India US Trade Deal: सोमवार, 2 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक ऐसी ‘ट्रेड डील’ (व्यापारिक समझौता) हुई, जिसने ग्लोबल मार्केट को हैरान कर दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक फोन कॉल ने महीनों से अटके व्यापारिक विवाद को चंद घंटों में सुलझा दिया।
इस डील का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले भारी-भरकम टैरिफ को घटाकर अब महज 18% कर दिया है।
यह एक बड़ी राहत है क्योंकि हाल के महीनों में यह टैक्स 50% तक पहुंच गया था।

आइए जानते हैं कि इस डील की शर्तें क्या हैं और इससे आम आदमी से बड़े व्यापारियों तक को क्या फायदा होगा।
कैसे बनी डील की राह?
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत भारत पर सख्त रुख अपनाया था।
अप्रैल 2025 में उन्होंने 25% का ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (जैसा को तैसा टैक्स) लगाया था।
इसके बाद, अगस्त में रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% की अतिरिक्त पेनल्टी लगा दी गई।
कुल मिलाकर भारतीय सामानों पर 50% टैक्स लग रहा था, जिससे अमेरिका में भारतीय सामान महंगे हो गए थे और एक्सपोर्टर्स परेशान थे।
सोमवार रात को ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने ऐलान किया कि प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद अब यह टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है।

यानी रूस वाला जुर्माना हटा लिया गया है। बदले में भारत ने भी अमेरिका की कुछ बड़ी शर्तें मानी हैं।
Wonderful to speak with my dear friend President Trump today. Delighted that Made in India products will now have a reduced tariff of 18%. Big thanks to President Trump on behalf of the 1.4 billion people of India for this wonderful announcement.
When two large economies and the…
— Narendra Modi (@narendramodi) February 2, 2026
डील की 4 मुख्य शर्तें: क्या दिया, क्या लिया?
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रूस से तेल पर ‘ना’: भारत अब रूस से डिस्काउंट पर मिलने वाला कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत अब अमेरिका और वेनेजुएला पर निर्भर रहेगा।
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$500 बिलियन की खरीदारी: भारत ‘बाय अमेरिकन’ नीति के तहत अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से करीब 46 लाख करोड़ रुपये (500 अरब डॉलर) का सामान खरीदेगा। इसमें हाई-टेक मशीनरी, रक्षा उपकरण, कोयला और कृषि उत्पाद शामिल होंगे।
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टैरिफ फ्री भविष्य: भारत ने वादा किया है कि वह अमेरिकी उत्पादों पर लगने वाले टैक्स को धीरे-धीरे घटाकर 0% की तरफ ले जाएगा।
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चीन का विकल्प: यह डील साबित करती है कि अमेरिका अब चीन पर अपनी निर्भरता खत्म कर भारत को अपना सबसे भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनाना चाहता है।
A milestone in global economic cooperation. 🇮🇳🇺🇸
India and the United States have reached a historic trade agreement, underscoring mutual trust, shared strategic priorities, and a forward-looking vision for inclusive growth.
This landmark step strengthens one of the world’s… pic.twitter.com/unI1yRWM5h
— BJP (@BJP4India) February 3, 2026
इन 5 सेक्टर्स में आएगी खुशहाली
इस समझौते से भारत के कई उद्योगों को नई दिशा मिली है। मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है:
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ज्वेलरी और लेदर: भारत से अमेरिका जाने वाली हाथ से बनी ज्वेलरी और चमड़े के सामान पर ड्यूटी कम होने से इन प्रोडक्ट्स की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटेगी। इससे छोटे कारीगरों को ज्यादा काम मिलेगा।
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टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग): भारत के बने कपड़े अमेरिकी स्टोर्स में सस्ते होंगे। बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारतीय कपड़ा अब अधिक प्रतिस्पर्धी (Competitive) हो जाएगा।
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IT और टेक्नोलॉजी: भारत द्वारा अमेरिका से तकनीक खरीदने के वादे के बाद, भारतीय आईटी कंपनियों को अमेरिका में बड़े रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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फार्मा सेक्टर: भारतीय जेनेरिक दवाएं (सस्ती दवाएं) पहले से ही अमेरिका में लोकप्रिय हैं। अब टैक्स कम होने से भारतीय कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और अमेरिका के आम लोगों को सस्ती दवाएं मिलेंगी।
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ऑटो कंपोनेंट्स: कारों के कलपुर्जे बनाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका एक बड़ा बाजार है। 7% टैरिफ कटौती सीधे तौर पर इन कंपनियों के मार्जिन को बढ़ाएगी।

बाजार में जश्न और मोदी का ‘संस्कृत संदेश’
इस खबर के आते ही शेयर बाजार में दिवाली जैसा माहौल दिखा।
‘गिफ्ट निफ्टी’ (GIFT Nifty) में 1000 अंकों की भारी तेजी देखी गई, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
रुपया भी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस सफलता को एक आध्यात्मिक मोड़ देते हुए संस्कृत का एक श्लोक शेयर किया:
श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥
इसका मतलब ये है कि नेक इरादों से किया गया कार्य ही धन और समृद्धि लाता है। साहस और आत्मविश्वास इसे बढ़ाते हैं, जबकि कुशलता इसे स्थिरता देती है।
आत्मविश्वास वह शक्ति है, जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।
श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते।
दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥ pic.twitter.com/FcQqHbSvI9
— Narendra Modi (@narendramodi) February 3, 2026
पीएम का यह संदेश साफ करता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक कुशल और अनुशासित खिलाड़ी बनकर उभरा है।
यह ट्रेड डील केवल पैसों के लेन-देन तक सीमित नहीं है। यह बदलती हुई जियो-पॉलिटिक्स का संकेत है।
जहां एक ओर भारत ने रूस जैसे पुराने दोस्त से तेल लेना बंद कर कड़ा फैसला लिया, वहीं दूसरी ओर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अमेरिका) के साथ अपने रिश्तों को नए मुकाम पर पहुंचाया।

आने वाले समय में, यह डील भारत की GDP को 8-9% की ग्रोथ रेट तक ले जाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।


