Jyeshtha Maas Vrat Tyohar: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का तीसरा महीना ‘ज्येष्ठ’ अपनी तपन और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
साल 2026 में यह महीना बेहद खास होने वाला है। इस बार ज्येष्ठ का महीना सामान्य 30 दिनों का न होकर पूरे 59 दिनों का होगा।
इसका कारण है ‘अधिकमास’ (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) का ज्येष्ठ के साथ जुड़ना।
इसकी शुरुआत 2 मई 2026, शनिवार से हो रही है, जो 29 जून 2026 तक चलेगा।
धर्म और ज्योतिष की दृष्टि से ज्येष्ठ मास भगवान विष्णु, सूर्य देव और बजरंगबली की साधना का सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है।
आइए जानते हैं इस महीने के महत्व, उपायों और त्योहारों की पूरी जानकारी।

ज्येष्ठ में अधिकमास का महत्व
जब हिंदू कैलेंडर में सूर्य संक्रांति नहीं होती, तो उस महीने को ‘अधिकमास’ कहा जाता है।
2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान अधिकमास पड़ रहा है।
शास्त्रों में अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं।
इसलिए, इस दौरान किए गए दान, जप और तप का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।
इसे ‘मलमास’ भी कहते हैं, जिसमें शुभ कार्य (शादी, मुंडन आदि) वर्जित होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह स्वर्णिम काल है।

शुभ फल के लिए ज्येष्ठ माह के अचूक उपाय
1. जल दान का विशेष महत्व: ज्येष्ठ के महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है। इस समय प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। सड़कों पर प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना और मटके का दान करना कुंडली के दोषों को शांत करता है।
2. सूर्य देव की उपासना: ज्येष्ठ का स्वामी सूर्य है। सेहत और मान-सम्मान के लिए रोज सुबह तांबे के लोटे में जल लेकर ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र के साथ अर्घ्य दें।
3. विष्णु पूजा (जलस्थ विष्णु): अधिकमास के कारण विष्णु पूजा अनिवार्य है। इस महीने भगवान विष्णु की मूर्ति को जल में रखकर पूजा करने की परंपरा है, जिसे ‘जलस्थ विष्णु पूजा’ कहते हैं। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
4. हनुमान जी और बड़ा मंगल: ज्येष्ठ के हर मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ कहा जाता है। मान्यता है कि इसी महीने हनुमान जी की मुलाकात भगवान राम से हुई थी। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं टल जाती हैं।

मई 2026: व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट
मई का महीना त्योहारों के लिहाज से बहुत व्यस्त और पवित्र रहने वाला है। यहाँ प्रमुख तिथियां दी गई हैं:
- 1 मई (शुक्रवार): बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती मई की शुरुआत भगवान बुद्ध के जन्मोत्सव से हुई। इसी दिन भगवान विष्णु ने ‘कूर्म’ (कछुआ) अवतार लिया था।
- 2 मई (शनिवार): ज्येष्ठ माह का प्रारंभ और नारद जयंती आज से ज्येष्ठ महीने की शुरुआत हुई है। साथ ही देवर्षि नारद की जयंती भी है, जो भक्ति और संवाद के प्रतीक हैं।
- 5 मई (मंगलवार): एकदंत संकष्टी चतुर्थी व पहला बड़ा मंगल गणेश जी की पूजा के साथ-साथ इस दिन हनुमान जी का पहला ‘बड़ा मंगल’ भी मनाया जाएगा।
- 12 मई (मंगलवार): दूसरा बड़ा मंगल दक्षिण भारत में इसे ‘तेलुगु हनुमान जयंती’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
- 13 मई (बुधवार): अपरा एकादशी इसे अचला एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को अपार कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है।
- 16 मई (शनिवार): वट सावित्री व्रत और शनि जयंती यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है। सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करेंगी। वहीं, शनि देव का जन्मोत्सव होने के कारण शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए लोग तेल का दान और विशेष पूजा करेंगे।
- 17 मई (रविवार): अधिकमास का प्रारंभ आज से पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) की औपचारिक शुरुआत होगी। चंद्र दर्शन के साथ भक्त मानसिक शांति की प्रार्थना करेंगे।
- 25 मई (सोमवार): गंगा दशहरा पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं। इस दिन गंगा स्नान और 10 प्रकार की वस्तुओं के दान से 10 तरह के पापों का नाश होता है।
- 27 मई (बुधवार): पद्मिनी एकादशी अधिकमास की एकादशी को ‘पद्मिनी एकादशी’ कहते हैं। यह कई वर्षों में एक बार आती है और इसका फल हज़ारों सालों की तपस्या के बराबर माना जाता है।
- 30 – 31 मई: अधिक पूर्णिमा व्रत मई का अंत पूर्णिमा की तिथियों के साथ होगा। इस दिन सत्यनारायण कथा और ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है।

ज्येष्ठ और ग्रहों का राशि परिवर्तन
मई 2026 में न केवल त्योहार हैं, बल्कि सूर्य और मंगल जैसे बड़े ग्रह भी अपनी राशि बदलेंगे।
इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा।
विशेषकर मेष, वृषभ और सिंह राशि वालों के लिए यह महीना ऊर्जा से भरपूर रहेगा, जबकि अन्य राशियों को धैर्य से काम लेने की सलाह दी जाती है।
ज्येष्ठ मास 2026 संयम, सेवा और साधना का महीना है।
अधिकमास के जुड़ने से इसकी शक्ति दोगुनी हो गई है।
अगर आप जीवन में सुख-शांति और प्रभु की कृपा चाहते हैं, तो इस पूरे महीने जल सेवा करें, जरूरतमंदों की मदद करें और विष्णु-हनुमान जी की शरण में रहें।
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