Bhopal Residential Commercial Dispute: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों जैसे अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और रोहित नगर में बने मकानों में चल रही दुकानों और कमर्शियल गतिविधियों पर फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार रुक गई है।
दो दिनों तक चली नगर निगम की सीलिंग ड्राइव के बाद तीसरे दिन (सोमवार को) प्रशासन ने हाथ खींच लिए हैं।
राज्य सरकार ने फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का मन बनाया है, लेकिन इस फैसले से स्थानीय रहवासी बेहद नाराज हैं।

रहवासियों का साफ कहना है कि रिहायशी इलाकों में दुकानें और व्यावसायिक काम चलाना सरासर गलत है और वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में रखी जाएगी बात
अरेरा कॉलोनी के निवासी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के बाद ही नगर निगम ने अवैध रूप से चल रही दुकानों को सील करने का नोटिस जारी किया था।
लेकिन अचानक कार्रवाई रोक देना समझ से परे है।
4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी है, जहाँ रहवासी समिति अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।

इससे पहले रविवार को ‘संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति’ के बैनर तले सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे थे और उन्होंने पैदल मार्च निकालकर आवासीय परिसरों में व्यवसाय चलाने का विरोध किया था।
विधायक बोले- 20 साल से मास्टर प्लान अटका, व्यापारियों की क्या गलती?
मामले में राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील व्यापारियों के समर्थन में उतर आए हैं।
उनका कहना है कि भोपाल में पिछले 20 सालों से नया ‘मास्टर प्लान’ लागू नहीं हुआ है।
जब सरकार खुद मास्टर प्लान नहीं ला पा रही है, तो इसमें छोटे-बड़े व्यापारियों की क्या गलती है?

उन्होंने मांग की कि मध्य प्रदेश सरकार को गुजरात की तर्ज पर ‘मिक्स लैंड यूज’ (मिश्रित भूमि उपयोग) नियम लागू करना चाहिए, ताकि एक ही इलाके में तय मानकों के साथ रहने और व्यापार करने की इजाजत मिल सके।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, बनाई गई जांच कमेटी
मामले के तूल पकड़ने के बाद रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने निवास पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ एक बड़ी बैठक की।
बैठक में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवानदास सबनानी और प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे।
सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की कानूनी और प्रशासनिक समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) बनाई जाए।
मुख्यमंत्री का संदेश: “जब तक यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और जमीनी हकीकत का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती, तब तक किसी भी व्यापारी को घबराने या चिंता करने की जरूरत नहीं है।”

कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा?
शासन द्वारा बनाई गई इस विशेष समिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव (नगरीय विकास एवं आवास विभाग) होंगे।
इसके अलावा कमेटी में एमएसएमई (MSME), श्रम विभाग, पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर तथा ग्राम निवेश (TNCP) के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को इसमें विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और कमेटी की रिपोर्ट के बाद भोपाल के इस पुराने विवाद का क्या हल निकलता है।
#BhopalNews #MPNews #BhopalMasterPlan #AreraColony #ResidentialVsCommercial #BhopalMunicipalCorporation #CMMohanYadav
