Allahabad High Court Live-in Relationship: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी मर्जी (सहमति) से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, तो इसे कानून की नजर में अपराध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एक बड़ी बात कही—
“अदालती फैसले कानून की किताबों से तय होते हैं, समाज की नैतिकता से नहीं।”
🚨 Allahabad High Court says a married man being in a live-in relationship is not a crime.
“Morality and law are separate. If no offence is made out, social views cannot guide courts in protecting citizens’ rights.” pic.twitter.com/DUppZSyf6z
— The News Drill™ (@thenewsdrill) March 27, 2026
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का है।
यहाँ नेत्रपाल नामक एक व्यक्ति और एक युवती लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। पेच यह था कि नेत्रपाल पहले से शादीशुदा था।
युवती के परिवार ने इस रिश्ते का कड़ा विरोध किया।
8 जनवरी, 2026 को युवती की मां ने जैतीपुर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि नेत्रपाल उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
अपनी जान को खतरा बताते हुए और एफआईआर को रद्द कराने की मांग लेकर यह कपल इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँचा।
उन्होंने अदालत को बताया कि वे दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, लेकिन परिवार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है।
Married Man In Consensual Live-In Relationship Isn’t A Crime: High Courthttps://t.co/p0iJy4u2Tx pic.twitter.com/F7izH7PY09
— NDTV (@ndtv) March 27, 2026
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश
सुनवाई के दौरान जब युवती की मां के वकील ने यह तर्क दिया कि पुरुष पहले से शादीशुदा है और दूसरी महिला के साथ रहना ‘अनैतिक’ और ‘अपराध’ है, तो कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि जब दो बालिग लोग आपसी सहमति से साथ रहने का फैसला करते हैं, तो इसमें किसी की गरिमा भंग होने या अपराध जैसी कोई बात नहीं है।
“कानून और नैतिकता दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी का आचरण समाज की नजर में अनैतिक हो सकता है, लेकिन अगर वह कानून का उल्लंघन नहीं कर रहा, तो उसे अपराधी नहीं ठहराया जा सकता।” – इलाहाबाद हाईकोर्ट
सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस की
कोर्ट ने इस मामले में ‘ऑनर किलिंग’ की आशंका को देखते हुए कपल की गिरफ्तारी पर तुरंत रोक लगा दी है।
साथ ही, शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को व्यक्तिगत रूप से यह निर्देश दिया है कि वह इस कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
कोर्ट ने साफ किया कि महिला के परिवार का कोई भी सदस्य उन्हें परेशान या शारीरिक चोट नहीं पहुँचाएगा।

यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ी नजीर है जो लिव-इन रिलेशनशिप को केवल सामाजिक चश्मे से देखते हैं।
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि संविधान द्वारा दी गई व्यक्तिगत आजादी सर्वोपरि है।
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