Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र से करोड़ों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस और एसआईटी (SIT) ने बड़ी कार्रवाई की है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के बेहद करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों को पुलिस ने गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस इन सभी को कोर्ट में पेश कर 14 दिनों की रिमांड पर लेने की तैयारी में है।
हालांकि, इस पूरी कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया बवंडर खड़ा हो गया है।
विपक्ष और कई हिंदू संगठन सवाल उठा रहे हैं कि इस मामले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर गाज क्यों गिरी और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को क्लीन चिट क्यों दे दी गई?
कौन हैं ये 8 आरोपी और क्या था इनका काम?
पकड़े गए आरोपियों में से ज्यादातर लोग मंदिर के दान प्रबंधन, नोटों की गिनती और बैंक से जुड़े हुए थे। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया है।
1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: यह इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी है। टिन्नू यादव पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर था। धीरे-धीरे मंदिर के कामकाज में उसकी दखल इतनी बढ़ गई कि दानपात्रों की चाबियां भी उसी के पास रहने लगीं।
2. अनुकल्प मिश्र: इसे इस पूरे गबन और चोरी का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है। यह नोटों की गिनती के काम में लगा हुआ था। पुलिस ने इसके कौशलपुरी स्थित घर से 20 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
3. लवकुश मिश्र: यह अनुकल्प मिश्र का बहनोई है। इसके घर से भी पुलिस को लगभग 10 लाख रुपये कैश मिले हैं।
4. मनीष यादव: यह मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भतीजा है, जिसे टिन्नू ने करीब 4-5 महीने पहले ही मंदिर के काम में लगवाया था। इसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई है।
5. सुभाष श्रीवास्तव: यह केनरा बैंक से रिटायर्ड कर्मचारी है। रिटायरमेंट के बाद इसे ट्रस्ट में रखा गया था और इसका काम नोटों की गिनती की निगरानी करना था। निगरानी के बदले यह खुद इस खेल में शामिल हो गया।
6. अविनाश शुक्ल: यह भी नोटों की गिनती के काम में शामिल था। जांच टीम ने इसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये रिकवर किए हैं।
7. करुणेश पांडेय और 8. रमाशंकर मिश्र: ये दोनों भी कैश काउंटिंग टीम के सदस्य थे और मास्टरमाइंड अनुकल्प के बेहद करीबी थे। इनके पास से भी नकदी बरामद हुई है।
FIR और कानूनी धाराएं: लग सकती है उम्रकैद
पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बेहद गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:
- बीएनएस की धारा 306 व 305: मंदिर या पूजा स्थल से संपत्ति की चोरी करने के आरोप में (7 साल तक की सजा)।
- बीएनएस की धारा 316(5): आपराधिक विश्वासघात यानी भरोसे का कत्ल (इस धारा में अधिकतम आजीवन कारावास या 10 साल की सजा का प्रावधान है)।
- बीएनएस की धारा 317(4) व (5): चोरी का पैसा जानबूझकर छिपाना या ठिकाने लगाना (3 से 7 साल की सजा)।
- बीएनएस की धारा 61 व 3(5): सोची-समझी साजिश के तहत एक ग्रुप (संगठित रूप) बनाकर अपराध को अंजाम देना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) व 13(2): यह धारा सबसे महत्वपूर्ण है। इसके तहत किसी लोक सेवक (Public Servant) द्वारा सौंपे गए धन का दुरुपयोग करने पर कार्रवाई होती है। इस धारा के लगने से साफ है कि आने वाले दिनों में बैंक के कुछ सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी इस लपेटे में आएंगे।
सियासी बवंडर: विपक्ष के सवाल और चंपत राय का नाम गायब
जैसे ही एफआईआर की कॉपी सामने आई, वैसे ही उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई।
दरअसल, सूत्रों के हवाले से पहले खबर आई थी कि एसआईटी की 20 पन्नों की रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों को जिम्मेदार माना गया था।
लेकिन जब गुरुवार शाम को एफआईआर दर्ज हुई, तो उसमें चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा जैसे बड़े नाम गायब थे।
विपक्ष और कई हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार और प्रशासन बड़े चेहरों को बचा रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि जब चाबी टिन्नू यादव के पास थी, तो उसे चाबी देने वाले और उसकी निगरानी करने वाले बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है?
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का यह खेल काफी समय से चल रहा था, लेकिन यह पहली बार जून के महीने में खुलकर सामने आया।
- 7 जून: समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से करीब 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी हुई है। उसी शाम सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर इस मुद्दे को उठाया। मामले को बढ़ता देख ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सफाई पेश की।
- 9-10 जून: बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग कर दी। मामला सीधे पीएमओ (PMO) तक पहुंच गया। पीएमओ ने तुरंत इस पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की, जिसके बाद मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र तुरंत अयोध्या पहुंचे और मैराथन बैठकें कीं।
- 11 जून: इसी बीच ट्रस्ट के एक पूर्व लेखापाल (अकाउंटेंट) महिपाल सिंह का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्होंने साल 2021-2022 में भी ऐसी चोरी पकड़ी थी, लेकिन उस समय के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया था।
- 13 जून: चौतरफा दबाव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
- 15 से 20 जून: एसआईटी ने अयोध्या में डेरा डाल दिया। चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राय से कई घंटों तक आमने-सामने और अलग-अलग पूछताछ की गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों, नोट गिनने वाले कर्मचारियों और निजी एजेंसियों के प्रतिनिधियों के बयान दर्ज किए गए।
- 23 जून: एसआईटी ने 20 पन्नों की अपनी शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय प्रसाद को सौंपी।
- 25 जून: ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में पहली आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज की गई और सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
नृपेंद्र मिश्र बन सकते हैं ट्रस्ट के नए CEO
इस पूरे विवाद और वित्तीय गड़बड़ी के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है।
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि मंदिर के रोजमर्रा के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया जाए।
चर्चा है कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का नया सीईओ नियुक्त किया जा सकता है।
नृपेंद्र मिश्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद और पीएमओ में प्रमुख सचिव रह चुके हैं।
राम मंदिर का पूरा निर्माण कार्य उन्हीं की देखरेख में पूरा हुआ है, ऐसे में उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है ताकि भविष्य में ऐसी कोई गड़बड़ी न हो।
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