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जून में इस तारीख से शुरू होगा ‘मृत्यु पंचक’: भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना बढ़ेगी परेशानी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mrityu Panchak rules: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में समय की गणना को बहुत महत्व दिया गया है।

जब भी हम कोई नया काम, शादी-ब्याह, या मुंडन जैसा मांगलिक कार्य करते हैं, तो सबसे पहले पंडित जी से शुभ मुहूर्त पूछते हैं।

मुहूर्त देखते समय एक चीज का विशेष ध्यान रखा जाता है, और वह है ‘पंचक’।

ज्योतिष के अनुसार, पंचक के 5 दिनों को बेहद संवेदनशील और कुछ मामलों में अशुभ माना जाता है।

साल 2026 के जून महीने में भी पंचक लगने जा रहा है। इस बार का पंचक आम पंचक नहीं है, बल्कि यह शनिवार से शुरू हो रहा है, जिसकी वजह से इसे ज्योतिष शास्त्र में ‘मृत्यु पंचक’ का नाम दिया गया है।

आइए जानते हैं कि यह मृत्यु पंचक कब से कब तक रहेगा, इसका क्या महत्व है और इस दौरान आपको किन बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

जून 2026 में मृत्यु पंचक की तारीख और समय

पंचांग और ज्योतिष गणना के अनुसार, जून महीने में पंचक की शुरुआत 6 जून 2026, शनिवार को शाम 07 बजकर 03 मिनट से होने जा रही है।

इस पंचक का समापन अगले 5 दिनों के बाद यानी 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर होगा।

चूंकि इसकी शुरुआत शनिवार के दिन से हो रही है, इसलिए इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है।

ज्योतिष में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव का माना जाता है, इसलिए यह पंचक बहुत ही प्रभावशाली और बाधाएं लाने वाला माना गया है।

आखिर क्या होता है पंचक और इसके प्रकार?

बहुत से लोग सोचते हैं कि पंचक क्या है? सीधे शब्दों में कहें तो यह ब्रह्मांड में चंद्रमा और नक्षत्रों की एक खास स्थिति (चाल) है।

जब चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाते हुए धनिष्ठा नक्षत्र के आखिरी हिस्से, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है, तो उस समय को पंचक काल कहा जाता है।

चंद्रमा को इन पांचों नक्षत्रों से गुजरने में लगभग 5 दिन का समय लगता है।

ज्योतिष शास्त्र में दिन (वार) के हिसाब से पंचक 5 प्रकार के होते हैं:

  1. रोग पंचक: रविवार से शुरू होने वाला पंचक शारीरिक परेशानियां (बीमारी) लेकर आता है।
  2. राज पंचक: सोमवार से शुरू होने वाला पंचक सरकारी कामों और करियर के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
  3. अग्नि पंचक: मंगलवार से शुरू होने वाले पंचक में आग का डर रहता है, इसलिए इस दौरान निर्माण कार्य नहीं होते।
  4. चोर पंचक: शुक्रवार से शुरू होने वाले पंचक में धन हानि या चोरी का खतरा रहता है।
  5. दोषमुक्त पंचक: बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक को पूरी तरह दोषों से मुक्त माना जाता है।
  6. मृत्यु पंचक: शनिवार से शुरू होने वाला पंचक सबसे ज्यादा कष्टकारी माना जाता है। नाम के मुताबिक ही यह जीवन में बड़ी बाधाएं, मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट लेकर आ सकता है।

मृत्यु पंचक में भूलकर भी न करें ये 5 काम

शास्त्रों के अनुसार, पंचक के इन पांच दिनों में कुछ विशेष सांसारिक और निर्माण से जुड़े कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है।

माना जाता है कि इस समय किए गए गलत काम या अशुभ काम का असर पांच गुना बढ़ जाता है।

इसलिए नीचे दिए गए 5 कामों से बिल्कुल दूर रहें:

1. मांगलिक कार्यों पर रोक: मृत्यु पंचक के दौरान शादी, सगाई, मुंडन या नए घर में गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस समय किया गया कोई भी शुभ कार्य मनमुताबिक फल नहीं देता।

