Digvijaya Singh tweet on PM Modi: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बयानों के लिए सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है।
हमेशा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की विचारधारा का कड़ा विरोध करने वाले दिग्विजय सिंह ने एक ऐसा पोस्ट किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की तारीफ की है।
मैं संगठन का समर्थन करता हूं लेकिन…
जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर कयासों का बाजार गर्म हो गया।
लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि क्या दिग्विजय सिंह भाजपा की तारीफ कर रहे हैं?
विवाद बढ़ता देख दिग्विजय सिंह ने सफाई दी। उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा-
“मैं संगठन का समर्थन करता हूं। मैं RSS और मोदी जी के खिलाफ हूं… आपने गलत समझा… मैंने ‘संगठन’ की तारीफ की है। मैं RSS और मोदी का कट्टर विरोधी था, हूं और रहूंगा… क्या संगठन को मजबूत करना और उसकी तारीफ करना बुरी बात है?…”
#WATCH | Delhi | On his tweet sharing an old photo of veteran BJP leader LK Advani and PM Modi, Congress leader Digvijaya Singh says, “I support the organisation. I am against the RSS and Modi ji… You have misunderstood… I have praised ‘sangathan’. I was, am, and will remain… pic.twitter.com/KQy1wCPt8t
— ANI (@ANI) December 27, 2025
क्या है उस तस्वीर में?
दिग्विजय सिंह ने ‘Quora’ वेबसाइट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह तस्वीर 1990 के दशक की बताई जा रही है।
फोटो में भाजपा के दिग्गज नेता लाल कृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं, जबकि युवा नरेंद्र मोदी उनके पास जमीन (फर्श) पर बैठे नजर आ रहे हैं।
कहा जाता है कि यह तस्वीर गुजरात के पूर्व सीएम शंकरसिंह वाघेला के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान की है।

दिग्विजय सिंह ने क्या लिखा था?
इस तस्वीर को शेयर करते हुए दिग्विजय सिंह ने लिखा, “Quora साइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार RSS का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ/भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सिया राम।”

कांग्रेस आलाकमान को संदेश?
इस पोस्ट की सबसे खास बात यह रही कि दिग्विजय सिंह ने इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और जयराम रमेश को टैग किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट महज मोदी की तारीफ नहीं है, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक ‘सीख’ या ‘नसीहत’ है।
दिग्विजय सिंह शायद यह बताना चाहते हैं कि कैसे एक मजबूत संगठन (RSS/BJP) अपने छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी फर्श से अर्श तक (जमीन से प्रधानमंत्री की कुर्सी तक) पहुंचा सकता है।

वहीं, कांग्रेस में अक्सर यह आरोप लगते हैं कि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती है।
इसे पार्टी हाईकमान के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि कांग्रेस को भी अपने संगठन को इतना ही मजबूत और कार्यकर्ताओं के प्रति समर्पित बनाने की जरूरत है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस की बैठक का कनेक्शन
इस ट्वीट के तार मध्य प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई हालिया बैठक से भी जुड़ते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा था कि संगठन को मजबूत करने के लिए हमें भाजपा की तर्ज पर काम करना होगा।
उन्होंने नेताओं को बूथ स्तर पर उतरने और जमीन पर काम करने का मंत्र दिया था।
यह ट्वीट उसी कड़ी का एक हिस्सा माना जा रहा है।

भाजपा का राहुल गांधी पर तंज
दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट को भाजपा ने हाथों-हाथ लिया।
भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस के ‘परिवारवाद’ पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह ने सच दिखाया है। इस पोस्ट से पता चलता है कि भाजपा में मेरिट (योग्यता) चलती है, जबकि कांग्रेस में एक परिवार की तानाशाही।
उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे दिग्विजय सिंह के इस ‘सच’ पर अपनी प्रतिक्रिया दें।
Will Rahul Gandhi show courage & react to the shocking Truth Bomb dropped by Shri. Digvijaya Singh’s tweet which has totally exposed how Congress first family ruthlessly runs the party in a dictatorial manner and also how autocratic & undemocratic this Congress leadership is? pic.twitter.com/5En2z9PLoF
— C.R.Kesavan (@crkesavan) December 27, 2025
कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह का यह ट्वीट कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का विषय है।
भले ही दिग्विजय सिंह वैचारिक रूप से भाजपा के विरोधी हों, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया है कि संगठनात्मक ढांचे और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने के मामले में भाजपा की रणनीति सफल रही है।
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस आलाकमान इस ‘नसीहत’ को किस तरह लेता है।


