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गर्मी या भक्तों की भारी भीड़? अमरनाथ यात्रा शुरू होते ही 90% पिघले बाबा बर्फानी, सिर्फ 1 फीट बचा शिवलिंग का आकार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Amarnath Shivling melting: बाबा अमरनाथ के भक्तों के लिए एक चिंता में डालने वाली खबर सामने आ रही है।

अमरनाथ गुफा में बनने वाले पवित्र हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) का आकार तेजी से घटकर अब सिर्फ एक फीट रह गया है।

सोमवार को सामने आई ताजा तस्वीरों में देखा जा सकता है कि पवित्र शिवलिंग का लगभग 90% हिस्सा पिघल चुका है।

हैरान करने वाली बात यह है कि 57 दिनों तक चलने वाली यह पवित्र यात्रा अभी 3 जुलाई को ही शुरू हुई थी और शुरुआती कुछ दिनों में ही बर्फानी बाबा का आकार इतना छोटा हो गया है।

23 मई को था 7 फीट का आकार, फिर क्या हुआ?

अगर हम इतिहास या पिछले कुछ हफ्तों के आंकड़ों को देखें, तो 23 मई को जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने तस्वीर जारी की थी, तब शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट का था।

इसके बाद 29 जून को जब पहली आधिकारिक पूजा हुई, तब भी इसकी ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी।

लेकिन महज़ कुछ ही दिनों के भीतर, यानी 6 जुलाई आते-आते यह घटकर सिर्फ 1 फीट रह गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल मौसम में हो रहे बदलाव, बढ़ता तापमान और गुफा के भीतर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण पैदा होने वाली गर्मी (Body Heat) इसकी मुख्य वजह हो सकती है।

प्राकृतिक है शिवलिंग

अमरनाथ का शिवलिंग कोई ठोस बर्फ का ब्लॉक नहीं होता, जिसे तराशा गया हो। यह एक प्राकृतिक ‘आइस स्टैलेग्माइट’ है।

सर्दियों में गुफा की छत से पानी की बूंदें टपकती हैं और शून्य से नीचे तापमान होने के कारण वे जमकर शिवलिंग का रूप ले लेती हैं।

इसलिए, मौसम और तापमान के बदलते ही यह तेजी से पिघलने भी लगता है।

3 दिन में टूटे रिकॉर्ड, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

भले ही शिवलिंग का आकार छोटा हो गया हो, लेकिन बाबा के भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है।

यात्रा के शुरुआती तीन दिनों में ही 56,000 से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं।

अगर इसकी तुलना पिछले साल (2025) से की जाए, तो यह आंकड़ा करीब 18.6% ज्यादा है।

पिछले साल शुरुआती तीन दिनों में 47,972 लोग पहुंचे थे।

इस साल पूरी यात्रा के लिए अब तक लगभग 4 लाख लोग एडवांस रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।

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28 अगस्त तक चलेगी यात्रा

यह यात्रा दो मुख्य रास्तों से की जा रही है।

पहला रास्ता पारंपरिक है, जो नुनवान-पहलगाम से शुरू होता है। यह करीब 48 किलोमीटर लंबा है लेकिन इसमें चढ़ाई थोड़ी आसान है।

दूसरा रास्ता बालटाल से है, जो केवल 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसकी खड़ी चढ़ाई बेहद कठिन मानी जाती है।

यह यात्रा आगामी 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी।

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बिना रजिस्ट्रेशन वाले यात्री अभी रुकें: प्रशासन की सख्त चेतावनी

बढ़ती भीड़ को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

प्रशासन के मुताबिक, 9 जुलाई तक के सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह फुल हो चुके हैं।

इसलिए, जो लोग बिना रजिस्ट्रेशन के ही जम्मू या कश्मीर पहुंच रहे हैं, उनसे अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें।

अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि बालटाल या पहलगाम रूट पर बने चेक पॉइंट्स से आगे केवल उन्हीं यात्रियों को जाने दिया जाएगा जिनके पास वैध (Valid) रजिस्ट्रेशन होगा।

बिना कागजात वाले यात्रियों को 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

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2 जरूरी सवाल और उनके जवाब

1. सवाल: क्या यह शिवलिंग दोबारा बड़ा हो सकता है?

जवाब: इसकी उम्मीद बेहद कम है। ऐसा तभी मुमकिन है जब पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो और गुफा के अंदर का तापमान अचानक माइनस में चला जाए।

2. सवाल: क्या शिवलिंग पिघलने से यात्रा रुक जाएगी?

जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार या श्राइन बोर्ड की तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। यात्रा पूरी सुरक्षा के साथ अपने तय समय यानी 28 अगस्त तक जारी रहेगी।

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