Fraud in name of PM Modi: साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे आम लोगों को डराने के लिए देश के पीएम और जांच एजेंसियों के नाम का सहारा ले रहे हैं।
ग्वालियर की खेड़ापति कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय रिटायर्ड Sub-Registrar बिहारी लाल गुप्ता भी इसी तरह के एक फ्रॉड का शिकार हो गए।
ठगों ने उन्हें न केवल 1.12 करोड़ रुपये का चूना लगाया, बल्कि ‘प्रधानमंत्री मोदी’ का नाम लेकर उन्हें इतना डराया कि उन्होंने अपने बेटों तक को इस बारे में नहीं बताया।
ऐसे शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’
घटना 16 नवंबर 2025 की है। बिहारी लाल जी के पास एक अनजान कॉल आया।
फोन करने वाले ने खुद को TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) का अधिकारी रोहित शर्मा बताया।
उसने डराते हुए कहा कि आपका आधार कार्ड और मोबाइल नंबर बंद होने वाला है क्योंकि आपके नाम से अवैध गतिविधियां हुई हैं।
जब बुजुर्ग घबरा गए, तो ठग ने कहा कि “अभी आपको हमारे IPS अफसर का कॉल आएगा, वही आपकी मदद कर सकते हैं।”

PM मोदी के नाम पर दबाव
कुछ ही देर बाद वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल आया।
सामने वर्दी में एक शख्स बैठा था जिसने खुद को IPS नीरज ठाकुर बताया।
ठग ने बुजुर्ग से कहा कि संदीप कुमार नाम के अपराधी ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में आपका नाम लिया है।
शातिर ठग ने बुजुर्ग को विश्वास में लेने के लिए एक बड़ा झूठ बोला।
उसने कहा, “पीएम मोदी ने खुद इस केस की निगरानी करने और इसे पूरी तरह गोपनीय रखने के निर्देश दिए हैं। अगर आपने यह बात किसी को भी बताई, तो आरोपी विदेश भाग जाएंगे और आप पर भी कार्रवाई होगी।”

9 घंटे तक वीडियो कॉल पर रखा ‘कैद’
बुजुर्ग ने बताया कि ठग उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक वीडियो कॉल पर रखता था।
उन्हें घर से बाहर जाने या किसी से बात करने की इजाजत नहीं थी।
उनका इस कदर ‘ब्रेन वॉश’ किया गया कि उन्हें लगने लगा कि वे सच में किसी बड़ी जांच का हिस्सा हैं।
ठगों को उनके म्यूचुअल फंड्स की भी जानकारी थी।
उन्होंने सबसे पहले फंड्स कैश कराए और फिर चार अलग-अलग राज्यों (जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र और असम) के बैंक खातों में कुल 1.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

बेटों को भी नहीं लगी भनक
बिहारी लाल जी के चार बेटे हैं, जिनमें से तीन विदेश में और एक भारत की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत है।
डर के कारण उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया।
अंत में जब उन्होंने अपने एक दोस्त से बात की, तो मामले का खुलासा हुआ।
भोपाल के एक पुलिस अधिकारी की मदद से हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई गई और जीरो-FIR के माध्यम से मामला दर्ज हुआ।


