Monsoon Break 2026: देश के एक बहुत बड़े हिस्से में इस समय मानसून की रफ्तार थम गई है।
सावन का महीना करीब होने के बावजूद उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के लोगों को झमाझम बारिश का इंतजार है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, देश में ‘मानसून ब्रेक’ जैसी स्थिति बन गई है। पिछले 11 सालों में यह तीसरी बार है (साल 2015 और 2021 के बाद) जब मानसून इस तरह से बीच सीजन में सुस्त पड़ा है।
मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अगले 6 से 7 दिनों तक देश के मध्य, पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों में तेज बारिश के आसार बहुत कम हैं।
हालांकि, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत (बिहार, असम, बंगाल) में भारी बारिश का दौर जारी रहेगा।
क्या होता है ‘मानसून ब्रेक’ और इस बार ऐसा क्यों हुआ?
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर अच्छी-भली बारिश होते-होते अचानक बादलों ने बरसना क्यों बंद कर दिया?
आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।
सवाल 1: मानसून ब्रेक (Monsoon Break) क्या है?
जवाब: जब मानसून के सीजन में लगातार 5 से 10 दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधि सामान्य से काफी कम हो जाती है, तो इसे ‘मानसून ब्रेक’ कहा जाता है।
इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मानसून खत्म हो गया है, बल्कि यह बारिश के दौर में आया एक छोटा सा विराम (पॉज) है।
इस दौरान मध्य और दक्षिण भारत में सूखा जैसी स्थिति दिखने लगती है, जबकि पूर्वोत्तर भारत और हिमालय के तराई वाले इलाकों में भारी बारिश होती है।
सवाल 2: इस बार मानसून ब्रेक क्यों लगा?
मौसम वैज्ञानिकों ने इसके पीछे 4 मुख्य कारण बताए हैं:
* रास्ता भटक गया मानसून: बारिश कराने वाली मानसूनी हवाओं की मुख्य पट्टी (ट्रफ लाइन) अपनी सामान्य जगह से खिसककर उत्तर की तरफ हिमालय की तलहटी में चली गई है।
यही वजह है कि पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो रही है, जबकि मैदानी इलाके सूखे हैं।
* अरब सागर से नहीं मिली नमी: आमतौर पर अरब सागर से उठने वाली नम हवाएं मध्य और पश्चिमी भारत में पानी बरसाती हैं। इस बार ये हवाएं काफी कमजोर पड़ गई हैं, जिससे बादलों को बरसने के लिए पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है।
* बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का पूर्व में रुकना: बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) इस बार आगे बढ़ने के बजाय बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की तरफ ही सिमट कर रह गए। इस कारण इनका फायदा मध्य भारत को नहीं मिला।
* कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): उत्तर-पश्चिम भारत में जुलाई के महीने में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुए। इसके बिना राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में बारिश को बढ़ावा देने वाला सपोर्ट सिस्टम नहीं बन पाया।
राज्यों का हाल: यूपी-एमपी में बारिश का आंकड़ा गिरा
इस मानसून ब्रेक का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पर पड़ा है।
उत्तर प्रदेश: कोटे से 19% कम बारिश
यूपी में बारिश की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। 1 जून से 13 जुलाई के बीच राज्य में केवल 161.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 199.7 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी यूपी में अब तक सामान्य से 19% कम पानी बरसा है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।
मध्य प्रदेश: पहली बार माइनस में पहुंचा ग्राफ
मध्य प्रदेश में जुलाई के महीने में पहली बार बारिश का ग्राफ सामान्य से नीचे चला गया है। राज्य में अब तक 241.8 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश (250.1 मिमी) से 3% कम है।
* पूर्वी और पश्चिमी एमपी का हाल: प्रदेश के पूर्वी हिस्से (जबलपुर, शहडोल, सागर, रीवा) में सामान्य से 17% कम और पश्चिमी हिस्से (भोपाल, इंदौर, उज्जैन) में 10% कम बारिश दर्ज की गई है।
* जिलों की स्थिति: देवास जिला सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां अब तक 18 इंच बारिश हो चुकी है। इंदौर और सीहोर में 14 इंच तथा भोपाल में 13.1 इंच बारिश दर्ज की गई है।
वहीं, आलीराजपुर जिले की हालत सबसे खराब है, जहां सामान्य से 74% कम यानी केवल सवा दो इंच बारिश ही हुई है।
चिपचिपी गर्मी ने किया परेशान, क्या है यह ‘हीट इंडेक्स’?
बारिश न होने और हवा में नमी (Humidity) बढ़ने के कारण देश के कई शहरों में भीषण उमस वाली गर्मी पड़ रही है। इस स्थिति को ‘हीट इंडेक्स’ या ‘फील लाइक टेम्परेचर’ के जरिए समझा जाता है।
हीट इंडेक्स क्या है?
जब हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है, तो हमारे शरीर से निकलने वाला पसीना आसानी से नहीं सूखता।
पसीना न सूखने के कारण शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता और हमें वास्तविक तापमान से कहीं ज्यादा गर्मी महसूस होती है। इसे ही ‘हीट इंडेक्स’ कहते हैं।
* भुवनेश्वर: यहाँ वास्तविक तापमान 36°C है, लेकिन 63% नमी के कारण लोगों को 49°C जैसी झुलसाने वाली गर्मी महसूस हो रही है।
* मुंबई: यहाँ तापमान केवल 32°C है, पर 70% उमस के कारण यह 40°C जैसा अहसास करा रहा है।
* दिल्ली और श्रीगंगानगर: यहाँ भी हीट इंडेक्स 45 से 46°C के आसपास बना हुआ है। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तो पारा 41.5°C तक दर्ज किया गया।
पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ से हाहाकार
एक तरफ जहां देश का मध्य हिस्सा सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है, वहीं पूर्वोत्तर (North-East) राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा रखी है।
असम, मेघालय, सिक्किम, अरुणाचल और बिहार के कई इलाकों में लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की खबरें आ रही हैं।
* अरुणाचल प्रदेश: भारत-चीन सीमा (LAC) के पास कुमे नदी में आई बाढ़ के बाद टापा बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात ITBP के 15 जवानों से संपर्क टूट गया है।
* असम: असम के टियोक में पुथी नदी का तटबंध टूटने से दर्जनों गांव और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।
खेती पर संकट: खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर
दोलत कैपिटल की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के प्रभाव और अगले दो हफ्तों तक मानसून के कमजोर रहने की आशंका से खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है।
* तिलहन और कपास पर खतरा: विशेष रूप से राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तरी कर्नाटक में कम बारिश के चलते सोयाबीन, मूंगफली, तिलहन और कपास की बुवाई पर काफी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि धान (चावल) की बुवाई अब तक सामान्य से बेहतर रही है। किसानों को उम्मीद है कि बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया सिस्टम जल्द ही सक्रिय होगा और मध्य भारत को राहत देगा।
आज कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन हल्की बूंदाबांदी का दौर जारी रहेगा।
* हल्की बारिश वाले जिले: सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
* तेज धूप और उमस वाले जिले: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, गुना, बैतूल, और नर्मदापुरम सहित बाकी जिलों में तेज धूप खिलेगी और उमस परेशान करेगी।
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