HomeTrending Newsजस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा: क्या 'कैश कांड' ने छीनी कुर्सी! घर...

जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा: क्या ‘कैश कांड’ ने छीनी कुर्सी! घर में मिले थे 500 के जले हुए नोटों के बंडल

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने 10 अप्रैल, शुक्रवार को अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेज दिया है।

यह इस्तीफा महज एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, करोड़ों का कैश और संसद की महाभियोग प्रक्रिया की एक लंबी कहानी जुड़ी हुई है।

जस्टिस वर्मा पिछले काफी समय से विवादों के केंद्र में थे और उन पर लगे आरोपों ने पूरी न्यायपालिका को झकझोर कर रख दिया था।

क्या है ‘कैश कांड’?

मामला 14 मार्च 2025 का है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर अचानक आग लग गई थी।

जब दमकल विभाग और सुरक्षा एजेंसियां वहां पहुंचीं, तो उन्हें जो कुछ मिला उसने सबके होश उड़ा दिए।

जांच के दौरान घर के अंदर से 500-500 रुपये के नोटों के भारी भरकम बंडल बरामद हुए, जो आग में झुलस चुके थे।

इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद यह मामला ‘कैश कांड’ के रूप में मशहूर हो गया।

सवाल उठने लगे कि एक न्यायाधीश के घर पर इतनी बड़ी मात्रा में नकदी कहां से आई?

इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और मामला सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद तक पहुंच गया।

Justice Varma, Justice Varma impeachment, Justice Yashwant Varma, impeachment, Supreme Court, case scandal, Allahabad High Court,
Justice Varma impeachment

तबादला और न्यायिक कार्यों पर रोक

विवाद बढ़ता देख जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से हटाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।

उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई भी न्यायिक काम नहीं सौंपा गया।

न्यायपालिका की गरिमा को ध्यान में रखते हुए उन्हें बेंच से दूर रखा गया था।

प्रशासन का साफ निर्देश था कि जब तक उनके खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांच पूरी नहीं हो जाती, वे अदालती कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेंगे।

संसद में महाभियोग की तलवार

भ्रष्टाचार के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) चलाने की तैयारी शुरू हुई।

तीन हाईकोर्ट जजों की एक आंतरिक समिति ने अपनी जांच में जस्टिस वर्मा को दोषी पाया था और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी। इसके बाद मामला संसद पहुंचा।

नियमों के मुताबिक, लोकसभा में 146 सांसदों के समर्थन के साथ एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला ने मंजूरी दे दी। हालांकि, इस प्रक्रिया में एक तकनीकी पेंच फंस गया।

राज्यसभा में इसी तरह का प्रस्ताव खारिज हो गया था, लेकिन लोकसभा स्पीकर ने अकेले ही जांच समिति का गठन कर दिया।

Justice Yashwant Verma Resignation, Allahabad High Court Cash Scandal, Impeachment of Judge India, Justice Yashwant Varma Burning Notes, Indian Judiciary Corruption Case, Justice Yashwant Verma News Hindi, , जस्टिस यशवंत वर्मा इस्तीफा, कैश कांड इलाहाबाद हाईकोर्ट,

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई

जस्टिस वर्मा ने खुद को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लोकसभा की जांच समिति को चुनौती दी।

उनके वकील का तर्क था कि ‘जज जांच कानून 1968’ के तहत किसी जज को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों की संयुक्त सहमति से समिति बननी चाहिए, न कि अकेले लोकसभा अध्यक्ष द्वारा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी कीं।

कोर्ट ने माना कि प्रक्रिया में कुछ खामियां जरूर दिख रही हैं।

Corona Vaccine, Supreme Court Corona Vaccine, Corona Vaccine Side Effects, Supreme Court, Vaccine Compensation, No-Fault Compensation Policy, Covishield Side Effects, Vaccine Death Compensation, Supreme Court Verdict, कोरोना वैक्सीन मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पूछा कि जब राज्यसभा में प्रस्ताव गिर गया था, तो लोकसभा ने अकेले समिति कैसे बना दी?

कोर्ट ने संसद के कानूनी विशेषज्ञों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

हालांकि, कोर्ट ने जस्टिस वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय देने से मना कर दिया और फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कौन है जस्टिस यशवंत वर्मा 

  • जन्म: 6 जनवरी 1969
  • स्थान: इलाहाबाद, यूपी
  • शिक्षा: ग्रेजुएट (हंसराज कॉलेज), बी. कॉम ऑनर्स (दिल्ली विवि), LLB (रीवा विवि)

करियर

  • 8 अगस्त 1992 को वकालत शुरू की।
  • 2006 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्पेशल एडवोकेट।
  • 2012-2013 तक उत्तर प्रदेश के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल ।
  • अगस्त 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीनियर वकील ।
  • 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एडिशनल जज बने।
  • 1 फरवरी 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में परमानेंट जज बने।
  • 11 अक्टूबर 2021 को दिल्ली हाईकोर्ट में जज बने।

Justice Yashwant Verma Resignation, Allahabad High Court Cash Scandal, Impeachment of Judge India, Justice Yashwant Varma Burning Notes, Indian Judiciary Corruption Case, Justice Yashwant Verma News Hindi, , जस्टिस यशवंत वर्मा इस्तीफा, कैश कांड इलाहाबाद हाईकोर्ट,

इस्तीफा: दबाव या स्वेच्छा?

लगातार बढ़ते दबाव, न्यायिक कार्यों से दूरी और संसद की कड़ी कार्यवाही के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा ने आखिरकार पद छोड़ना ही बेहतर समझा।

जानकारों का मानना है कि महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए हटाए जाने की बदनामी से बचने के लिए उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया।

अब जब इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा जा चुका है, तो उनकी आधिकारिक सेवाएं समाप्त हो जाएंगी, लेकिन उनके खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की जांच पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है।

जस्टिस यशवंत वर्मा का यह मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक काले धब्बे की तरह देखा जा रहा है।

यह मामला याद दिलाता है कि कानून की कुर्सी पर बैठने वाले लोग भी कानून के दायरे से बाहर नहीं हैं।

#JusticeYashwantVerma #HighCourt #Judiciary #CorruptionCase #CashScandal #Impeachment #AllahabadHigh Court 

- Advertisement -spot_img