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लड़कों और न्यूट्रल जेंडर बच्चों को भी अपने हिसाब से बाल बढ़ाने की आजादी: बाल अधिकार आयोग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

School hair length rules Kerala: केरलम राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) ने राज्य के सभी स्कूलों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी छात्र को उसकी हेयरस्टाइल या बालों की लंबाई के आधार पर प्रताड़ित या प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।

आयोग ने स्पष्ट किया कि लड़कों और किसी विशिष्ट जेंडर (Gender Non-conforming / Transgender) से न बंधने वाले बच्चों को अपनी पसंद के अनुसार बाल रखने और कपड़े पहनने का पूरा अधिकार है।

स्कूली अनुशासन के नाम पर नहीं हो सकता भेदभाव

बाल अधिकार आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि स्कूल प्रशासन किसी भी बच्चे को केवल लंबे बाल रखने के कारण कक्षा से बाहर नहीं निकाल सकता और न ही उन पर कोई अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है।

अक्सर देखा जाता है कि कई स्कूलों में लड़कों के बाल लंबे होने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है या उन्हें ‘अपराधी’ जैसा महसूस कराया जाता है।

आयोग ने कहा कि स्कूलों की प्राथमिकता बच्चों का व्यक्तित्व विकास और उनकी पढ़ाई होनी चाहिए, न कि उनकी बाहरी शक्ल-सूरत पर पाबंदियां लगाना।

नई गाइडलाइन्स बनाने के निर्देश

आयोग के अनुसार, वर्तमान में राज्य शिक्षा विभाग और सीबीएसई (CBSE) की ओर से छात्रों के बालों की लंबाई या पर्सनल स्टाइल को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं।

इसलिए, शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह इस विषय पर जल्द से जल्द एक निष्पक्ष और समावेशी (Inclusive) गाइडलाइन तैयार करे।

आयोग ने यह भी अनिवार्य किया है कि कोई भी नियम लागू करने से पहले खुद बच्चों की राय और उनकी बात को भी सुना जाना चाहिए।

इस आदेश पर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 45 दिनों के भीतर आयोग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

दो अलग-अलग याचिकाओं पर आया फैसला

यह ऐतिहासिक आदेश दो याचिकाओं की सुनवाई के बाद जारी हुआ:

* पहली याचिका:

कोझिकोड के रामनाट्टुकरा निवासी इंदु मेनन द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कई स्कूल जेंडर-न्यूट्रल होने का दावा तो करते हैं, लेकिन लंबे बाल रखने वाले लड़कों और ट्रांसजेंडर बच्चों के साथ भेदभाव करते हैं और उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है।

 * दूसरी याचिका:

कोट्टक्कल के एक प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल की ओर से आई थी।

उन्होंने एक 11वीं कक्षा के छात्र का हवाला दिया था, जो बार-बार कहने के बावजूद बाल काटने से मना कर रहा था।

प्रिंसिपल ने आयोग से स्पष्ट गाइडलाइन मांगी थी कि ऐसे मामलों में स्कूल को क्या कदम उठाने चाहिए।

इस फैसले के बाद, केरलम के स्कूलों में बच्चों को अपनी पसंद और व्यक्तित्व के अनुसार रहने का एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलेगा।

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