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जेवर एयरपोर्ट: 20 मिनट में बोर्डिंग- AI का पहरा, जानें क्यों है यह देश का सबसे हाई-टेक हवाई अड्डा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Jewar Airport Inaugration: 28 मार्च को शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Phase-1) का भव्य उद्घाटन किया।

यह सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि भारत की आधुनिकता और विकास की नई पहचान है।

जेवर के स्थानीय लोगों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है।

कहा जा रहा है कि लोग यहां वर्षों से एक अदद रेलवे स्टेशन की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी झोली में सीधे एशिया का सबसे बड़ा बनने वाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट डाल दिया है।

एशिया का ‘सुपर हब’ और चीन को टक्कर

वर्तमान में, चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट (47 वर्ग किमी) एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट माना जाता है।

लेकिन जेवर एयरपोर्ट ने इसे पीछे छोड़ने की पूरी तैयारी कर ली है।

कुल 52 वर्ग किलोमीटर (लगभग 11,750 एकड़) में प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट जब अपने चारों चरणों (Phases) को पूरा कर लेगा, तब यह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।

फिलहाल, पहले फेज का काम 3300 एकड़ में पूरा हुआ है, जिस पर करीब 11,200 करोड़ रुपये का खर्च आया है।

क्यों है सुरक्षा का अभेद किला? 

जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी चर्चा इसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हो रही है।

यहां 5 स्तरीय (5-Layer) सुरक्षा चक्र बनाया गया है।

  1. CISF का पहरा: करीब 1047 सीआईएसएफ (CISF) जवानों को एयरपोर्ट की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  2. AI की तीसरी आंख: यहां तकनीक और इंसान का अनोखा तालमेल दिखेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।
  3. 3D एक्स-रे और बायोमेट्रिक्स: यात्रियों के सामान की जांच के लिए अत्याधुनिक 3D एक्स-रे स्कैनर्स और विस्फोटक पहचान प्रणाली (EDS) लगाई गई है।
  4. साइबर सुरक्षा: डिजिटल युग में हैकिंग और डेटा चोरी के खतरों को देखते हुए यहां ‘साइबर वॉल’ बनाई गई है, जो एयरपोर्ट के पूरे नेटवर्क को सुरक्षित रखेगी।
  5. त्वरित प्रतिक्रिया: किसी भी आपात स्थिति के लिए अत्याधुनिक हथियारों से लैस कमांडो और क्विक रिएक्शन टीमें (QRT) 24 घंटे तैनात रहेंगी।

स्विस तकनीक और बनारस के घाटों का संगम

इस एयरपोर्ट की बनावट में आधुनिकता और भारतीय संस्कृति का बेजोड़ संगम दिखता है।

इसके टर्मिनल्स को वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जो यात्रियों को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव देगा।

वहीं, इसके निर्माण में स्विस टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह दुनिया के बेहतरीन एयरपोर्ट्स की कतार में खड़ा हो गया है।

20 मिनट में बोर्डिंग: यात्रियों का बचेगा समय

अक्सर बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत चेक-इन और बोर्डिंग में लगने वाला समय होता है।

लेकिन जेवर एयरपोर्ट ने इसका समाधान ढूंढ लिया है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी का दावा है कि यहां एंट्री गेट से लेकर बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में 20 मिनट से भी कम समय लगेगा।

अत्याधुनिक डिजिटल सिस्टम और सुव्यवस्थित लेआउट के कारण यात्रियों को लंबी कतारों से निजात मिलेगी।

कनेक्टिविटी का महाजाल: 5 एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव

जेवर एयरपोर्ट सिर्फ उड़ानों के लिए नहीं, बल्कि आवाजाही के लिए भी सबसे सुगम केंद्र बनेगा।

यह देश का पहला ऐसा मल्टी-मॉडल हब होगा जो 5 प्रमुख एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा होगा:

  1. यमुना एक्सप्रेस-वे
  2. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे
  3. फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेस-वे
  4. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे
  5. गंगा एक्सप्रेस-वे इसके अलावा, रैपिड रेल (RRTS) और मेट्रो नेटवर्क के जरिए इसे दिल्ली और एनसीआर के अन्य हिस्सों से जोड़ा जाएगा।

इन 11 शहरों के लिए शुरू होंगी उड़ानें

शुरुआती फेज में इंडिगो (IndiGo), आकासा एयर (Akasa Air) और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस यहां से अपनी सेवाएं देंगी।

यात्री यहां से सीधे वाराणसी, लखनऊ, अहमदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई, पटना, कानपुर और श्रीनगर जैसे बड़े शहरों के लिए उड़ान भर सकेंगे।

मई से नियमित कमर्शियल उड़ानें शुरू होने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश का गौरव और भविष्य

इस एयरपोर्ट के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला भारत का इकलौता राज्य बन गया है।

जेवर एयरपोर्ट की सालाना क्षमता फिलहाल 3 करोड़ यात्रियों की है, जिसे 2040 तक बढ़ाकर कई गुना किया जाएगा।

3.9 किलोमीटर लंबे रनवे पर दुनिया के सबसे बड़े ‘वाइड बॉडी’ विमान भी आसानी से उतर सकेंगे।

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