LPG Cylinder Crisis India: भारत में इस वक्त रसोई गैस और कॉमर्शियल सिलेंडर को लेकर जो स्थिति बनी हुई है, वह किसी बड़े संकट से कम नहीं है।
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में छिड़ी जंग की आग अब भारत की रसोइयों और होटलों तक पहुंच गई है।
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की गैस सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है।
हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि केंद्र सरकार को देश में एस्मा और एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू करना पड़ा है।
आइए, इस पूरे संकट को समझते हैं और जानते हैं क्या है ESMA और Essential Commodity Act…

क्या है पूरा मामला? क्यों मची है हाय-तौबा?
भारत अपनी जरूरत की गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाता है।
पिछले कुछ दिनों से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है।
28 फरवरी से युद्ध के हालात ऐसे बने कि समुद्र के जिस रास्ते से भारत के गैस टैंकर आते हैं, वहां खतरा बढ़ गया है।
खतरे की दो बड़ी वजहें:
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होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) का बंद होना: यह करीब 167 किलोमीटर लंबा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस यहीं से गुजरता है। ईरान के साथ युद्ध की स्थिति के कारण टैंकरों ने यहां से निकलना बंद कर दिया है।
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कतर में उत्पादन ठप: भारत अपनी जरूरत की 40% गैस कतर से लेता है। ईरान के ड्रोन हमलों के डर से कतर ने अपने LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्लांट में उत्पादन रोक दिया है।
नतीजा यह हुआ कि भारत में अचानक गैस की कमी हो गई और सरकार को इमरजेंसी कदम उठाने पड़े।
STORY | Oil ministry sets up panel as commercial LPG shortage hits hospitality sector
The oil ministry has constituted a committee to examine supply issues after a sudden shortage of commercial LPG cylinders alarmed the hospitality sector, with restaurant associations warning… pic.twitter.com/DmD5rQiUaz
— Press Trust of India (@PTI_News) March 10, 2026
सरकार ने लागू किया ESMA और Essential Commodity Act
हालात बिगड़ते देख केंद्र सरकार ने दो बड़े हथियार इस्तेमाल किए हैं:
Essential Commodity Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम), 1955
इसके तहत सरकार ने गैस को ‘अति आवश्यक’ श्रेणी में डालकर इसके वितरण पर पूरा नियंत्रण कर लिया है।
अब गैस एजेंसियां अपनी मर्जी से किसी को भी सिलेंडर नहीं बेच सकतीं।
इसका मुख्य उद्देश्य जमाखोरी (Hoarding) रोकना है।

ESMA (एस्मा – आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम), 1968
यह कानून सबसे सख्त है। इसे लागू करने का मतलब है कि गैस, तेल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी अब हड़ताल पर नहीं जा सकते।
- अगर कोई कर्मचारी हड़ताल करता है, तो उसे बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है।
- दोषी पाए जाने पर 6 महीने की जेल या जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
- यह कानून फिलहाल 6 महीने के लिए लगाया गया है।
Government of India invokes the Essential Commodities Act, 1955, to regulate the availability, supply and equitable distribution of petroleum and petroleum products and natural gas pic.twitter.com/OqtsDwb13s
— ANI (@ANI) March 10, 2026
अब किसे कितनी गैस मिलेगी?
सरकार ने गैस की किल्लत को मैनेज करने के लिए उपभोक्ताओं को चार श्रेणियों में बांट दिया है:
- पहली कैटेगरी (प्राथमिकता): आपके घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों वाली CNG। इन्हें पूरी सप्लाई मिलती रहेगी ताकि आम आदमी का जीवन प्रभावित न हो।
- दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खेती के लिए यूरिया और खाद जरूरी है, इसलिए इन्हें 70% सप्लाई मिलेगी।
- तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी बड़ी फैक्ट्रियों को 80% गैस मिलेगी।
- चौथी कैटेगरी (होटल और छोटे बिजनेस): शहर के गैस नेटवर्क वाले होटलों और छोटे कारखानों को उनकी पुरानी खपत का 80% हिस्सा दिया जाएगा।

राज्यों में क्या हैं हालात?
देश के कई हिस्सों में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई लगभग रुक गई है, जिससे व्यापार जगत में हड़कंप है:
- महाराष्ट्र: मुंबई के करीब 20% होटल बंद हो गए हैं। पुणे में हालत यह है कि नगर निगम ने गैस से चलने वाले शवदाह गृह भी बंद कर दिए हैं। करीब 9,000 रेस्टोरेंट पर ताला लगने का खतरा है।
- पंजाब: यहां 8 मार्च से ही बड़े औद्योगिक सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है। घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए भी 25 दिन का अंतर अनिवार्य कर दिया गया है।
- उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश: लखनऊ, कानपुर और इंदौर जैसे शहरों में बुकिंग के 5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो रही है। शादी-ब्याह के सीजन में हलवाइयों और कैटरर्स के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
- राजस्थान और छत्तीसगढ़: यहां के संचालकों का कहना है कि वे बढ़ी हुई कीमतें देने को तैयार हैं, फिर भी सिलेंडर नहीं मिल रहे। छत्तीसगढ़ में अस्पतालों और स्कूलों को छोड़कर बाकी जगह कॉमर्शियल सप्लाई बंद जैसी ही है।

नए नियम: अब गैस बुक करना आसान नहीं होगा
सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए बुकिंग और डिलीवरी के नियमों को बहुत सख्त कर दिया है:
- 25 दिन का नियम: पहले आप 21 दिन बाद दूसरा घरेलू सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। यानी एक महीने में एक ही सिलेंडर मिलेगा।
- OTP और बायोमेट्रिक: अब डिलीवरी बॉय को सिर्फ पैसे देकर सिलेंडर नहीं मिलेगा। आपको अपने फोन पर आया OTP बताना होगा या बायोमेट्रिक (अंगूठा) वेरिफिकेशन देना होगा। यह इसलिए किया गया है ताकि घरेलू सिलेंडर को चोरी-छिपे होटलों में न भेजा जा सके।
- कीमतों में उछाल: संकट के बीच 7 मार्च से घरेलू सिलेंडर ₹60 और कॉमर्शियल सिलेंडर ₹115 महंगा हो गया है।
आगे क्या होगा? क्या हालात सुधरेंगे?
इंडियन ऑयल और सरकार की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं, वे मिले-जुले हैं।
सरकार अमेरिका, रूस और अल्जीरिया जैसे देशों से वैकल्पिक रास्ते से गैस मंगाने की कोशिश कर रही है।
G7 देश भी अपने सुरक्षित भंडारों से तेल निकालने पर चर्चा कर रहे हैं।

आम जनता को क्या करना चाहिए?
अधिकारियों का कहना है कि पैनिक (घबराहट) में आकर एक्स्ट्रा बुकिंग न करें।
सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि घरों की रसोई ठंडी न पड़े।
रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे सारा ध्यान घरेलू रसोई गैस (LPG) बनाने पर लगाएं, भले ही कॉमर्शियल सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित रहे।
यह संकट पूरी तरह से वैश्विक राजनीति और युद्ध पर निर्भर है।
जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और ‘होर्मुज जलमार्ग’ सुरक्षित नहीं होता, तब तक सप्लाई चेन में दिक्कत बनी रह सकती है।
सरकार का ‘एस्मा’ और ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट’ लगाना इस बात का सबूत है कि स्थिति गंभीर है, लेकिन वे इसे नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देना चाहते।
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