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महाशिवरात्रि 2026: शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 8 चीजें, महादेव को प्रसन्न करेंगे ये 4 खास भोग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mahashivratri Puja Vidhi: महाशिवरात्रि आस्था और अध्यात्म का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।

साल 2026 में यह पावन पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा।

मान्यता है कि इस रात ब्रह्मांड की ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा होता है, और जो भक्त सच्चे मन से महादेव की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

शिव विवाह नहीं, ‘शिवलिंग’ के प्रकट होने का उत्सव

लोग मानते हैं कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।

हालांकि, शिव पुराण के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के दिन ही भगवान शिव पहली बार ‘अग्नि लिंग’ के रूप में प्रकट हुए थे।

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इसी दिन ब्रह्मा जी और विष्णु जी ने सबसे पहले शिवलिंग की पूजा की थी।

जहां तक शिव-पार्वती विवाह की बात है, ग्रंथों के अनुसार वह अगहन मास (नवंबर के करीब) में हुआ था।

काशी और उज्जैन के विद्वानों का मानना है कि शिवरात्रि असल में शिव और शक्ति के मिलन की रात है, क्योंकि शिवलिंग में माता पार्वती का भी वास होता है।

चार प्रहर की पूजा: क्यों है रात का महत्व?

महाशिवरात्रि का अर्थ ही है ‘शिव की महान रात्रि’।

इस दिन रात की पूजा का फल हजार गुना अधिक मिलता है।

शास्त्रों में रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने का विधान है:

प्रहर समय (15 फरवरी रात से 16 फरवरी सुबह तक) महत्व
पहला प्रहर शाम 06:20 से रात 09:20 तक इसे प्रदोष काल कहते हैं, जो मानसिक शांति देता है।
दूसरा प्रहर रात 09:21 से रात 12:21 तक इसे निशिथ काल कहते हैं, जो भौतिक सुख बढ़ाता है।
तीसरा प्रहर रात 12:22 से रात 03:22 तक यह प्रहर आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान देता है।
चौथा प्रहर रात 03:23 से सुबह 06:23 तक ब्रह्म मुहूर्त में की गई यह पूजा मोक्ष प्रदायिनी है।
Sawan Somwar Vrat Thali
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व्रत के कड़े नियम: श्रद्धा और संयम

महाशिवरात्रि का व्रत संकल्प और शुद्धि का प्रतीक है। अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  1. स्नान: सुबह जल्दी उठें, जल में गंगाजल और काले तिल डालकर स्नान करें।

  2. आहार: पुराणों के अनुसार निराहार (बिना कुछ खाए-पिए) रहना श्रेष्ठ है। लेकिन अगर स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो फल, दूध और पानी ले सकते हैं। अन्न का सेवन वर्जित है।

  3. आचरण: दिन में सोने से बचें। झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या विवाद करना व्रत के पुण्य को खत्म कर देता है।

  4. मंत्र: दिन भर मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करते रहें।

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महादेव के 4 प्रिय भोग: जो हर इच्छा करेंगे पूरी

पूजा के दौरान शिवलिंग पर इन 4 चीजों का भोग अवश्य लगाएं:

  1. पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण। यह आरोग्य का वरदान देता है।

  2. ठंडाई और भांग: शिव ‘नीलकंठ’ हैं। भांग की शीतलता उनके विष के ताप को कम करती है। (इसका उपयोग केवल औषधि और परंपरा के रूप में करें)।

  3. कंदमूल और बेर: ये फल सादगी के प्रतीक हैं। शबरी के बेर की तरह महादेव भी निष्कपट भक्ति के भूखे हैं।

  4. सफेद मिठाइयां: मखाने की खीर या दूध की बर्फी। सफेद रंग शिव को अत्यंत प्रिय है।

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शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 8 चीजें

अनजाने में की गई गलती पूजा के फल को कम कर सकती है। शास्त्रों में इन चीजों को वर्जित बताया गया है:

  1. तुलसी: एक पौराणिक श्राप के कारण शिव पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

  2. हल्दी: हल्दी स्त्रियों के सौंदर्य प्रसाधन से जुड़ी है, जबकि शिवलिंग वैराग्य का प्रतीक है।

  3. केतकी का फूल: झूठ बोलने के कारण भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से निष्कासित कर दिया था।

  4. नारियल पानी: नारियल तो चढ़ाया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग का अभिषेक नारियल पानी से नहीं करना चाहिए।

  5. खंडित बेलपत्र: बेलपत्र हमेशा साबुत होना चाहिए। कटा-फटा या छेद वाला बेलपत्र स्वीकार्य नहीं है।

  6. तामसिक बर्तन: दूध और दही का अभिषेक तांबे के लोटे से नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह जहर के समान हो जाता है। स्टील या चांदी के बर्तन का प्रयोग करें।

  7. बासी सामग्री: पुरानी मिठाई, मुरझाए फूल या पहले का बचा हुआ भोग न चढ़ाएं।

  8. सिर्फ सुबह की पूजा: सबसे बड़ी गलती सिर्फ सुबह मंदिर जाकर लौट आना है। शिवरात्रि का असली फल रात की पूजा में है।

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सरल पूजन विधि 

अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो इन 15 सामग्रियों को तैयार रखें:

जल का लोटा, दूध, पंचामृत, चंदन, अक्षत (बिना टूटे चावल), फूल, बेलपत्र, धतूरा, धूप, दीपक, कपूर, मिठाई, फल, जनेऊ और दक्षिणा।

  • सबसे पहले दीप जलाएं और संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल, दूध और फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
  • चंदन का तिलक लगाएं, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  • बेलपत्र (उलटा करके) और जनेऊ चढ़ाएं।
  • मिठाई और फल का भोग लगाएं (भोग पर बेलपत्र जरूर रखें)।
  • धूप दिखाकर कपूर से आरती करें और अंत में क्षमा याचना करें।

इस बार 15 फरवरी को पूरी निष्ठा के साथ महादेव की शरण में जाएं, आपकी झोली खुशियों से भर जाएगी।

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