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पुरी रथयात्रा में भारी भीड़ और उमस के बीच मची भगदड़, दम घुटने से 1 की मौत; 100 से अधिक घायल

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Puri Rath Yatra stampede: ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा के पहले ही दिन एक बड़ा हादसा सामने आया है।

ऐतिहासिक ‘बड़ा डंडा’ (ग्रैंड रोड) पर उमड़े करीब 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के महासैलाब, अत्यधिक उमस और अचानक हुई तेज बारिश के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

इस दर्दनाक घटना में दम घुटने के कारण कम से कम एक श्रद्धालु की मौत हो गई है, जबकि 100 से अधिक लोगों के घायल और बीमार होने की खबर है।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस बल और स्वयंसेवकों ने मुस्तैदी दिखाते हुए दर्जनों बेहोश श्रद्धालुओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जिससे कई लोगों की जान समय रहते बच सकी।

अत्यधिक भीड़ और उमस बनी हादसे की वजह

गुरुवार को जैसे ही भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा शुरू हुई, वैसे ही समूचा पुरी शहर ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से गूंज उठा।

लेकिन इस दिव्य और विहंगम दृश्य के साथ ही वहां आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा जिसे नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया।

शाम के समय जब मुख्य मंदिर से रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उस वक्त तेज बारिश हो रही थी।

बारिश के साथ ही अत्यधिक उमस ने हवा में ऑक्सीजन की कमी जैसी स्थिति पैदा कर दी।

लाखों लोगों की खचाखच भरी भीड़ में एक श्रद्धालु को अचानक सांस लेने में भारी तकलीफ हुई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।

आसपास मौजूद सेवादारों और पुलिसकर्मियों ने तुरंत एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं की मदद से उसे पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल (DHH) पहुंचाया।हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दम घुटने और कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत होने की आशंका जताई जा रही है।

इसके अलावा, एक और श्रद्धालु की मौत की अपुष्ट खबरें आ रही हैं, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन या पुलिस ने आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है।

दर्जनों श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, पुलिस की फुर्ती से बची कई जानें

भीड़ के दबाव और उमस के कारण लगभग 100 से अधिक श्रद्धालुओं के बेहोश होने या सांस लेने में तकलीफ की शिकायत सामने आई है।

लगभग 120 लोगों को विभिन्न नजदीकी चिकित्सा शिविरों और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि किस तरह ग्रैंड रोड पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

ऐसे मुश्किल हालात में भी ओडिशा पुलिस, अग्निशमन सेवा के जवानों और स्वयंसेवकों ने मानव श्रृंखला बनाकर गंभीर रूप से बीमार लोगों को भीड़ के बीच से बाहर निकाला।

पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद स्थिति की कमान संभाली और आपातकालीन गलियारा बनाकर घायलों को तुरंत एम्बुलेंस तक पहुंचाया।

कैसी रही रथयात्रा की शुरुआत और पावन ‘पहंडी’ रस्म

इस हादसे से इतर, अगर रथयात्रा की धार्मिक परंपराओं की बात करें तो लगातार हो रही बारिश के बीच 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत बेहद उत्साह और भक्तिभाव के साथ ‘पहंडी’ की रस्म से हुई।

‘पहंडी’ वह पावन रस्म है जिसमें महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके गर्भगृह से बाहर लाकर भव्य और विशाल रथों पर विराजमान किया जाता है।

घंटियों की खनक, शंखनाद और मृदंग की थाप के बीच सबसे पहले सुदर्शन चक्र को देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर स्थापित किया गया।

इसके बाद बड़े भाई भगवान बलभद्र को ‘तालध्वज’ रथ पर विराजमान किया गया।

अंत में, भक्तों के प्रिय ‘कालिया ठाकुर’ यानी स्वयं महाप्रभु जगन्नाथ को जैसे ही मंदिर के सिंहद्वार से बाहर लाया गया, रथमार्ग पर मौजूद लाखों भक्तों की आंखें सजल हो गईं।

भक्तों ने दोनों हाथ उठाकर ‘जय जगन्नाथ’ का ऐसा जयघोष किया कि पूरा आसमान गुंजायमान हो गया।

इस दौरान पारंपरिक ओडिसी नर्तकों और लोक कलाकारों ने प्रभु के रथ के आगे अद्भुत प्रस्तुतियां देकर माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम: 13 हजार जवान और AI कैमरे तैनात

इस वर्ष हर साल की तुलना में भीड़ अधिक होने का अनुमान पहले से ही था, जिसे देखते हुए पुरी प्रशासन ने चाक-चौबंद तैयारियां की थीं।

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 19 आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में लगभग 13,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

इसके साथ ही, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 15 कंपनियों (जिसमें CRPF, BSF और RAF शामिल हैं) को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया था।

भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए इस बार उच्च तकनीक का सहारा लिया गया।

पूरे ग्रैंड रोड और मंदिर परिसर के आसपास कुल 473 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संचालित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिन्हें ड्रोन-जैमिंग सिस्टम से जोड़ा गया था।

दो बड़े कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटरों से हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही थी।

इसके अलावा, समुद्र तट पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए 500 से अधिक लाइफगार्ड और फायर सर्विस के जवानों को भी तैनात किया गया था।

तटीय सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और ओडिशा मरीन पुलिस की संयुक्त गश्त भी जारी रही।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में भर्ती घायलों के इलाज के लिए डॉक्टरों की विशेष टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश मरीजों की हालत अब स्थिर है और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री और स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है और पीड़ितों को हर संभव सहायता देने का निर्देश दिया है।

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