JNU Modi Shah Slogan: दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों में है।
सोमवार की आधी रात को कैंपस में उस समय भारी विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू हो गई, जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने न केवल अदालत के फैसले पर नाराजगी जताई, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे भी लगाए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक 35 सेकंड के वीडियो ने इस विवाद को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, 5 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए (UAPA) मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगले एक साल तक वे दोबारा जमानत के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।
इस फैसले की खबर जैसे ही कैंपस पहुंची, छात्रों का एक समूह सड़कों पर उतर आया।
वायरल वीडियो में छात्र “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे नारे लगाते सुने जा रहे हैं।
#BREAKING: 10 years after Pro-Terror Anti-India Slogans in JNU led to a Nationwide storm.
Fresh Anti-Modi/Shah Slogans inside JNU in presence of two senior JNUSU functionaries.
“Modi-Shah Ki Kabar Khudegi, JNU Ki Dharti Par”
No major action in 2016.
Will we see any action now? pic.twitter.com/eRrxZPWt7b— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 6, 2026
जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इन नारों का बचाव करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति पर निजी हमला नहीं था, बल्कि एक वैचारिक विरोध था।
उनके अनुसार, हर साल 5 जनवरी को छात्र 2020 में कैंपस में हुई हिंसा की याद में प्रदर्शन करते हैं।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा रहा है।
दिल्ली के JNU में छात्रों ने ‘मोदी शाह की कब्र खुदेगी’ नारे के साथ प्रदर्शन किया. यह विरोध 2020 के JNU हमले की छठी बरसी, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के खिलाफ किया गया. नारेबाजी को लेकर केंद्रीय मंत्री कपिल मिश्रा ने पलटवार किया है. देखिए उन्होंने क्या… pic.twitter.com/mpZMzuQnAJ
— TV9 Bharatvarsh (@TV9Bharatvarsh) January 6, 2026
भाजपा का तीखा हमला: ‘शहरी नक्सली’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’
इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि जिन लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने आतंकवाद के आरोपों में प्रथम दृष्टया दोषी माना है, उनके समर्थन में देश के शीर्ष नेताओं को जान से मारने की धमकी देना ‘शहरी नक्सलवाद’ का प्रमाण है।
उन्होंने इसे कांग्रेस और ‘टुकड़े-टुकड़े इकोसिस्टम’ की साजिश करार दिया।
वहीं, दिल्ली के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सवाल उठाया कि क्या अब इस देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान भी खत्म हो जाएगा?
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल अलगाववादी सोच को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी कड़े शब्दों में कहा कि विपक्ष ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों को संरक्षण दे रहा है, लेकिन देश की जनता इन्हें पहचान चुकी है।
VIDEO | Delhi: “Venting their frustration on PM Modi, Home Minister Amir Shah after Umar, Sharjeel were denied bail by Supreme Court,” says BJP leader Shahnawaz Hussain (@ShahnawazBJP) on slogans raised at JNU protest.#JNU
(Full video available on PTI Videos -… pic.twitter.com/xnjE5Uq01Z
— Press Trust of India (@PTI_News) January 6, 2026
VIDEO | Delhi: On controversial slogans being raised against PM Modi and Union Home Minister Amit Shah in JNU, Congress leader Sandeep Dikshit (@_SandeepDikshit) says, “Anybody has a right to protest against any court judgment. But I don’t think use of words like ‘kabr’ and all… pic.twitter.com/l3FDBuSFOa
— Press Trust of India (@PTI_News) January 6, 2026
कांग्रेस और विपक्ष का पक्ष
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता उदित राज ने इस प्रदर्शन को छात्रों की ‘स्वाभाविक नाराजगी’ बताया।
उन्होंने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ उनके धर्म के आधार पर अन्याय हो रहा है।
विपक्ष के कुछ नेताओं का मानना है कि जेएनयू जैसे संस्थानों में असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है।
हालांकि, इस तरह की नारेबाजी ने विपक्ष को भी रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है।

5 जनवरी 2020 की हिंसा
इस विरोध प्रदर्शन का एक सिरा 5 जनवरी 2020 को जेएनयू कैंपस में हुई भीषण हिंसा से भी जुड़ा है।
उस दिन नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में घुसकर लाठी-डंडों से छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था, जिसमें तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष सहित 28 लोग घायल हुए थे।
छात्र संगठनों का आरोप है कि पुलिस ने उस हिंसा के असली दोषियों को आज तक नहीं पकड़ा, जबकि दिल्ली दंगा मामले में छात्रों को जेल में सड़ाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
कानूनी मोर्चे पर बात करें तो उमर खालिद और शरजील इमाम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
उमर खालिद पिछले चार साल से जेल में हैं और यह उनकी छठी जमानत याचिका थी जो खारिज हुई।
दिल्ली दंगों में 53 लोगों की जान गई थी और 700 से अधिक केस दर्ज हुए थे।
अदालत ने सबूतों और गवाहों के आधार पर माना है कि इन आरोपियों की भूमिका दंगों की साजिश रचने में संदिग्ध है।
A purported video that has emerged of the protest shows slogans condemning Modi and Shah raised during the demonstration. The slogans were reportedly raised near Sabarmati Hostel between 9pm and 10pmhttps://t.co/rdC61YJDia pic.twitter.com/2zGxJEMAID
— The Telegraph (@ttindia) January 6, 2026
जेएनयू की इस घटना ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्रविरोधी नारेबाजी के बीच की धुंधली रेखा पर बहस छेड़ दी है।
जहां एक ओर छात्र इसे अपना लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इसे आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा मान रही हैं।
फिलहाल दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।


