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अयोध्या से बड़ी खबर: राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Champat Rai Resigns: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे और चंदे में चोरी के आरोपों के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा भूचाल आ गया है।

इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

दोनों ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंप दिया है।

ट्रस्ट के एक अन्य वरिष्ठ सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें दोनों के इस्तीफे की जानकारी मिल चुकी है।

सिर्फ इतना ही नहीं, मंदिर के निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी व्यवस्थाओं से पूरी तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने चंपत राय के बेहद करीबी और उनके ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित 8 लोगों को गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अब इन सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 14 दिनों की रिमांड पर लेने की तैयारी में है ताकि चोरी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

SIT की रिपोर्ट और पहली FIR

इस पूरे मामले की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब पहली बार चढ़ावे में हेरफेर और चोरी की बात सामने आई थी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।

एसआईटी ने बारीकी से जांच करने के बाद 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी।

रिपोर्ट आने के तुरंत बाद एक्शन शुरू हो गया।

गुरुवार की शाम ट्रस्ट के ही एक सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर पुलिस ने पहली एफआईआर (FIR) दर्ज की।

हालांकि, इस एफआईआर में सीधे तौर पर चंपत राय या डॉ. अनिल मिश्रा जैसे बड़े पदाधिकारियों के नाम नहीं हैं, लेकिन गाज उनके करीबियों पर गिरी और सभी 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

कौन हैं ये 8 आरोपी और क्या था इनका काम?

पकड़े गए आरोपियों में से ज्यादातर लोग मंदिर के दान प्रबंधन, नोटों की गिनती और बैंक से जुड़े हुए थे।

पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया है।

1. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: यह इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी है। टिन्नू यादव पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइवर था। धीरे-धीरे मंदिर के कामकाज में उसकी दखल इतनी बढ़ गई कि दानपात्रों की चाबियां भी उसी के पास रहने लगीं।

 2. अनुकल्प मिश्र: इसे इस पूरे गबन और चोरी का ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है। यह नोटों की गिनती के काम में लगा हुआ था। पुलिस ने इसके कौशलपुरी स्थित घर से 20 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।

 3. लवकुश मिश्र: यह अनुकल्प मिश्र का बहनोई है। इसके घर से भी पुलिस को लगभग 10 लाख रुपये कैश मिले हैं।

 4. मनीष यादव: यह मुख्य आरोपी टिन्नू यादव का भतीजा है, जिसे टिन्नू ने करीब 4-5 महीने पहले ही मंदिर के काम में लगवाया थाइसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई है।

5. सुभाष श्रीवास्तव: यह केनरा बैंक से रिटायर्ड कर्मचारी है। रिटायरमेंट के बाद इसे ट्रस्ट में रखा गया था और इसका काम नोटों की गिनती की निगरानी करना था। निगरानी के बदले यह खुद इस खेल में शामिल हो गया।

 6. अविनाश शुक्ल: यह भी नोटों की गिनती के काम में शामिल था। जांच टीम ने इसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये रिकवर किए हैं।

7. करुणेश पांडेय और 8. रमाशंकर मिश्र: ये दोनों भी कैश काउंटिंग टीम के सदस्य थे और मास्टरमाइंड अनुकल्प के बेहद करीबी थे। इनके पास से भी नकदी बरामद हुई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख

इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जैसे ही एसआईटी की रिपोर्ट सामने आई, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई।

सीएम योगी ने भरोसा दिलाया, “हम इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेंगे। जनता की आस्था के साथ किसी भी कीमत पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो भी दोषी होगा, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज आस्था की दुहाई दे रहे हैं, ये वही लोग हैं जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था और अयोध्या के खिलाफ अदालतों में वकीलों की फौज खड़ी की थी।

कौन हैं चंपत राय?

चंपत राय का नाम राम मंदिर आंदोलन से दशकों से जुड़ा रहा है।

  • साल 1991 में उन्हें अयोध्या का क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाया गया था।
  • इसके बाद वह विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय महासचिव पद तक पहुंचे।

  • रामलला की सेवा के लिए उन्होंने आजीवन शादी नहीं की और अपना पूरा जीवन इसी काम में लगा दिया।
  • लोग उन्हें आदर से ‘रामलला का पटवारी’ भी कहते हैं।
  • बिजनौर के रहने वाले चंपत राय पहले केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, लेकिन 1975 में आपातकाल के दौरान 18 महीने जेल में रहने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए थे।

राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप

इस मामले के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार और ट्रस्ट को घेरना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में बहुत बड़ी लूट हुई है।

देश के गरीब लोगों ने अपनी श्रद्धा से जो चंदा दिया था, उसे गायब कर दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सीसीटीवी बंद करके हजारों करोड़ रुपये की चोरी बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के मुमकिन है? छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

वहीं, इस विवाद में शिवसेना (उद्धव गुट) की भी एंट्री हो गई है।

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सीधे सवाल दागा कि राम मंदिर निर्माण के लिए उद्धव ठाकरे की तरफ से दान की गई 4 किलो चांदी की पवित्र ईंट और 1 करोड़ रुपये कहां गए?

उन्होंने कहा कि इतने साल बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट की तरफ से इसकी कोई रसीद या जानकारी नहीं मिली है।

अब समय आ गया है कि इस पूरे मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच हो और जवाबदेही तय की जाए।

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