Khandwa Animal Fat Factory: हम जो आइसक्रीम बड़े चाव से खाते हैं या ढाबों पर खाने का आनंद लेते हैं, क्या वह सुरक्षित है?
खंडवा से आई एक खबर ने इस पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
यहां के इमलीपुरा इलाके में एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी गई है, जहां मवेशियों को काटकर उनकी चर्बी से ‘नकली घी’ बनाया जा रहा था।
पुलिस ने मुख्य आरोपी अनवर कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया है और अब उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

क्या था पूरा मामला?
खंडवा के घनी आबादी वाले इलाके में लंबे समय से यह अवैध कारोबार चल रहा था।
जब पुलिस ने यहां छापा मारा, तो नजारा खौफनाक था।
मौके से भारी मात्रा में जानवरों के अवशेष, खालें और ड्रमों में भरी हुई चर्बी बरामद हुई।
जांच में पता चला कि यह चर्बी सिर्फ कपड़ों के कारखानों में ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की चीजों में भी सप्लाई की जा रही थी।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस धंधे में आरोपी के तीन भाई, जो पेशे से वकील हैं, उसकी ढाल बने हुए थे।
जब सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर और पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो इन वकील भाइयों ने न केवल कार्रवाई रोकने के लिए फर्जी दस्तावेज दिखाए, बल्कि मजिस्ट्रेट को ‘फीस’ (रिश्वत) देने का लालच भी दिया।
हालांकि, प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और फैक्ट्री को सील कर दिया।

हमारी थाली तक कैसे पहुंच रहा था जहर?
पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जानवरों की इस चर्बी को रिफाइन करके घी जैसा बनाया जाता था।
इसे बुरहानपुर के कपड़ा मिलों के अलावा स्थानीय ढाबों, होटलों और यहाँ तक कि आइसक्रीम फैक्ट्रियों में भी भेजा जा रहा था।
आइसक्रीम में चिकनाहट लाने और घी की जगह लागत कम करने के लिए इस जानलेवा चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा था।

138 मवेशियों की हत्या का अनुमान
स्वास्थ्य विभाग और खाद्य विभाग की टीम ने जब मौके पर जांच की, तो वहां से 3,350 लीटर चर्बी मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक जानवर से औसतन 10 किलो चर्बी निकलती है।
इस हिसाब से करीब 138 मवेशियों को यहां काटा गया था।
यही नहीं, जानवरों की खाल को गलाने के लिए सरकारी राशन की दुकान वाले नमक का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो अपने आप में एक और बड़ा घोटाला है।

सिस्टम की मिलीभगत आई सामने
जांच में यह भी पता चला कि स्थानीय नगर निगम और पुलिस कर्मियों को इस फैक्ट्री की जानकारी पहले से थी।
जब भी कोई शिकायत होती थी, टीम आती थी और खानापूर्ति के तौर पर फिनायल छिड़ककर चली जाती थी।
साल 2017 में भी यहां से भारी मात्रा में खाल बरामद हुई थी, लेकिन सांठगांठ के चलते एक साल बाद ही यह धंधा फिर शुरू हो गया।
इस घटना ने मिलावटखोरी के बड़े सिंडिकेट को उजागर किया है।

नकली घी बनाने के अलग-अलग तरीके
- पाम ऑयल : चिकनाहट और पीला रंग होने के कारण सबसे ज्यादा मिलाया जाता है।
- यूरिया मिलाकर : यूरिया, वेजिटेबल तेल, पाम ऑयल, बटर एसेंस मिलाकर बनाते हैं।
- आलू : उबले आलू के पेस्ट में वेजिटेबल तेल मिलाते हैं। खुशबू के लिए एसेंस मिलाते हैं।
- मैदा : पाम ऑयल, वेजिटेबल तेल को मिलाने के बाद गाढ़ा करने के लिए मैदा मिलाते है।
- पाउडर : घी का वजन बढ़ाने के लिए मिल्क पाउडर की मिक्सिंग की जाती है।
घी असली है या नकली ऐसे पता लगाएं
- पैन में 1 बड़ा चम्मच घी डालकर गर्म करें
- घी पिघलते हुए ‘अपना रंग बदलने लगेगा
- घी का रंग ज्यादा गर्म होने पर गहरा भूरा हो जाए तो घी शुद्ध है
- अगर घी पिघलने में टाइम ले और फिर हल्का पीला दिखे तो घी मिलावटी है
- फ्रिज में न रखा जाए तो देसी घी जमकर सख्त नहीं होता
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