Dhirendra Shastri Bengal Food Controversy: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के त्योहार से ठीक पहले धार्मिक परंपराओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की मांसाहार छोड़ने की अपील के बाद पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बंगाल के लोग अपनी पसंद का खाना खाने और कपड़े पहनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
किसी भी बाहरी धार्मिक गुरु, साधु या राजनीतिक दल को यह अधिकार नहीं है कि वह बंगाली समाज की थाली का फैसला करे।

धीरेंद्र शास्त्री का बयान और बीजेपी अध्यक्ष का जवाब
हाल ही में हावड़ा और कोलकाता के दौरे पर आए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 4 से 6 सितंबर के दौरान हनुमंत कथा का आयोजन किया था।
कथा के दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय लोगों से नॉनवेज (मांसाहार) छोड़ने का आग्रह किया था।
उन्होंने पूजा के दौरान मांसाहार करने वालों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि पावन अवसरों पर ऐसा आचरण करने वाले धार्मिक नहीं बल्कि पाखंडी कहलाते हैं।

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इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि शाकाहार का प्रचार करना किसी का भी व्यक्तिगत अधिकार हो सकता है।
हालांकि, अगर कोई बंगाली समाज की सदियों पुरानी परंपराओं को नज़रअंदाज़ कर लोगों को पाखंडी कहता है, तो पार्टी इसका समर्थन नहीं करती। भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा:
* शाक्त परंपरा और आस्था: बंगाल में शक्ति उपासना (शाक्त धर्म) की गहरी जड़ें हैं। यहाँ महाकाली को बलि चढ़ाकर मांस का भोग लगाने और नवमी के दिन मटन (बकरे का मांस) और महाअष्टमी को लुची-पूरी खाने की पुरानी परंपरा रही है।
* महापुरुषों का संदर्भ: उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि बंगाली समाज की धार्मिक आस्थाओं में खान-पान की विविधता को हमेशा स्वीकार किया गया है।
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दुर्गा पूजा 2026 के नए दिशानिर्देश और गाइडलाइंस
खान-पान विवाद के साथ-साथ इस साल दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी अहम बदलाव किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने आगामी त्योहार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए कई कड़े और सहयोगी नियम जारी किए हैं:
* महाअष्टमी पर शराब बिक्री बंद: पूजा की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से महाअष्टमी के दिन राज्य में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
* विसर्जन जुलूस से DJ आउट: ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मूर्तियों के विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे बजाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
* लक्ष्मी पूजा से पहले विसर्जन: इस वर्ष 25 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा है। प्रशासन ने सभी पूजा कमेटियों से आग्रह किया है कि वे एक दिन पहले यानी 24 अक्टूबर तक विसर्जन प्रक्रिया पूरी कर लें।
* वित्तीय सहायता और रियायत: राज्य सरकार ने प्रत्येक पंजीकृत पूजा समिति के लिए 1 लाख रुपए के अनुदान, मुफ्त बिजली और सुरक्षा लाइसेंस शुल्क में छूट का ऐलान किया है।

मेलों का सांस्कृतिक महत्व और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
दुर्गा पूजा के मुख्य आयोजनों के बाद लगने वाले मेलों को इस बार रद्द कर दिया गया है, जिसकी शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में हुई थी।
इस फैसले के बाद बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है।
* सांस्कृतिक महत्व: बंगाल में दुर्गा पूजा के मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामुदायिक सौहार्द का प्रतीक हैं।
ये मेले क्षेत्रीय कलाकारों, हस्तशिल्पकारों, ढाकियों और लोक-नर्तकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करते हैं।
* आर्थिक असर: बंगाल में दुर्गा पूजा एक विशाल अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Informal Economy) का मुख्य स्रोत है, जिसका कारोबार हजारों करोड़ रुपए का होता है।
मेले रद्द होने से छोटे विक्रेताओं, हस्तशिल्पियों, खान-पान के स्टॉल लगाने वालों और खिलौना कारोबारियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

बंगाल में धर्म, परंपरा और आधुनिक व्यवस्था का यह संगम दर्शाती है कि यहाँ की सांस्कृतिक स्वायत्तता और खान-पान की आदतें केवल एक व्यक्तिगत चुनाव नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान का एक अटूट हिस्सा हैं।
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