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सुभाष चंद्रा पर FIR: ₹59,000 करोड़ की फर्जी नेटवर्थ दिखाकर LIC से ठगे ₹1,322 करोड़, CBI ने दर्ज किया केस

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Subhash Chandra FIR: जी मीडिया के मालिक और एस्सेल ग्रुप के प्रमुख सुभाष चंद्रा की मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुभाष चंद्रा और तीन अन्य लोगों के खिलाफ ₹1,322 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

यह पूरी कार्रवाई ‘LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड’ (LIC HFL) की तरफ से दर्ज कराई गई एक आधिकारिक शिकायत के बाद हुई है।

CBI द्वारा दर्ज की गई इस FIR में सुभाष चंद्रा के साथ-साथ पंकज सुरोलिया, अमिश पांड्या और राजीव ढोलकिया को भी आरोपी बनाया गया है।

इन चारों पर साल 2018 से 2026 के बीच धोखाधड़ी करने, अमानत में खयानत करने और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

एलआईसी (LIC) का आरोप है कि साल 2018 में सुभाष चंद्रा ने अपनी कंपनी ‘मेसर्स वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड’ और अपनी अन्य सहयोगी कंपनियों के नाम पर भारी-भरकम लोन लिया था।

लोन पास कराने और बैंक का भरोसा जीतने के लिए उन्होंने एक ‘नेटवर्थ सर्टिफिकेट’ जमा किया।

इस सर्टिफिकेट में उन्होंने अपनी कुल व्यक्तिगत संपत्ति ₹59,113 करोड़ बताई थी।

इसी ₹59,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को गारंटी और आधार मानते हुए LIC हाउसिंग फाइनेंस ने उनकी कंपनियों को ₹1,322 करोड़ रुपये से अधिक का लोन मंजूर कर दिया।

कर्ज डूबने के बाद का मोड़

समस्या तब शुरू हुई जब एस्सेल ग्रुप की कंपनियां इस बड़े कर्ज की किस्तें और पैसा लौटाने में नाकाम रहने लगीं।

जब LIC HFL ने अपना बकाया वसूलने के लिए सुभाष चंद्रा के खिलाफ कानूनी और दिवालिया घोषित करने (Insolvency) की प्रक्रिया शुरू की, तब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

सुभाष चंद्रा ने अपनी बात से पलटते हुए कहा कि उनकी व्यक्तिगत संपत्ति कभी उतनी थी ही नहीं, जितनी उन्होंने लोन लेते समय जमा किए गए नेटवर्थ सर्टिफिकेट्स में दिखाई थी।

उन्होंने आगे दावा किया कि साल 2024 में उनकी असली कुल संपत्ति घटकर महज ₹31.79 करोड़ ही रह गई है।

इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी तर्क दिया कि साल 2017-18 के दौरान भी उनकी संपत्ति ₹40,000 करोड़ से अधिक कभी नहीं थी।

यानी उन्होंने खुद यह मान लिया कि लोन लेते समय दिखाया गया सर्टिफिकेट सही नहीं था।

₹22,000 करोड़ के बदले सिर्फ ₹6.5 करोड़ की पेशकश

यह पहला मौका नहीं है जब सुभाष चंद्रा की दिवालिया प्रक्रिया विवादों में आई हो। इससे पहले उन पर कुल ₹22,000 करोड़ की देनदारी थी।

इस विशाल कर्ज को चुकाने के बदले उन्होंने महज ₹6.5 करोड़ देकर पूरा मामला रफा-दफा करने का प्रस्ताव दिया था।

हैरानी की बात यह रही कि ‘नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल’ (NCLT) की एक सिंगल बेंच ने उनके इस ऑफर को स्वीकार भी कर लिया था।

हालांकि, जब इस फैसले पर भारी विवाद और विरोध खड़ा हुआ, तो NCLT ने मामले की दोबारा सुनवाई के लिए 5 जजों की एक बड़ी बेंच का गठन किया।

सुभाष चंद्रा ने इस बड़ी बेंच के गठन का भी विरोध किया था।

फिलहाल CBI अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

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