Rajendra Bharti Disqualification: मध्य प्रदेश की दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता अब समाप्त कर दी गई है।
यह कदम विधानसभा सचिवालय द्वारा तब उठाया गया जब दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 27 साल पुराने एक धोखाधड़ी मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई।
हैरानी की बात यह रही कि यह पूरी प्रक्रिया देर रात तक चली।
गुरुवार रात करीब 10:30 बजे विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा अचानक दफ्तर पहुंचे, सचिवालय खुलवाया गया और आनन-फानन में राजेंद्र भारती की सीट को रिक्त घोषित करने का पत्र चुनाव आयोग को भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई।
आधी रात में भाजपा के काले कारनामे!
जब मामला न्यायालय में है और अपील के लिए समय दिया गया है, तो फिर इतनी जल्दबाजी क्यों? दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती जी के मामले में आधी रात को विधानसभा सचिवालय खोलकर उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई।
यह साफ है कि राज्यसभा चुनाव से पहले…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) April 3, 2026
कांग्रेस का कड़ा विरोध और आरोप
जैसे ही इस बात की खबर कांग्रेस नेताओं को लगी, हड़कंप मच गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व विधायक पीसी शर्मा तुरंत विधानसभा पहुंचे।
उन्होंने प्रमुख सचिव से रात के अंधेरे में दफ्तर खोलने पर सवाल पूछे, लेकिन अधिकारियों की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
जीतू पटवारी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए कहा कि यह सब भाजपा के इशारे पर किया जा रहा है।
संवैधानिक और स्वतंत्र संस्था विधानसभा सचिवालय का सत्ता और भाजपा के आगे इस तरह घुटने टेक देना अराजकता को स्पष्ट सिद्ध करता है! pic.twitter.com/3eq5ngnBNw
— MP Congress (@INCMP) April 3, 2026
कांग्रेस का तर्क है कि जब कोर्ट ने सजा को 60 दिनों के लिए निलंबित (Suspend) रखा है, तो इतनी जल्दबाजी में सदस्यता खत्म करने का क्या तुक है?
लोकतंत्र और सिस्टम का मखौल उड़ाने पर तुली @BJP4MP का असंवैधानिक रवैया एक बार फिर सामने आया है!
⦁ कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती जी की सदस्यता को खत्म करने के लिए भाजपा सरकार के इशारे पर रात में विधानसभा सचिवालय खोला गया!
⦁ @DrMohanYadav51 की हठधर्मिता की जानकारी वरिष्ठ… pic.twitter.com/324ceeX5HV
— MP Congress (@INCMP) April 2, 2026
क्या है 27 साल पुराना मामला?
यह मामला साल 1998 का है। दरअसल, राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम ‘श्याम सुंदर संस्थान’ की अध्यक्ष थीं।
इस संस्थान ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपये की एक एफडी (FD) कराई थी। उस समय राजेंद्र भारती खुद उस बैंक के अध्यक्ष थे।
आरोप है कि भारती ने बैंक के एक क्लर्क रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर बैंक के रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
उन्होंने एफडी की समय सीमा को 3 साल से बढ़ाकर फर्जी तरीके से 15 साल कर दिया।
यही नहीं, साल 1999 से 2011 के बीच उन्होंने इस एफडी पर साढ़े 13 प्रतिशत की दर से ब्याज के करीब 1 लाख 35 हजार रुपये हर साल निकाले।
जब साल 2011 में भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने, तब इस घोटाले की परतें खुलना शुरू हुईं।

कानूनी दांव-पेंच और सजा का ऐलान
इस मामले की जांच सहकारिता विभाग ने की और ऑडिट में भारी गड़बड़ी पाई गई।
मामला पहले उपभोक्ता फोरम, फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक गया।
साल 2015 में तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर भारती के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हुआ।
आखिरकार दिल्ली की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने उन्हें धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (जालसाजी) और 120B (साजिश) के तहत दोषी पाया।
गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें तीन अलग-अलग धाराओं में क्रमशः 3 साल, 3 साल और 2 साल की सजा सुनाई।
कानून के मुताबिक, अगर किसी जन प्रतिनिधि (विधायक या सांसद) को 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है।
इसी नियम का हवाला देकर विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता खत्म की है।
The Datia Assembly seat has been declared vacant as per a Gazette notification issued by the Vidhan Sabha Secretariat. The decision has been taken in accordance with legal provisions after Congress MLA Rajendra Bharti was sentenced to three years in jail pic.twitter.com/P8GnBfw9bv
— IANS (@ians_india) April 3, 2026
अब आगे क्या होगा?
राजेंद्र भारती के बेटे अनुज भारती के अनुसार, उनके पिता को फिलहाल जेल भेज दिया गया है।
हालांकि, कोर्ट ने उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए 60 दिन का समय दिया है।
राजेंद्र भारती के वकील अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
अगर हाईकोर्ट उनकी सजा पर ‘स्टे’ (रोक) लगा देता है, तो उनकी विधायकी फिर से बहाल हो सकती है।
लेकिन अगर स्टे नहीं मिलता, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना तय है।

राजेंद्र भारती की सदस्यता जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने भाजपा के एक कद्दावर नेता (नरोत्तम मिश्रा) को हराया था।
फिलहाल, दतिया की राजनीति में उबाल है और यह मामला आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़क पर राजनीतिक घमासान का केंद्र भी बनेगा।
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