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भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी: रिहायशी इलाकों में दुकानों पर फिलहाल राहत नहीं, जानिए शहर के लिए क्या है नया खाका

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Bhopal Master Plan draft 2047: राजधानी भोपाल के भविष्य की तस्वीर कैसी होगी, इसका खाका सामने आ चुका है। सरकार ने बहुप्रतीक्षित भोपाल मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है।

इस नए ड्राफ्ट में शहर को आधुनिक महानगर बनाने के लिए 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर, ग्रीनफील्ड बायपास, भौंरी में नॉलेज और एआई सिटी जैसे कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं।

हालांकि, कॉलोनियों और रिहायशी इलाकों में चल रही दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर फिलहाल कोई फौरी राहत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बीच ड्राफ्ट को जनता के सामने पेश किया गया है, जिस पर अब आम नागरिक और हितधारक अपने सुझाव, दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।

रिहायशी इलाकों में कारोबार पर राहत नहीं, सीलिंग का साया बरकरार

राजधानी में पिछले कुछ समय से रिहायशी इलाकों में चलने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग को लेकर काफी हलचल और विरोध देखने को मिला है।

नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट से व्यापारियों को उम्मीद थी कि शायद उन्हें तुरंत राहत मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान यह साफ हो चुका है कि जब तक किसी जमीन या इलाके का लैंड यूज आधिकारिक तौर पर नहीं बदल जाता, तब तक सिर्फ ड्राफ्ट में प्रस्ताव होने से सीलिंग नहीं रुकेगी।

कोर्ट ने स्पष्ट कर रखा है कि जो इलाके पूरी तरह रिहायशी (Residential) के लिए तय हैं, वहां दुकानें या दफ्तर नहीं चल सकते।

अगर कोई संपत्ति स्वीकृत नक्शे या आवंटन के विपरीत इस्तेमाल हो रही है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

कोर्ट ने यह भी कड़े शब्दों में कहा है कि कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए, यानी किसी एक दुकान को सील करना और किसी को छोड़ देना बर्दाश्त नहीं होगा।

51 किमी का ग्रोथ कॉरिडोर: बदल जाएगी शहर की रफ्तार

मास्टर प्लान 2047 का सबसे बड़ा आकर्षण 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर है।

करीब 3,000 हेक्टेयर में प्रस्तावित यह कॉरिडोर शहर के विकास का मुख्य केंद्र बनेगा।

* मिश्रित और हाई-डेंसिटी विकास: इस कॉरिडोर के दोनों तरफ होटल, मल्टीप्लेक्स, बड़े मॉल, अस्पताल, आईटी पार्क, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक हब और कॉर्पोरेट ऑफिस खोलने की खुली छूट होगी।

* अनलिमिटेड एफएआर (FAR): यहां निर्माण के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की कोई सीमा नहीं रखी गई है, जिससे गगनचुंबी इमारतों और आधुनिक परिसरों का निर्माण आसानी से हो सकेगा।

* चार हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर इंदौर, नर्मदापुरम, विदिशा और रायसेन रोड को आपस में जोड़ेगा, जिससे आसपास के जिलों से भोपाल की कनेक्टिविटी बेहद तेज और सुगम हो जाएगी।

* बीआरटीएस से एमआरटीएस: इस रूट पर सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए पहले बीआरटीएस और भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (मेट्रो/लाइट रेल) में बदला जाएगा।

आउटर बायपास, ग्रीन टीडीआर और पर्यावरण का संतुलन

मास्टर प्लान में शहर के फैलाव को संभालने के लिए निवेश क्षेत्र के बाहर एक नया ग्रीनफील्ड बायपास प्रस्तावित किया गया है।

पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बायपास के दोनों किनारों पर 50-50 मीटर की ग्रीन बेल्ट अनिवार्य की गई है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘ग्रीन टीडीआर’ (Transferable Development Rights) का फॉर्मूला लाया गया है।

जिन निजी जमीनों को हरित क्षेत्र या वन बफर में शामिल किया जाएगा, उनके मालिकों को विकास अधिकार (TDR) के जरिए मुआवजा दिया जाएगा।

इसके अलावा बड़े तालाब (भोजताल रामसर साइट), आसपास के जंगलों और बाघों के मूवमेंट वाले कॉरिडोर्स को पूरी तरह सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया गया है।

कॉलोनियों में खुली जगह बढ़ेगी, सामाजिक संस्थानों को बड़ी छूट

ड्राफ्ट में आम नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए भी कई प्रावधान जोड़े गए हैं:

* कॉलोनियों में अब खुली जगह (Open Space) का दायरा 10% से बढ़ाकर 12% किया जाएगा, साथ ही 2% अनिवार्य सर्विस एरिया भी रहेगा, जिससे कॉलोनियों में हरियाली और पार्क बढ़ेंगे।

 * अनाथालय, वृद्धाश्रम, मूक-बधिर व दिव्यांग स्कूल, रैन बसेरे और हॉस्टल जैसे सामाजिक संस्थानों को अब अतिरिक्त एफएआर खरीदने की जरूरत नहीं होगी, जिससे वे अपने भवनों का विस्तार बिना भारी खर्च के कर सकेंगे।

 * भानपुर खंती क्षेत्र के पुनर्विकास में गोल्फ कोर्स और ग्रीन स्पेस विकसित करने की योजना है।

 * भौंरी क्षेत्र को उच्च शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था के केंद्र ‘ईकेएआई सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

 * सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए प्रमुख निजी प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव भी शामिल है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह केवल एक ड्राफ्ट है। सरकार जल्द ही आधिकारिक नोटिफिकेशन के साथ नागरिकों, कॉलोनाइजर्स और व्यापारियों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करेगी।

इन आपत्तियों के निपटारे और सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी के बाद ही मास्टर प्लान 2047 पूरी तरह लागू हो सकेगा।

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