Vidwan Janata Party Agenda: मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में सालों से सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों ने अब अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
लंबे समय से नियमितीकरण (पक्की नौकरी) की मांग कर रहे इन अतिथि विद्वानों ने हाल ही में अपने राजनीतिक संगठन ‘विद्वान जनता पार्टी’ (VJP) के गठन का ऐलान किया था।
अब पार्टी ने अपना 15 सूत्रीय एजेंडा और पोस्टर जारी कर दिया है, जिसमें रोजगार, शिक्षा और शासन व्यवस्था में सुधार को लेकर कई बड़े वादे किए गए हैं।
डॉ. आरके सिंह के नेतृत्व में बनी इस पार्टी का चुनाव चिह्न ‘सफेद कमल का फूल’ तय किया गया है।
पार्टी ने ‘सत्ता नहीं, सेवा-समर्पण’ का नारा देते हुए ‘शिक्षित समाज, सशक्त भारत’ का संकल्प दोहराया है।

30 सितंबर से सदस्यता अभियान, 3 अक्टूबर तक अल्टीमेटम
अतिथि विद्वानों ने साफ किया है कि वे 30 सितंबर से पूरे प्रदेश में अपना सदस्यता अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
वहीं, सरकार को अपनी मांगों पर फैसला लेने के लिए 3 अक्टूबर तक का समय दिया गया है।
फिलहाल उनका आंदोलन 3 अक्टूबर तक के लिए स्थगित है।
अगर इस तारीख तक सरकार ने पक्की नौकरी या स्थायित्व को लेकर कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो 4 अक्टूबर से आंदोलन का नया और आक्रामक चरण शुरू होगा।

VJP का 15 सूत्रीय एजेंडा: पक्की नौकरी सबसे ऊपर
विद्वान जनता पार्टी के एजेंडे में सबसे पहला और मुख्य मुद्दा कॉलेजों में पढ़ा रहे अतिथि विद्वानों को स्थायित्व देना और उन्हें नियमित करना है।
इसके अलावा पार्टी ने समाज के अन्य वर्गों के कर्मचारियों की आवाज भी उठाई है:
* शिक्षकों का नियमितीकरण: स्कूल शिक्षा विभाग के वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के अतिथि शिक्षकों को पक्का करना।
* संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी: स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी विभागों में ठेका (आउटसोर्सिंग) या संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना।

पढ़े-लिखों को राजनीति में मौका और वीआईपी कल्चर का खात्मा
VJP ने देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव का खाका भी पेश किया है। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि राजनीति और चुनाव में पढ़े-लिखे युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा:
* सरकारी नौकरियों और शासन-प्रशासन से भाई-भतीजावाद को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।
* समाज से अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई पर लगाम लगाने के लिए नीतियां बनाई जाएंगी।
* शासन में आम जनता की सीधी भागीदारी होगी और वीआईपी कल्चर को खत्म किया जाएगा।
* कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया जाएगा।

क्या है ‘फॉलन आउट’ का डर?
अतिथि विद्वानों की सबसे बड़ी चिंता ‘फॉलन आउट’ व्यवस्था है।
दरअसल, जब भी किसी कॉलेज में लोक सेवा आयोग (PSC) के जरिए स्थायी प्राध्यापक की नियुक्ति होती है या किसी नियमित शिक्षक का तबादला होता है, तो वहां सालों से पढ़ा रहे अतिथि विद्वान को हटा दिया जाता है। इसे ही ‘फॉलन आउट’ कहा जाता है।
अतिथि विद्वानों का कहना है कि जब तक उनके लिए कोई सुरक्षित नीति नहीं बन जाती, तब तक इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए।
अब देखना यह होगा कि 3 अक्टूबर तक सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है या फिर MP की राजनीति में VJP एक नया मोड़ लेकर आती है।
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