) का स्पष्ट कहना है कि नसों में ड्रिप लगाना कोई सामान्य ‘फेशियल या क्लीन-अप’ जैसा ब्यूटी ट्रीटमेंट नहीं है। यह एक मेडिकल प्रोसीजर है।

सैलून में ड्रिप लेने से पहले इन बातों को नजरअंदाज करना भारी पड़ता है:

* पैथोलॉजी टेस्ट का न होना: ड्रिप देने से पहले मरीज की किडनी, लिवर और ब्लड प्रेशर की जांच होनी चाहिए, जो सैलून वाले कभी नहीं करते।

* इमर्जेंसी सुविधाओं की कमी: अगर ड्रिप के दौरान कोई एलर्जी या हार्ट की समस्या हो जाए, तो सैलून में ऑक्सीजन, लाइफ-सपोर्ट या ट्रेन डॉक्टर नहीं होते।

* नकली और मिलावटी प्रोडक्ट्स: कई बार मुनाफा कमाने के लिए सस्ते और घटिया क्वालिटी के इंपोर्टेड इंजेक्शन इस्तेमाल किए जाते हैं जो शरीर के लिए जहर के समान काम करते हैं।

सप्लीमेंट्स और गोलियों की सच्चाई

सिर्फ ड्रिप ही नहीं, बाजार में ग्लूटाथियोन की गोलियां और सप्लीमेंट्स भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं।

हालांकि भारत में FSSAI न्यूट्रास्यूटिकल्स पर नियम लागू करता है, लेकिन विज्ञापन में किए जाने वाले “10 दिन में गोरापन” जैसे दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं होता।

बिना सोचे-समझे खाई गई गोलियां भी लिवर और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकती हैं।

नवरात्रि में सुरक्षित और प्राकृतिक चमक पाने के आसान उपाय

यदि आप इस फेस्टिव सीजन में चेहरे पर असली और सेहतमंद निखार चाहते हैं, तो जोखिम भरे इंजेक्शनों के बजाय इन प्राकृतिक और सुरक्षित तरीकों को अपनाएं:

* भरपूर पानी पिएं: शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखें। दिन में 8-10 गिलास पानी पीने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।

* पर्याप्त नींद लें: देर रात तक गरबा खेलने के बाद कम से कम 7-8 घंटे की पूरी नींद लें ताकि स्किन सेल्स खुद को रिपेयर कर सकें।

* संतुलित आहार: विटामिन-सी (आंवला, संतरा, नींबू) और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं, ये कुदरती रूप से ग्लूटाथियोन का स्तर बढ़ाते हैं।

* सनस्क्रीन का प्रयोग: दिन के समय धूप से बचने के लिए अच्छी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।

* डॉक्टरी सलाह: अगर चेहरे पर दाग-धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या ज्यादा है, तो सैलून जाने के बजाय किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) से प्रमाणित मेडिकल ट्रीटमेंट लें।

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