Indore Coaching Center Sealed: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
इस हादसे में 15 लोगों की असमय मौत हो गई, जिसमें मध्य प्रदेश के अनूपपुर के रहने वाले 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयनील चक्रवर्ती भी शामिल थे।
इस भीषण हादसे से सबक लेते हुए इंदौर जिला प्रशासन, नगर निगम और फायर ब्रिगेड की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है।
छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंदौर में मंगलवार को एक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसके तहत नियमों की अनदेखी करने वाले करीब 10 कोचिंग सेंटर्स और व्यावसायिक इमारतों (कमर्शियल बिल्डिंग्स) को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है।

जांच में खुली पोल: बंद मिले इमरजेंसी एग्जिट
प्रशासन की संयुक्त टीम ने जब भंवरकुआं और गीता भवन जैसे प्रमुख कोचिंग हब में छापेमारी की, तो सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई।
गीता भवन स्थित मशहूर ‘केटेलाइजर कोचिंग सेंटर’ में गंभीर लापरवाही देखने को मिली।
यहाँ आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता (इमरजेंसी एग्जिट) पूरी तरह से बंद पाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि अगर कोई अनहोनी होती, तो बंद रास्तों की वजह से सैकड़ों छात्रों की जान जोखिम में पड़ सकती थी।

इसी तरह की गंभीर कमियां पाए जाने के बाद प्रशासन ने केटेलाइजर कोचिंग संस्थान, नुकलियम कोचिंग संस्थान, रामानुजन कोचिंग संस्थान, आयाम कोचिंग संस्थान, इकरथ कोचिंग संस्थान और यहाँ तक कि एक मशहूर होटल ‘मक्खन वाला’ को भी तुरंत सील कर दिया।
वेदा बिजनेस पार्क से अपोलो आर्केड तक ताबड़तोड़ छापेमारी
एसडीएम घनश्याम धनगर के नेतृत्व में शुरू हुआ यह ‘ऑपरेशन कोचिंग’ अभियान सिर्फ कोचिंग संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहा।
टीम ने शहर के बड़े बिजनेस हब जैसे वेदा बिजनेस पार्क, अपोलो एवेन्यू और अपोलो आर्केड का भी बारीकी से निरीक्षण किया।
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई बहुमंजिला इमारतों में फायर फाइटिंग सिस्टम या तो खराब पड़े थे या फिर वे नियमों के मुताबिक पर्याप्त नहीं थे।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई इमारतों में फायर सेफ्टी उपकरणों का नियमित रख-रखाव (मेंटेनेंस) तक नहीं किया जा रहा था।
इस पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए प्रशासन ने कई भवन मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
कोचिंग के साथ रेस्टोरेंट और म्यूजियम भी हुए सील
एसडीएम घनश्याम धनगर ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि प्रशासन के लिए छात्रों और आम जनता की सुरक्षा सबसे ऊपर है।
जिन भी इमारतों में कोचिंग सेंटर्स के साथ-साथ दूसरी कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं और वहाँ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

इसी कड़ी में सुरक्षा मानकों को पूरा न करने वाले कुछ रेस्टोरेंट, म्यूजियम और अन्य दफ्तरों को भी सील करने की कार्रवाई की गई है।
प्रशासन का यह साफ संदेश है कि नियमों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थायी रूप से बंद नहीं हुए संस्थान, सुधार के लिए मिला मौका
प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि इस कार्रवाई का मकसद किसी भी संस्थान या बिजनेस को हमेशा के लिए बंद करना नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा नियमों का पालन करवाना है।
सील किए गए संस्थानों और भवनों के संचालकों को राहत पाने के लिए एक तय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
भवन मालिकों को प्रशासन के पास एक शपथ पत्र (Affidavit) जमा करना होगा, जिसमें उन्हें यह भरोसा देना होगा कि वे अगले 15 से 20 दिनों के भीतर अपनी इमारतों में सभी जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण लगा लेंगे और कमियों को दूर कर लेंगे।

कागज दिखाने और जांच के बाद ही खुलेगा ताला
इसके साथ ही, संचालकों को नए फायर सेफ्टी उपकरण खरीदने के बिल, दस्तावेज और आर्डर की कॉपियां भी प्रशासन के सामने पेश करनी होंगी।
जब प्रशासन की टीम संतुष्ट हो जाएगी कि सभी सुरक्षा मानकों को पूरा कर लिया गया है, तभी इन सील की गई इमारतों और कोचिंग सेंटर्स को दोबारा खोलने की इजाजत दी जाएगी।
प्रशासन का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को रोका जा सके।
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