Homeन्यूजलेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने देश के 31वें सेना प्रमुख: 40 साल...

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ बने देश के 31वें सेना प्रमुख: 40 साल का अनुभव और जांबाजी की अनोखी कहानी

और पढ़ें

Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Dhiraj Seth New Indian Army Chief: भारतीय सेना के नेतृत्व में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।

केंद्र सरकार ने शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला सेना प्रमुख (Chief of Army Staff) नियुक्त किया है।

धीरज सेठ वर्तमान में उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिन्हें अब प्रमोट करके सेना की सबसे बड़ी कमान सौंपी जा रही है।

वह आगामी 30 जून को देश के 31वें आर्मी चीफ के रूप में अपना पद संभालेंगे।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी की लेंगे जगह

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे।

जनरल द्विवेदी का कार्यकाल इस महीने की आखिरी तारीख यानी 30 जून को समाप्त हो रहा है।

उन्होंने ठीक दो साल पहले, 30 जून 2024 को सेना प्रमुख का पद संभाला था।

आपको बता दें कि भारतीय सेना में नियम के मुताबिक, आर्मी चीफ का कार्यकाल अधिकतम 3 साल का होता है या फिर 62 वर्ष की उम्र तक (दोनों में से जो भी पहले पूरा हो) रहता है।

40 साल का बेदाग और शानदार सफर

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर बेहद गौरवशाली रहा है।

उन्हें देश की रक्षा करते हुए करीब 40 वर्षों का लंबा और गहरा अनुभव है।

उन्होंने दिसंबर 1986 में सेना की प्रतिष्ठित ‘आर्मर्ड कोर’ (टैंक रेजिमेंट) में कमीशन प्राप्त किया था। उनकी रेजिमेंट ‘सेकेंड लांसर्स’ है।

अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील इलाकों जैसे- तपते हुए रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर के बर्फीले रास्तों और पश्चिमी सीमाओं पर मोर्चे का नेतृत्व किया है।

वे सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे पर दो महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों की अगुवाई की है।

इसके अलावा, धीरज सेठ ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के शांति मिशन के तहत अंगोला में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

वे सेना मुख्यालय में क्षमता विकास (Capacity Building) जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।

कमान और गौरवशाली विरासत

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ सेना के एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका देश सेवा का पुराना इतिहास है।

उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भी सेना में पूर्व एडजुटेंट जनरल के उच्च पद पर रह चुके हैं।

धीरज सेठ ने सेना की कई महत्वपूर्ण कमानों को संभाला है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • दक्षिणी कमान और दक्षिण-पश्चिमी कमान: दोनों के जीओसी-इन-सी (GOC-in-C) रह चुके हैं।
  • XXI स्ट्राइक कोर: बतौर कमांडर नेतृत्व किया।
  • दिल्ली एरिया: बतौर जीओसी (GOC) जिम्मेदारी संभाली।

पढ़ाई में हमेशा रहे अव्वल और मिले बड़े सम्मान

धीरज सेठ की शिक्षा नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से हुई है।

वे पढ़ाई और ट्रेनिंग के दौरान भी हमेशा अव्वल रहे।

उन्होंने ‘जूनियर कमांड कोर्स’ में पहली रैंक हासिल की थी, जबकि डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (DSSC) वेलिंगटन में उन्हें ‘बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर’ का मेडल मिला था।

इसके अलावा उन्होंने नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी उच्च शिक्षा ली है।

उनकी इसी बेमिसाल और शानदार सेवा के लिए राष्ट्रपति द्वारा उन्हें देश के प्रतिष्ठित सैन्य पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें शामिल हैं:

  •  परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM)
  •  उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM)
  •  अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का नया आर्मी चीफ बनना भारतीय सेना के आधुनिकरण और सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद मजबूत कदम माना जा रहा है।

- Advertisement -spot_img