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कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा फैसला: चुनाव नहीं लड़ेगी CJP, देश में प्रेशर ग्रुप बनकर उठाएगी जनता की आवाज

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

CJP wont contest elections: देश में NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक बड़ा प्रदर्शन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी आगे की दिशा तय कर ली है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि उनका संगठन कोई राजनीतिक दल नहीं बनाएगा और न ही चुनाव लड़ेगा।

CJP फिलहाल एक मजबूत ‘प्रेशर ग्रुप’ (दबाव समूह) के रूप में काम करेगी, ताकि सरकार और उसकी नीतियों पर आम जनता का दबाव बनाया जा सके।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में बुधवार से CJP की दो दिवसीय कोर कमेटी की अहम बैठक शुरू हुई है।

इस बैठक में अभिजीत दीपके और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत कुल 13 प्रमुख सदस्य हिस्सा ले रहे हैं।

बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए दीपके ने बताया कि इस बैठक का मकसद जंतर-मंतर आंदोलन की समीक्षा करना, देश की शिक्षा व्यवस्था, E20 पेट्रोल और आम लोगों से जुड़े अन्य मुद्दों पर रणनीति तैयार करना है।

राजनीतिक पार्टी क्यों नहीं बनाएगी CJP?

अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर CJP को एक पारंपरिक राजनीतिक पार्टी में बदल दिया जाता, तो उनका आंदोलन अपनी मूल दिशा से भटक जाता।

उन्होंने बताया, “हमारा आंदोलन इसलिए सफल रहा क्योंकि इसमें किसी एक पार्टी के लोग नहीं थे।

अलग-अलग विचारधाराओं, अलग-अलग राजनीतिक बैकग्राउंड और समाज के हर वर्ग के लोग लोकतंत्र को बचाने के लिए एक साथ आए।

आज देश को एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत नहीं है, बल्कि एक मजबूत जन-आंदोलन की जरूरत है जो व्यवस्था में सुधार ला सके।”

 

दीपके ने जोर देकर कहा कि देश में न्यायपालिका, मीडिया, राजनीतिक व्यवस्था और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कम हो रहा है।

इस भरोसे को दोबारा कायम करने के लिए जनता के दबाव की जरूरत है।

झारखंड के छात्रों के समर्थन में उतरेगी CJP

CJP ने ऐलान किया है कि संगठन अब झारखंड का रुख करेगा, जहां विभिन्न मांगों को लेकर छात्र सड़क पर उतरे हुए हैं।

दीपके ने कहा कि CJP की टीम झारखंड जाकर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ खड़ी होगी और उनकी हर जायज मांग का समर्थन करेगी।

वहीं, CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि दिल्ली प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई FIR को वापस लेने के लिए सरकार से बातचीत जारी है।

इसके साथ ही प्रदर्शन में घायल हुए छात्रों को कानूनी सहायता और मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक संगठन के मेंटर बने रहेंगे और समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहेंगे।

CJI की टिप्पणी से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनने तक का सफर

इस संगठन की शुरुआत बेहद अनोखे और व्यंग्यात्मक तरीके से हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने युवाओं को लेकर ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया था।

यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और युवाओं में गुस्सा भर गया।

अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे 30 साल के अभिजीत दीपके ने इस टिप्पणी के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल/ऑनलाइन व्यंग्य अभियान शुरू किया।

देखते ही देखते यह अभियान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देश भर के छात्र इससे जुड़ते चले गए।

जब NEET-UG पेपर लीक का मामला सामने आया, तो यह ऑनलाइन अभियान एक बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया।

अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले हैं।

वे पत्रकारिता की पढ़ाई कर चुके हैं और पूर्व में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ बतौर डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट काम कर चुके हैं।

6 जून को वे अमेरिका से वापस भारत आए और उसी दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का पहला बड़ा प्रदर्शन शुरू हुआ।

36 दिनों का ऐतिहासिक जंतर-मंतर आंदोलन

20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का धरना लगातार 36 दिनों तक चला।

इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए।

सोनम वांगचुक भी इस धरने में शामिल हुए थे और उन्होंने भूख हड़ताल की थी।

20 जुलाई को जब CJP ने संसद मार्च निकाला, तो पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया, जिससे कई छात्र घायल हुए थे।

आखिरकार 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और आश्वासन के बाद CJP ने अपना धरना स्थगित किया था।

अब CJP अपनी कोर कमेटी की बैठक के जरिए अपने इस आंदोलन को पूरे देश में विस्तार देने की तैयारी कर रही है।

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