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तमिलनाडु के 52 मंदिरों में स्मार्टफोन बैन होने से 20% तक घटे युवा श्रद्धालु , बुजुर्गों की भीड़ बढ़ी

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Tamil Nadu temple phone ban: तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिरों का नजारा इन दिनों पूरी तरह बदल चुका है।

कांचीपुरम के ऐतिहासिक देवराजस्वामी अथि वरदराज मंदिर के परिसर में जहां पहले युवा सेल्फी लेते, रील बनाते और फोटोग्राफी करते दिखते थे, वहां अब शांति है और ज्यादातर बुजुर्ग या अधेड़ उम्र के श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है 1 सितंबर से राज्य के 52 प्रमुख मंदिरों में लागू हुआ मोबाइल फोन बैन का नियम।

क्या है नया नियम और व्यवस्था?

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के तहत अब किसी भी श्रद्धालु को मंदिर के भीतर स्मार्टफोन ले जाने की इजाजत नहीं है।

मंदिर में प्रवेश करने से पहले श्रद्धालुओं को अपना फोन बाहर बने काउंटर पर जमा करना होता है। इसके लिए 5 रुपये प्रति फोन का शुल्क तय किया गया है।

जमा किए गए फोन्स को सुरक्षित लॉकर में रखा जाता है और श्रद्धालुओं को एक टोकन दिया जाता है।

दर्शन के बाद टोकन और फोन के मॉडल का मिलान करके ही मोबाइल वापस लौटाया जाता है।

युवा श्रद्धालुओं की संख्या में 20% की गिरावट

मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, नियम लागू होने के बाद से मंदिरों में आने वाले लोगों की संख्या में रोजाना करीब 20% की कमी देखी जा रही है।

सबसे ज्यादा असर युवाओं की उपस्थिति पर पड़ा है।

पहले बड़ी संख्या में युवा न केवल दर्शन के लिए, बल्कि मंदिर की नक्काशी, वास्तुकला और धार्मिक अनुष्ठानों की तस्वीरें व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने आते थे।

मंदिर प्रशासन का पक्ष: ‘पवित्रता सबसे ऊपर’

देवराजस्वामी मंदिर के कार्यकारी अधिकारी (EO) आर. गणेशन ने माना कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटी है, खासकर युवाओं की।

हालांकि, उन्होंने इस फैसले का कड़ा समर्थन करते हुए कहा, “हमें इस बात का अफसोस है कि युवा कम आ रहे हैं, लेकिन केवल इंस्टाग्राम कंटेंट बनाने के लिए मंदिर की पवित्रता और मर्यादा से समझौता नहीं किया जा सकता।

यह कदम मद्रास हाईकोर्ट के दिसंबर 2022 के आदेश के तहत उठाया गया है और हम केवल कानून का पालन करवा रहे हैं।”

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने तिरुचेंदूर सुब्रमणिया स्वामी मंदिर में फोन के गलत इस्तेमाल से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पूरे राज्य के प्रमुख मंदिरों में बैन का निर्देश दिया था।

युवाओं की राय: बिना फोन अनुभव अधूरा

इस नए नियम को लेकर युवाओं में मिला-जुला गुस्सा और निराशा है:

* सुरक्षा और कंटेंट की चिंता: चेन्नई से आए 23 वर्षीय अरुण कुमार ने बताया कि जब उन्हें फोन जमा करने के नियम का पता चला, तो वे बिना दर्शन किए लौट गए।

उनका कहना है कि वे परंपरा का सम्मान करते हैं, लेकिन बिना फोटो या वीडियो कैप्चर किए उन्हें अनुभव अधूरा लगता है। ₹5 देकर अनजान हाथों में फोन छोड़ने से बेहतर वे किसी लोकल मंदिर जाना पसंद करेंगे।

* सोशल मीडिया से मिली प्रेरणा: वेल्लोर की 19 वर्षीय प्रिया राजेश का कहना है कि वे इंस्टाग्राम पर रील देखकर ही इस मंदिर की खूबसूरती से प्रभावित हुई थीं।

जब खुद एक भी फोटो लेने की अनुमति नहीं है और महंगे फोन की सुरक्षा का डर है, तो मंदिर के बाहर बैठकर इंतजार करना ही बेहतर समझा।

एक तरफ जहां प्रशासन का मानना है कि इस बैन से मंदिरों में ध्यान, भक्ति और शांति का माहौल वापस लौटेगा, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक दौर के युवाओं के लिए बिना स्मार्टफोन के धार्मिक स्थलों का दौरा करना आकर्षण कम कर रहा है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या युवा इस नए नियम से सामंजस्य बिठा पाते हैं या मंदिरों में उनकी मौजूदगी लगातार कम होती रहेगी।

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