2. लकड़ी इकट्ठा करना या काटना: पंचक के दौरान लकड़ी काटना, उसे खरीदना या घर में लकड़ी का सामान (जैसे बेड, सोफा आदि) इकट्ठा करना वर्जित माना जाता है। ऐसा करना अशुभ फल दे सकता है।

3. घर की छत डालना या चारपाई बुनना: अगर आप नया मकान बनवा रहे हैं, तो याद रखें कि पंचक के दिनों में घर की छत (लेंथ डालना) नहीं बनवानी चाहिए। इसके अलावा, नई चारपाई, खाट या पलंग बुनवाना भी शास्त्रों में मना है।

4. दक्षिण दिशा की यात्रा: ज्योतिष में दक्षिण दिशा को यमराज (मृत्यु के देवता) की दिशा माना गया है। मृत्यु पंचक के दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या नुकसान का खतरा रहता है।

5. बड़ा निवेश और पैसों का लेन-देन: इस दौरान भारी-भरकम पैसों के लेन-देन, किसी नए बिजनेस की शुरुआत या शेयर बाजार आदि में बड़े निवेश से बचना चाहिए। साथ ही नई गाड़ियां या बड़ी मशीनरी खरीदना भी इस समय टाल देना चाहिए।

वैज्ञानिक और खगोलीय दृष्टिकोण क्या है?

इसे केवल अंधविश्वास या पुरानी मान्यता नहीं कहा जा सकता। अगर हम विज्ञान या खगोल शास्त्र (Astronomy) के नजरिए से देखें, तो यह अंतरिक्ष में चंद्रमा की एक तय स्थिति है।

जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए क्रांतिवृत्त (Ecliptic) के 296 डिग्री 40 मिनट से लेकर 360 डिग्री के क्षेत्र में आता है, तो वह इन विशेष पांच नक्षत्रों के प्रभाव में होता है।

यह विशुद्ध रूप से एक गणितीय और ब्रह्मांडीय घटना है, जिसे हमारे ऋषियों-मुनियों ने इंसानी जीवन पर पड़ने वाले असर के आधार पर पंचक का नाम दिया।

पंचक में अगर किसी की मृत्यु हो जाए तो क्या करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक काल में किसी व्यक्ति का निधन होना परिवार के लिए कष्टकारी माना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि अगर पंचक में किसी का अंतिम संस्कार बिना नियमों के सीधे कर दिया जाए, तो परिवार के अन्य सदस्यों पर भी संकट आ सकता है।

दोष दूर करने का उपाय:

अगर किसी कारणवश पंचक में दाह संस्कार करना पड़े, तो शास्त्रों में इसका बहुत ही आसान उपाय बताया गया है।

अंतिम संस्कार के समय शव के साथ कुशा (एक विशेष प्रकार की घास) और जौ के आटे से बने 5 पुतले रखे जाते हैं।

इन पुतलों का पूरे नियम के साथ शव के साथ ही दाह संस्कार किया जाता है।

ऐसा करने से पंचक का दोष पूरी तरह से खत्म हो जाता है और परिवार पर आने वाली मुसीबत टल जाती है।

अशुभ प्रभावों से बचने के लिए क्या करें?

भले ही पंचक में नए और सांसारिक कार्यों की मनाही हो, लेकिन इस दौरान भगवान की भक्ति पर कोई रोक नहीं है।

अगर आप पंचक के बुरे असर से बचना चाहते हैं, तो इन 5 दिनों में ये काम कर सकते हैं:

  • पूजा-पाठ और दान: इन दिनों में भगवान का भजन-कीर्तन करना, गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद शुभ होता है।
  • गरीबों की मदद: किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को भोजन कराना या कपड़े दान करना आपके ग्रहों के नकारात्मक असर को कम कर देता है।
  • आशीर्वाद लें: अगर कोई काम बहुत जरूरी हो और उसे टाला न जा सके, तो घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर और भगवान का नाम स्मरण करके ही कदम आगे बढ़ाएं।
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