Inder Singh Chauhan Controversy: मध्यप्रदेश में इन दिनों ‘माननीयों’ के रिश्तेदारों की दबंगई लगातार बढ़ती ही जा रही है।
अभी पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे का विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि अब अलीराजपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
यहां कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इंदर सिंह चौहान ने एक महिला प्रशासनिक अधिकारी (CEO) के साथ ऐसी बदसलूकी की है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 22 अप्रैल की दोपहर करीब 3 बजे की है।
अलीराजपुर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) प्रिया काग अपने दफ्तर में विभागीय कार्यों में व्यस्त थीं।
इसी दौरान इंदर सिंह चौहान, जो जनपद अध्यक्ष के पति भी हैं, अपने कुछ समर्थकों के साथ दफ्तर में दाखिल हुए।
विवाद की जड़ बनी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’।
दरअसल, इस योजना के तहत आए कुछ आवेदनों को जांच के बाद अपात्र पाया गया था, जिसके कारण प्रशासन ने उन्हें निरस्त (Reject) कर दिया था।
इंदर सिंह चौहान इसी बात से नाराज थे। आरोप है कि उन्होंने दफ्तर में घुसते ही चिल्लाना शुरू कर दिया और अपनी मर्यादा भूल गए।

धमकी दी- “यहीं जिंदा गाड़ दूंगा”
सीईओ प्रिया काग द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, इंदर सिंह चौहान का गुस्सा इतना ज्यादा था कि वे उन्हें मारने के लिए उनकी ओर दौड़े।
उन्होंने महिला अधिकारी को बेहद भद्दी गालियां दीं और धमकी देते हुए कहा, “तेरे दांत तोड़ दूंगा, तुझे यहीं जिंदा गाड़ दूंगा। यहां वही होगा जो मैं चाहूंगा, मेरी मर्जी के बिना यहां एक पत्ता भी नहीं हिलेगा।”
महिला अधिकारी ने बताया कि उस वक्त वे बुरी तरह सहम गई थीं।
वहां मौजूद लेखाधिकारी सावन भिंडे ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
प्रिया काग ने साफ शब्दों में कहा है कि अब वे अपने ही कार्यस्थल पर खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

पुलिस की कार्रवाई
मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण पुलिस ने तत्परता दिखाई।
इंदर सिंह चौहान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
अलीराजपुर एसपी रघुवंश सिंह भदौरिया ने पुष्टि की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था, हालांकि वहां से उसे फिलहाल जमानत मिल गई है।
मंत्री ने झाड़ा पल्ला
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद पर जब कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान से सवाल किया गया, तो उन्होंने अपने सगे भाई से पल्ला झाड़ लिया।
मंत्री ने कहा, “मेरा भाई अलग रहता है। सालों से मेरा उससे कोई बोलचाल या संबंध नहीं है। वह अपने कृत्यों के लिए खुद जिम्मेदार है और कानून अपना काम निष्पक्षता से करेगा।”

इंदर सिंह: विवादों का पुराना इतिहास
इंदर सिंह चौहान के लिए विवाद कोई नई बात नहीं है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इलाके में उनका काफी रसूख है और वे अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं।
इससे पहले खाद वितरण के दौरान एक सेल्समैन के साथ मारपीट का मामला भी उन पर दर्ज हो चुका है।
चर्चा यह भी है कि वे सरकारी दफ्तरों से सीसीटीवी कैमरे हटवाने के लिए भी दबाव बनाते रहे हैं ताकि उनकी गतिविधियों का कोई सबूत न रहे।
प्रशासनिक असुरक्षा और उठते सवाल
इस घटना ने मध्य प्रदेश में महिला अधिकारियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब एक जनपद सीईओ सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं का क्या हाल होगा?
यह घटना दर्शाती है कि कैसे सत्ता के करीब होने का घमंड लोक सेवकों के काम में बाधा डालता है
प्रिया काग का यह बयान कि वे “असुरक्षित महसूस कर रही हैं”, पूरे सिस्टम के चेहरे पर एक तमाचा है।
लोकतंत्र में अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
अगर जनप्रतिनिधि के परिजन अपनी मर्यादा लांघकर अधिकारियों को ‘जिंदा गाड़ने’ की धमकी देंगे, तो विकास कार्य ठप होना लाजिमी है।
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन ऐसे रसूखदारों पर सख्त कार्रवाई कर पाता है या मामला फाइल में दबकर रह जाएगा।
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