Census 26-27 Live-in Couples: भारत अपनी अगली और 16वीं जनगणना की तैयारी में जुट गया है।
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है।
2021 में कोरोना महामारी के कारण जो जनगणना टल गई थी, अब वह ‘जनगणना 2026-27’ के रूप में हमारे सामने है।
इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि सामाजिक बदलावों को स्वीकार करते हुए कई नए नियमों के साथ आएगी।
केंद्र सरकार ने इसके लिए 33 सवालों की एक विस्तृत सूची तैयार की है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप से लेकर जातिगत जनगणना तक के बड़े बदलाव शामिल हैं।

लिव-इन कपल्स को मिलेगा ‘विवाहित’ का दर्जा
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर है।
भारत सरकार के जनगणना विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई जोड़ा बिना शादी के एक साथ रह रहा है और वे खुद को एक ‘स्थिर संबंध’ (Stable Relationship) में मानते हैं, तो उन्हें जनगणना के आंकड़ों में ‘विवाहित’ (Married) ही माना जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, अगर कोई कपल यह कहता है कि उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है और वे साथ रहने के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें विवाहित जोड़ों की श्रेणी में दर्ज किया जाएगा।
हालांकि, पिछली जनगणनाओं में भी मौखिक जानकारी के आधार पर ऐसा होता था, लेकिन यह पहली बार है जब सरकार ने इसे लिखित रूप में और अपने आधिकारिक पोर्टल के FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) सेक्शन में स्पष्ट किया है।

पूरी तरह डिजिटल और ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ की सुविधा
यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
अब आपको जनगणना अधिकारी का घंटों इंतज़ार करने या कागजों के बंडल भरने की ज़रूरत नहीं होगी।
- ऑनलाइन पोर्टल: सरकार एक विशेष पोर्टल और मोबाइल ऐप (Android और iOS) लॉन्च कर रही है।
- खुद भरें जानकारी: ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ विकल्प के जरिए नागरिक खुद लॉगिन करके 33 सवालों के जवाब दे सकेंगे। इसके लिए मोबाइल OTP के जरिए पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
- 16 भाषाएं: पोर्टल और ऐप हिंदी, अंग्रेजी समेत 16 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे।
Watch | दिल्ली: आगामी जनगणना 2027 को लेकर भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा, “इस बार सेल्फ इनमरेशन के माध्यम से डिजिटली स्वयं सूचना दर्ज कर सकते हैं और वो 15 दिन की अवधि जब हाउस टू हाउस एक्टिविटी उस राज्य या यूटी में प्रारंभ होगी, उसके पहले… pic.twitter.com/M5Miq0CEcK
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) March 30, 2026
जनगणना के दो चरण और महत्वपूर्ण तारीखें
रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, यह प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में पूरी होगी:
- पहला चरण (हाउसलिस्टिंग): यह 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें घरों की गिनती, उनके प्रकार और सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। दिल्ली के NDMC इलाकों से इसकी शुरुआत 1 अप्रैल से होगी।
- दूसरा चरण (जनसंख्या गणना): इसमें लोगों की व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी। इसकी ‘रेफरेंस डेट’ 1 मार्च 2027 तय की गई है। यानी 1 मार्च 2027 की आधी रात को देश की आबादी और स्थिति जो होगी, वही आधिकारिक आंकड़ा माना जाएगा।
2027 மக்கள் தொகை கணக்கெடுப்பின் முதல் கட்டப் பணிகள் வரும் ஏப்ரல் 1-ஆம் தேதி தொடங்கும் என்று பத்திரிகை தகவல் அலுவலகத் தலைமை இயக்குநர் திரு. தீரேந்திர ஓஜா தெரிவித்துள்ளார்.#Census2027 #IndiaCensus @PIB_India @DG_PIB @airnewsalerts pic.twitter.com/yU2H44NWMe
— AIR News Chennai (@AIRNews_Chennai) March 30, 2026
पहली बार होगी जातिगत जनगणना
आजादी के बाद यह पहली बार है जब जनगणना में जाति (Caste) का कॉलम शामिल किया जाएगा।
इससे पहले 1931 में अंग्रेजों के शासनकाल में जाति आधारित डेटा इकट्ठा किया गया था।
इस बार डिजिटल तरीके से हर नागरिक की जाति का डेटा लिया जाएगा, जिससे भविष्य में सरकारी योजनाओं और आरक्षण नीतियों को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।
Watch | दिल्ली: आगामी जनगणना 2027 को लेकर भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा, “जनगणना की प्रक्रिया जारी है और तैयारियां अब उन्नत चरण में पहुंच गई हैं। आने वाले दिनों में पहले चरण के तहत हाउस लिस्टिंग यानी मकानों की गणना का फील्डवर्क कई राज्यों… pic.twitter.com/IltfCzW33j
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) March 30, 2026
क्या हैं वो 33 सवाल?
जनगणना अधिकारी जब आपके घर आएंगे या जब आप ऑनलाइन फॉर्म भरेंगे, तो आपसे 33 मुख्य सवाल पूछे जाएंगे। इनमें शामिल हैं:
1. भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकारी अथवा जनगणना नंबर)
2 मकान नंबर
3. मकान के फर्श में प्रमुख सामग्री
4. मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
5. मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
6. मकान के उपयोग
7. मकान की हालत
8. परिवार क्रमांक
9. परिवार के सदस्यों की संख्या
10. परिवार के मुखिया का नाम
11. परिवार के मुखिया का लिंग
12. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति /अन्य
13. मकान के स्वामित्व की स्थिति
14. मकान में कमरों की संख्या
15. परिवार में विवाहित दंपतियों की संख्या
16. पेयजल का मुख्य स्रोत
17. पेयजल स्रोत की उपलब्धता
18. लाइट का मुख्य स्रोत
19. शौचालय की उपलब्धता
20. शौचालय का प्रकार
21. गंदे पानी की निकासी
22. स्नानघर की उपलब्धता
23. रसोईघर, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन
24. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन
25. रेडियो/ट्रांजिस्टर
26. टेलीविजन
27. इंटरनेट सुविधा
28. लैपटॉप/कम्प्यूटर
29. टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन
30. साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड
31. कार/जीप/वैन
32. मुख्य अनाज
33. मोबाइल नंबर
डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाए गए व्यक्तिगत आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाएंगे।
यह डेटा किसी अन्य एजेंसी के साथ शेयर नहीं किया जाएगा।
इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और देश के विकास के लिए नीतियां बनाने में किया जाएगा।

आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह जनगणना?
यह सिर्फ सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह ‘भारत की कुंडली’ है।
इसी डेटा के आधार पर तय होता है कि अगले 10 सालों में:
- नए स्कूल और अस्पताल कहां बनेंगे?
- राशन कार्ड और सब्सिडी की योजनाएं कैसे लागू होंगी?
- सड़कों और बिजली की कनेक्टिविटी का विस्तार कैसे होगा?
जनगणना 2026-27 आधुनिक भारत की बदलती तस्वीर को पेश करेगी।
लिव-इन कपल्स को मान्यता देना और डिजिटल प्रक्रिया को अपनाना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब समाज की बदलती सोच और तकनीक के साथ कदम मिला रहा है।
1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले इस महाभियान में अपनी सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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