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जानें कैसे भोपाल बन रहा है संघ की ‘उप-राजधानी’, मध्यप्रदेश की राजनीति पर क्या होगा इसका असर?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

RSS Bhopal Headquarter: मध्य प्रदेश की सियासत और संगठन के गलियारों में इन दिनों एक नई चर्चा जोरों पर है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने संगठनात्मक ढांचे में एक ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जिसका सीधा असर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पर पड़ेगा।

आने वाले दिनों में भोपाल, नागपुर और दिल्ली की तरह ही संघ की गतिविधियों का एक बड़ा ‘पावर सेंटर’ यानी उप-राजधानी के रूप में पहचाना जाएगा।

दिग्गजों का नया ठिकाना: भोपाल

संघ ने अपने दो सबसे प्रभावशाली और अनुभवी चेहरों—डॉ. मनमोहन वैद्य और भैयाजी जोशी—के लिए भोपाल को नए केंद्र के रूप में चुना है।

डॉ. मनमोहन वैद्य, जो वर्तमान में सह सरकार्यवाह (Joint General Secretary) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, अब अपना मुख्यालय भोपाल में रख सकते हैं।

आमतौर पर इतने वरिष्ठ पदों पर बैठे पदाधिकारियों का केंद्र नागपुर या दिल्ली ही होता है, लेकिन भोपाल को चुनना यह दर्शाता है कि संघ के लिए मध्य प्रदेश का महत्व कितना बढ़ गया है।

वहीं, संघ में 12 वर्षों तक सरकार्यवाह (General Secretary) जैसा नंबर-2 का पद संभालने वाले भैयाजी जोशी ने भी अपनी स्वेच्छा से भोपाल में रहने का निर्णय लिया है।

हाल ही में बेंगलुरु में हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद भैयाजी जोशी ने पदमुक्त होकर दत्तात्रेय होसबोले को कमान सौंपी है।

दायित्व से मुक्त होने के बाद उनका अनुभव अब भोपाल से ही संघ और समाज को दिशा देगा।

राजनीतिक समीकरणों पर क्या होगा असर?

जानकारों का मानना है कि जब संघ के इतने बड़े स्तर के नेता किसी एक शहर में मौजूद होते हैं, तो वहां की सत्ता और संगठन पर उनका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

मनमोहन वैद्य और भैयाजी जोशी की मौजूदगी से मध्य प्रदेश भाजपा और राज्य सरकार के कामकाज में संघ की सक्रियता और निगरानी बढ़ सकती है।

हालांकि, सह सरकार्यवाह के तौर पर मनमोहन वैद्य का अधिकांश समय देशव्यापी प्रवास में बीतेगा, लेकिन उनकी रणनीतियों और बैठकों का मुख्य केंद्र अब भोपाल का ‘समिधा’ कार्यालय ही होगा।

समिधा में हलचल तेज

भोपाल स्थित आरएसएस के प्रांतीय कार्यालय ‘समिधा’ में इन दिनों तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं।

वरिष्ठ पदाधिकारियों के रहने, उनके कार्यालय और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं।

भोपाल को चुनने के पीछे इसकी भौगोलिक स्थिति भी एक बड़ा कारण है।

देश के केंद्र में होने की वजह से यहां से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के राज्यों में आना-जाना काफी आसान है।

पुरानी परंपरा का हिस्सा है यह फैसला

यह पहली बार नहीं है जब भोपाल को संघ के किसी बड़े चेहरे ने अपना आधार बनाया हो।

साल 2009 की यादें ताजा हो गई हैं, जब पूर्व संघ प्रमुख के.एस. सुदर्शन ने अपनी जिम्मेदारी मोहन भागवत को सौंपी थी।

उस वक्त सुदर्शन जी ने भी नागपुर छोड़कर भोपाल को ही अपना निवास बनाया था।

उनका तर्क था कि पदमुक्त होने के बाद नए नेतृत्व को काम करने के लिए खुला मैदान देना चाहिए और खुद किसी ऐसे स्थान पर रहकर योगदान देना चाहिए जहां से वे सहज महसूस करें।

संघ के इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे।

एक ओर जहां मध्य प्रदेश में संघ का कैडर और भी ज्यादा उत्साहित और सक्रिय होगा, वहीं दूसरी ओर भाजपा के भीतर भी समन्वय की नई प्रक्रियाएं शुरू होंगी।

भोपाल अब सिर्फ एक प्रशासनिक राजधानी नहीं, बल्कि वैचारिक और रणनीतिक रूप से भी देश के सबसे महत्वपूर्ण शहरों की सूची में मजबूती से खड़ा हो गया है।

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