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असम की ‘लेडी सिंघम’ संजुक्ता पाराशर बनीं CRPF CoBRA की पहली महिला IG, संभालेंगी सबसे खतरनाक कमांडो यूनिट

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sanjukta Parashar CRPF CoBRA IG: देश की सबसे कठिन और खतरनाक कमांडो फोर्स CoBRA (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) को अपनी पहली महिला आईजी (Inspector General) मिल गई हैं।

2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की तेजतर्रार IPS अधिकारी संजुक्ता पाराशर को CRPF की इस खास यूनिट का प्रमुख बनाया गया है।

वह 1996 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी दानेश राणा की जगह लेंगी। CRPF मुख्यालय ने उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है।

कौन हैं 2006 बैच की जांबाज IPS संजुक्ता पाराशर

संजुक्ता पाराशर को उनके बेबाक और निडर अंदाज के लिए जाना जाता है।

असम में उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में उनकी भूमिका इतनी शानदार रही कि लोग उन्हें प्यार से असम की ‘लेडी सिंघम’ बुलाने लगे।

हाथ में AK-47 थामे घने जंगलों में कमांडोज का नेतृत्व करती उनकी तस्वीरें अक्सर चर्चा में रही हैं।

क्या है CoBRA यूनिट?

CRPF ने 2008-09 में वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए कोबरा (CoBRA) बटालियन की शुरुआत की थी।

यह यूनिट देश के सबसे संवेदनशील और दुर्गम जंगलों में जाकर गोरिल्ला वारफेयर तकनीक से दुश्मनों का मुकाबला करती है।

पूर्वोत्तर में शांति बनाए रखने और हाल ही में मणिपुर में भड़की हिंसा को नियंत्रित करने के लिए भी CoBRA की तैनातियां की गई हैं।

संजुक्ता पाराशर की जांबाजी के 5 बड़े किस्से:

* उडालगुड़ी जातीय हिंसा पर काबू: साल 2008 में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान उन्होंने बोडो और अन्य समुदायों के बीच भड़की हिंसा को मौके पर पहुंचकर बहुत सूझबूझ से नियंत्रित किया।

* AK-47 लेकर जंगलों में गश्त: सोनितपुर की SP रहते हुए संजुक्ता ने कभी दफ्तर में बैठकर आदेश नहीं दिए। वह खुद हाथों में AK-47 लेकर CRPF और कमांडोज के साथ जंगलों में उग्रवादियों की खोज में निकलती थीं।

* रातभर चला एनकाउंटर: अगस्त 2016 में असम-अरुणाचल सीमा के पास उनके नेतृत्व में एक बड़ा जॉइंट ऑपरेशन हुआ। उग्रवादियों की तरफ से गोलियां और ग्रेनेड बरसाए जाने के बावजूद उनकी टीम डटी रही और NDFB(S) के तीन उग्रवादियों को ढेर कर भारी मात्रा में हथियार जब्त किए।

* 15 महीने में 16 उग्रवादियों का सफाया: 2014-15 के दौरान उनके अभियानों से उग्रवादी संगठन कांप उठे थे। इस दौरान 16 से ज्यादा उग्रवादी मारे गए और 64 से अधिक गिरफ्तार हुए।

* धमकियों के आगे नहीं झुकीं: कई उग्रवादी गुटों से जान से मारने की धमकियां मिलने के बावजूद उन्होंने कभी कदम पीछे नहीं खींचे और लगातार संवेदनशील इलाकों में मोर्चा संभाले रखा।

संजुक्ता पाराशर की यह नई जिम्मेदारी देश की लाखों महिलाओं और पुलिस सेवा में आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

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