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AI से राष्ट्रपति और PM मोदी का आपत्तिजनक वीडियो बनाने वाला ‘जन सुराज’ कार्यकर्ता गिरफ्तार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

PM Modi President Deepfake Video: हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने साइबर सुरक्षा और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के दुरुपयोग पर बहस छेड़ दी है।

मुजफ्फरपुर पुलिस ने देश के सर्वोच्च पदों राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का आपत्तिजनक एआई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में जन सुराज पार्टी से जुड़े एक कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया है।

क्या है पूरा मामला?

2 जनवरी को मुजफ्फरपुर साइबर पुलिस को सोशल मीडिया के जरिए एक फर्जी वीडियो की सूचना मिली।

जांच में पाया गया कि इस वीडियो को एआई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया था।

वीडियो में देश की राष्ट्रपति की आवाज को एआई के जरिए क्लोन किया गया था और उसमें प्रधानमंत्री के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया गया था।

इस डिजिटल हेरफेर का मकसद आम जनता के बीच भ्रम पैदा करना और दो सर्वोच्च संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुँचाना था।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर और साइबर डीएसपी ने एक विशेष टीम का गठन किया।

तकनीकी सर्विलांस के आधार पर आरोपी की पहचान प्रमोद कुमार राज (उर्फ नागेंद्र सहनी) के रूप में हुई।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी प्रमोद कुमार राज के बारे में बताया जा रहा है कि वह ‘जन सुराज’ अभियान के लिए काम कर चुका है और बोचहां क्षेत्र में सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में सक्रिय था।

समाज पर प्रभाव और पुलिस की चेतावनी

पुलिस के अनुसार, इस तरह के फर्जी कंटेंट का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का अविश्वास पैदा करना था।

आरोपी न केवल वीडियो बनाता था, बल्कि वह युवाओं को सोशल मीडिया से पैसे कमाने की तकनीक भी सिखाता था।

पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश के पीछे किसी और का हाथ तो नहीं है।

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यह मामला उन लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो तकनीकी कौशल का उपयोग अफवाहें फैलाने या किसी की छवि खराब करने के लिए करते हैं।

एआई से बनी किसी भी फर्जी सामग्री को साझा करना आईटी एक्ट के तहत गंभीर अपराध है।

मुजफ्फरपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि इंटरनेट की दुनिया में संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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