Digvijaya Singh Ram Mandir Visit: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने गुरुवार 26 मार्च को अयोध्या पहुंचकर भगवान श्री रामलला के दर्शन किए।
राम मंदिर के भव्य निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा है, जिसने मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

हनुमान गढ़ी से शुरू हुई यात्रा
दिग्विजय सिंह सुबह करीब 9:40 बजे महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
अपने तय कार्यक्रम के अनुसार, वे सबसे पहले प्राचीन हनुमान गढ़ी मंदिर पहुंचे।
यहाँ उन्होंने संकटमोचन हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।
इसके बाद वे सीधे राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे, जहाँ उन्होंने रामलला की मनमोहक मूर्ति के दर्शन किए और उनके चरणों में शीश नवाया।
दिग्विजय सिंह ने कनक भवन जाकर भी माथा टेका।

मैंने कभी राम मंदिर का विरोध नहीं किया
दर्शन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए दिग्विजय सिंह ने बड़े ही सरल अंदाज में कहा, “जब प्रभु का बुलावा आता है, तो हर व्यक्ति खिंचा चला आता है। मुझे बुलावा आया और मैं उपस्थित हो गया।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यहाँ राजनीति करने नहीं बल्कि अपनी व्यक्तिगत आस्था के कारण आए हैं।
विपक्ष द्वारा ‘राम विरोधी’ कहे जाने के आरोपों पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “मैंने कभी राम मंदिर का विरोध नहीं किया। भगवान राम हम सबके इष्ट हैं और उनकी जन्मभूमि की सर्वमान्यता है।”
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उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस में हर व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार धर्म का पालन करता है, लेकिन वे धर्म का उपयोग राजनीति या व्यापार के लिए नहीं करते।

1.11 लाख का चंदा
दिग्विजय सिंह के कार्यालय ने उनके इस दौरे को केवल धार्मिक बताया है।
उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान में याद दिलाया गया कि दिग्विजय सिंह एक सच्चे सनातनी हैं।
उन्होंने 18 जनवरी 2021 को राम मंदिर निर्माण के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को 1,11,111 रुपये का चेक दान स्वरूप दिया था।

इतना ही नहीं, उनकी धार्मिक निष्ठा का प्रमाण उनकी 3,300 किलोमीटर लंबी ‘नर्मदा परिक्रमा’ है, जिसे उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पैदल पूरा किया था।
दिग्विजय सिंह की सनातनी जड़ें
दिग्विजय सिंह ने अपने पारिवारिक इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि वे रामानंद संप्रदाय के महान संत पीपाजी महाराज के वंशज हैं।
उनके पैतृक निवास राघौगढ़ में आज भी ‘रघुजी महाराज’ (भगवान राम) का प्राचीन मंदिर है, जहाँ सुबह-शाम उनके नाम की ज्योति जलती है।

भाजपा का तंज: ‘सद्बुद्धि आने में देर लगी’
दिग्विजय सिंह के इस दौरे पर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन ने तीखा हमला बोला है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तंज कसते हुए कहा, “उनका स्वागत है, भगवान राम जब सद्बुद्धि दें तभी सही है।”

वहीं, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भगवान राम को काल्पनिक पात्र बताया था, लेकिन आज उनकी शरण में जाना ही जीवन का सार लग रहा है।
भाजपा प्रवक्ता डॉ. हितेष बाजपेयी ने इसे राज्यसभा चुनाव से जोड़ते हुए ‘चतुर राजनीति’ करार दिया।
राहुल गांधी के दर्शन पर क्या बोले?
जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी रामलला के दर्शन करने आएंगे, तो उन्होंने कहा, “इसका जवाब केवल राहुल गांधी ही दे सकते हैं। अगर वे आते हैं, तो मुझे इस पर कोई एतराज नहीं है, बल्कि खुशी होगी।”

सियासी मायने
रामनवमी से ठीक पहले दिग्विजय सिंह का यह दौरा महज धार्मिक नहीं माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस पर अक्सर ‘हिंदू विरोधी’ होने के ठप्पे लगते रहे हैं।
दिग्विजय सिंह का अयोध्या जाना, चंदे की बात याद दिलाना और अपनी सनातनी परंपराओं का जिक्र करना, भाजपा के उस नैरेटिव को काटने की कोशिश है जिसमें कांग्रेस को राम मंदिर विरोधी दिखाया जाता है।
