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मुरैना रेल हादसा: एक झूठी अफवाह और बिखर गईं खुशियां, पोटली में समेटने पड़े शवों के टुकड़े

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Morena Train Accident: मध्य प्रदेश के मुरैना में एक बेहद ही दर्दनाक और दिल दहला देने वाला रेल हादसा हुआ है।

रविवार की शाम खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 19665) में सफर कर रहे यात्रियों के लिए काल बनकर आई।

ट्रेन में अचानक किसी ने अफवाह फैला दी कि एक मोबाइल में ब्लास्ट हो गया है और बोगी में आग लग गई है।

इस एक झूठी अफवाह ने देखते ही देखते चार मासूम जिंदगियों को लील लिया।

डर और घबराहट के मारे लोग अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन से नीचे कूदने लगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि बाहर मौत उनका इंतजार कर रही है।

500 मीटर तक बिखर गए शवों के टुकड़े

यह दर्दनाक वाकया रविवार शाम करीब 4:15 बजे हेतमपुर और धौलपुर स्टेशनों के बीच हुआ।

जैसे ही आग की अफवाह फैली, किसी यात्री ने घबराहट में ट्रेन की आपातकालीन जंजीर (चेन पुलिंग) खींच दी।

ट्रेन के रुकते ही बोगी के अंदर भगदड़ मच गई। लोग बदहवास होकर नीचे रेलवे ट्रैक पर कूद गए।

इसी दौरान दूसरे ट्रैक पर सामने से आ रही एक तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में चार यात्री आ गए।

टक्कर इतनी भयानक थी कि मृतकों के शरीर के चीथड़े करीब 500 मीटर के दायरे में बिखर गए।

मंजर इतना खौफनाक था कि बाद में पुलिस और प्रशासन को शवों के हिस्सों को पोस्टमॉर्टम के लिए बकायदा पोटली में समेटकर ले जाना पड़ा।

मृतकों में मां-बेटा भी शामिल

इस हादसे में जान गंवाने वाले चारों लोग अलग-अलग परिवारों के थे, जिनकी खुशियां इस लापरवाही और अफवाह ने छीन लीं।

मृतकों की पहचान राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली बिरमा देवी (60 वर्ष), उत्तर प्रदेश के आगरा (रुनकता) की शकुंतला सिंह (60 वर्ष), आगरा के ही सुल्तानगंज की रहने वाली आफरीन (35 वर्ष) और उनके महज 4 साल के मासूम बेटे असद के रूप में हुई है।

बिरमा देवी के साथ सफर कर रहे उनके रिश्तेदार गणेश ने रोते हुए बताया कि वे लोग बागेश्वर धाम के दर्शन करके बेहद खुश थे और जयपुर लौट रहे थे।

लेकिन ट्रेन में अचानक मची भगदड़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।

किसान की सूझबूझ से पहुंची पुलिस

हादसे के वक्त पास के ही जंगल में लकड़ी बीनने गए एक स्थानीय किसान ने सबसे पहले इस घटना को देखा।उसने तुरंत तत्परता दिखाते हुए पुलिस को फोन किया।

गनीमत यह थी कि उस समय सराय छोला और सिविल लाइन थाने की पुलिस पास में ही रेत के अवैध डंपिंग के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी।

सूचना मिलते ही पुलिस बल बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने तुरंत रेलवे के आला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया।

सूचना मिलते ही मुरैना के एसपी धर्मराज मीणा और कलेक्टर योगेश कुमार जांगिड़ भी दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए रात में ही चारों शवों का पोस्टमॉर्टम कराया और उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया।

एसपी मीणा ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और कहा कि प्रशासन संकट की इस घड़ी में उनके साथ है और हर संभव मदद की जाएगी।

6 सदस्यीय हाईलेवल कमेटी करेगी जांच

झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) मनोज कुमार सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि रेल प्रशासन ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है।

हादसे की उच्चस्तरीय जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

यह कमेटी घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करेगी, प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे स्टाफ के बयान दर्ज करेगी और अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

इस रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही रेलवे ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है।

आरपीएफ थाना प्रभारी अमित चौधरी ने बताया कि मुरैना से ट्रेन आगे बढ़ने के बाद सिकरौदा, घेर और हेतमपुर जैसे छोटे स्टेशनों के बीच अक्सर चेन पुलिंग की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

जांच टीम के सामने ये 9 बड़े सवाल:

1. ट्रेन के भीतर आग लगने या मोबाइल फटने की झूठी अफवाह किसने और क्यों फैलाई?

2. आपातकालीन जंजीर (चेन पुलिंग) किसने और किस वजह से खींची?

3. क्या अफवाह फैलाने वाले और चेन खींचने वाले व्यक्ति का आपस में कोई संबंध है?

4. क्या किसी बाहरी या स्थानीय व्यक्ति ने जानबूझकर ट्रेन को रोकने की साजिश रची थी?

5. यात्री अचानक ट्रेन से उतरकर दूसरे चालू ट्रैक पर कैसे और किन परिस्थितियों में पहुंचे?

6. क्या रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रोटोकॉल में कोई बड़ी चूक हुई है?

7. सामने वाले ट्रैक से आ रही ट्रेन की सूचना और उसके सुरक्षा प्रबंधन में कहां कमी रह गई?

8. यात्रियों, मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और ऑन-ड्यूटी रेलवे कर्मचारियों के बयानों में क्या निकलकर आता है?

9. सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से क्या सुराग मिलते हैं?

इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया या आम जिंदगी में बिना सोचे-समझे फैलाई गई एक छोटी सी अफवाह कितनी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है।

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