Ashutosh Tiwari on Narottam Mishra: मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव के परिणामों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर हलचल तेज कर दी है।
चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के हाथों 6,016 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
इस हार के बाद पार्टी के अंदर बैठकों, मुलाकातों और समीक्षाओं का दौर जारी है।
भोपाल पहुंचे आशुतोष तिवारी ने हार के कारणों, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका और संगठन स्तर पर चल रही हलचलों को लेकर दैनिक भास्कर से विस्तृत बातचीत की।

कांग्रेस के षड्यंत्र को समझ नहीं पाए: आशुतोष तिवारी
हार की वजह पूछे जाने पर आशुतोष तिवारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस ने एक रणनीति और षड्यंत्र के तहत चुनाव लड़ा, जिसे पार्टी समय रहते समझ नहीं सकी।
उन्होंने कहा कि चुनाव में कहीं न कहीं ऐसी शून्यता या चूक जरूर रही, जिसका फायदा विरोधी दल को मिला।
यदि अनजाने में भी पार्टी के कुछ लोग कांग्रेस के इस षड्यंत्र का हिस्सा बने हैं, तो वे उन परिस्थितियों और लोगों को समझने की कोशिश करेंगे।
हालांकि, तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि 2023 के पिछले चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है और हार का अंतर कम हुआ है।

इसे वे सकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हुए दतिया की जनता के बीच रहकर सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प व्यक्त करते हैं।
नरोत्तम मिश्रा की जिम्मेदारी पर क्या बोले प्रत्याशी?
जब आशुतोष तिवारी से सीधा सवाल किया गया कि इस हार के लिए प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और क्षेत्र के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा कितने जिम्मेदार हैं, तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला और कूटनीतिक जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि इसका निर्णय पार्टी की ओर से गठित जांच समिति करेगी।
समिति ही समीक्षा करेगी कि किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन पर संगठन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

हाल ही में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ हुई मुलाकात के राजनीतिक मायने पूछे जाने पर तिवारी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार और सौजन्य का पालन किया जाता है।
वह केवल एक सामान्य मुलाकात थी और इसके कोई विशेष राजनीतिक अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।

भीतरघात और जिला कार्यकारिणी को भंग करने का मामला
दतिया में मिली हार के तुरंत बाद भाजपा संगठन ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्रदेश संगठन ने हार के कारणों का पता लगाने के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे और चंबल संभाग के पूर्व संगठन मंत्री अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
इस समिति की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद भीतरघात या अनुशासनहीनता में शामिल पाए जाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कारण बताओ नोटिस, निलंबन और निष्कासन जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, चुनाव में निष्ठापूर्वक काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को नई कार्यकारिणी में जिम्मेदारी दी जाएगी।
जिला अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों पर आशुतोष तिवारी ने इसे काल्पनिक बताया और कहा कि संगठन का कोई भी निष्ठावान कार्यकर्ता इस पद को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
नरोत्तम मिश्रा का अचानक हरिद्वार दौरा
एक तरफ जहां आशुतोष तिवारी भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर कार्यकर्ताओं का आभार जता रहे थे, वहीं दूसरी तरफ पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के अचानक दिल्ली रवाना होने की खबरें सामने आईं।
जब उनसे संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक कार्य से दिल्ली नहीं, बल्कि धार्मिक यात्रा पर हरिद्वार पहुंचे हैं।

गौरतलब है कि दतिया सीट तत्कालीन कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को फ्रॉड के एक मामले में दो साल की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी, जिसके बाद यह उपचुनाव कराया गया था।
अब जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही दतिया भाजपा की भावी रणनीति और कार्रवाई की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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