Mohan Yadav Cabinet Reshuffle: मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा मोहन यादव कैबिनेट के आगामी विस्तार को लेकर है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कर दिया है कि मंत्रियों के कामकाज की लगातार समीक्षा की जा रही है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जो फीडबैक मिल रहा है, उसी के आधार पर मंत्रियों की लिस्ट दोबारा तैयार होगी।
अंतिम फैसला दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व और संगठन के साथ मिलकर किया जाएगा।
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस फेरबदल में 5 से 6 मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि 7 से 8 नए चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है।

मध्य प्रदेश में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, और वर्तमान में मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम (जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला) को मिलाकर कुल 31 सदस्य हैं।
यानी अभी भी 4 पद सीधे तौर पर खाली हैं, जिन्हें भरा जाना है।
युवाओं और महिलाओं पर फोकस
बीजेपी इस फेरबदल के जरिए कई तरह के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधना चाहती है:
बुंदेलखंड की नाराजगी दूर करना: सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ जैसे जिलों से नए नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में प्रतिनिधित्व कम होने से थोड़ी नाराजगी है।
महिला वोट बैंक: आधी आबादी को साधने के लिए रीति पाठक, अर्चना चिटनीस या मालिनी गौड़ जैसी सीनियर महिला नेताओं को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
2028 और निकाय चुनाव की तैयारी: अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनावों और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ओबीसी (OBC) वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने पर पार्टी का पूरा ध्यान है।
सिंधिया और मूल बीजेपी में तालमेल: ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए नेताओं और बीजेपी के पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखना मुख्यमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इन मंत्रियों पर गिर सकती है गाज (विवाद और खराब परफॉर्मेंस)
समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है:
1. विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद वे सुप्रीम कोर्ट और संगठन दोनों के निशाने पर आए। उनके बयानों से पार्टी कई बार असहज हुई है।

2. दिलीप अहिरवार: पहली बार मंत्री बने अहिरवार का कामकाज कसौटी पर खरा नहीं उतरा है।
3. प्रतिमा बागरी: जाति प्रमाण पत्र विवाद और भाई की गिरफ्तारी की वजह से उनका ग्राफ गिरा है।
4. राधा सिंह: पहली बार की विधायक राधा सिंह के विभाग का प्रदर्शन हालिया समीक्षा में काफी कमजोर पाया गया है।
5. एदल सिंह कंषाना: रेत खनन पर विवादित बयानों के अलावा, उनके स्टाफ पर ट्रांसफर के बदले रिश्वत मांगने के स्टिंग ऑपरेशन ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय के विभागों में बदलाव संभव
सीनियर मंत्रियों में प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट के विभागों में बड़े फेरबदल की संभावना है।
प्रहलाद पटेल को उनके लंबे अनुभव के आधार पर कुछ और महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
वहीं, कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका को लेकर भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहन यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे उन कद्दावर नेताओं के साथ तालमेल बिठाना और सरकार चलाना है, जो कद और अनुभव में उनसे काफी वरिष्ठ हैं।
यह फेरबदल इसी ‘पॉलिटिकल कंपल्शन’ (राजनीतिक मजबूरी) और भविष्य की तैयारियों को संतुलित करने की एक सोची-समझी कवायद है।
