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19 जून को जिनेवा में महाडील: अमेरिका और ईरान के बीच थमेगी जंग, खुल रहा दुनिया की लाइफलाइन ‘होर्मुज रूट’

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

US Iran Peace Deal: पिछले कई दशकों से एक-दूसरे के जानी-दुश्मन रहे अमेरिका और ईरान आखिरकार जंग का रास्ता छोड़कर शांति समझौते पर राजी हो गए हैं।

दोनों देशों ने कई महीनों की बेहद गुप्त और मुश्किल बातचीत के बाद एक साझा समझौते (MoU) का मसौदा तैयार कर लिया है।

इस ऐतिहासिक समझौते की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर की है।

ट्रंप ने लिखा कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है।

वहीं ईरान ने भी माना है कि लंबी बातचीत के बाद दोनों देश इस समझौते पर पहुंचे हैं।

19 जून को जिनेवा में जुटेंगे दिग्गज

इस समझौते की सबसे पहली और आधिकारिक घोषणा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की।

उन्होंने बताया कि आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में दोनों देशों के बड़े नेता इस पीस डील पर अंतिम दस्तखत (हस्ताक्षर) करेंगे।

आपको बता दें कि पिछले 47 सालों में यह पहला मौका होगा जब वॉशिंगटन (अमेरिका) और तेहरान (ईरान) के बीच इतने ऊंचे स्तर की कोई सीधी बैठक होने जा रही है।

ट्रंप का आदेश- ‘जहाजों इंजन चालू करो, तेल बहने दो’

इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) को फिर से जहाजों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा।

यह समुद्र का वह रास्ता है जहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चा तेल गुजरता है।

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की जो घेराबंदी (Naval Blockade) कर रखी थी, ट्रंप ने उसे तुरंत हटाने का हुक्म दे दिया है।

ट्रंप ने लिखा—”दुनिया के जहाजो, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।”

इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें गिर सकती हैं और पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है।

ईरान की 3 कड़ी शर्तें

भले ही दोनों देश राजी हो गए हैं, लेकिन ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ कर दिया है कि 19 जून को दस्तखत होने के बाद अगले 60 दिनों की बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब अमेरिका अपने तीन बड़े वादे पहले निभाएगा। ये तीन शर्तें हैं:

1. ईरान के समुद्री रास्तों से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तुरंत हटे।

 2. युद्ध और सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह रोका जाए।

 3. अमेरिका द्वारा फ्रीज (जब्त) किए गए ईरान के अरबों डॉलर तुरंत छोड़े जाएं।

समझौते (MoU) में क्या-क्या है?

दोनों देशों के बीच जो समझौता हुआ है, उसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  1. तुरंत सीजफायर: ईरान, लेबनान और मध्य-पूर्व के बाकी सभी मोर्चों पर चल रही जंग को तुरंत रोक दिया जाएगा।
  2. सुरक्षा की गारंटी: अमेरिका और इजराइल इस बात की लिखित गारंटी देंगे कि वे भविष्य में ईरान पर कोई नया हमला या युद्ध शुरू नहीं करेंगे।
  3. इजराइल की तरफ से वादा: अमेरिका खुद आगे बढ़कर इजराइल की तरफ से सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा।
  4. नाकेबंदी का खात्मा: होर्मुज के समुद्री रास्ते से अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी पूरी तरह हटा ली जाएगी।
  5. व्यापार को हरी झंडी: ईरानी जहाजों और उनके समुद्री बिजनेस पर जितने भी प्रतिबंध लगे थे, वे सब खत्म होंगे।
  6. 30 दिन की मोहलत: अगले 30 दिनों के भीतर समुद्री व्यापार को पूरी तरह से पहले जैसा नॉर्मल कर दिया जाएगा।
  7. होर्मुज स्ट्रेट चालू: दुनिया की सबसे व्यस्त ऑयल सप्लाई लाइन यानी होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल दिया जाएगा।
  8. फ्रीज्ड फंड की वापसी: अमेरिका ने ईरान का जो अरबों डॉलर का फंड ब्लॉक कर रखा है, उसे जारी किया जाएगा।
  9. पहले चरण में आधा पैसा: समझौते पर दस्तखत होते ही इस जब्त पैसे का आधा हिस्सा तुरंत ईरान को मिल जाएगा।
  10. प्रतिबंध हटाने पर चर्चा: ईरान पर लगे सभी तरह के (प्राइमरी और सेकेंडरी) आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने का प्रोसेस शुरू होगा।
  11. सेना की वापसी: अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना की संख्या को कम करेगा।
  12. परमाणु हथियार पर रोक: ईरान फिर से दुनिया के सामने कसम खाएगा कि वह परमाणु बम नहीं बनाएगा। हालांकि, 60% एनरिच्ड यूरेनियम के मुद्दे पर आगे बात होगी।
  13. 60 दिनों का फाइनल राउंड: दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक आखिरी दौर की बातचीत चलेगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और युद्ध के बाद तबाही को ठीक करने (पुनर्निर्माण) पर पक्का फैसला होगा।

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ईरान को मिलेंगे 12 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये)

ईरान की सरकारी मीडिया ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, इस 14 पॉइंट के मसौदे के तहत अमेरिका बातचीत की शुरुआत करने के बदले में ही ईरान की जब्त संपत्तियों में से 12 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) की रकम तुरंत रिलीज कर देगा।

पूरे 60 दिनों की बातचीत के दौरान कुल 24 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति छोड़ी जानी है, जिसकी आधी किस्त ईरान को तुरंत मिल जाएगी।

पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स

1. शहबाज शरीफ का पहला ऐलान: पाकिस्तान के पीएम ने सबसे पहले दुनिया को बताया कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर हमेशा के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बन गई है।

2. ट्रंप ने इजराइल को टोका: डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हुए इजराइली हमले की खुलकर निंदा की। उन्होंने कहा कि जब शांति इतनी करीब है, तब ऐसा हमला नहीं होना चाहिए था।

3. हमले की वजह से टली डील: ट्रंप के मुताबिक, इजराइल के इन हमलों की वजह से ही ईरान के साथ होने वाली यह पीस डील कुछ घंटों के लिए लेट हुई।

4. भारतीय क्रू सुरक्षित: ओमान के समुद्र में फंसे भारतीय जहाज ‘MSV विराट-1’ के सभी 14 भारतीय क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया गया है। मस्कट में भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की है।

5. ईरान के अंदर ही विरोध: इस समझौते से ईरान के कट्टरपंथी और रूढ़िवादी नेता भड़क गए हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के सामने झुकना गलत है, इससे युद्ध में जो बढ़त मिली थी, वो खत्म हो जाएगी।

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समझिए क्या था 2015 का परमाणु विवाद?

इस पूरी जंग की जड़ को समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा:

2015 की डील: साल 2015 में ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका और ईरान के बीच एक न्यूक्लियर डील हुई थी।

इसमें ईरान इस बात पर राजी हुआ था कि वह अपने यूरेनियम को केवल 3.67% तक ही साफ (Enrich) करेगा, जिससे सिर्फ बिजली बनाई जा सके (परमाणु बम बनाने के लिए 90% से ज्यादा शुद्ध यूरेनियम चाहिए होता है)।

ट्रंप का यू-टर्न (2018): साल 2018 में जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार राष्ट्रपति थे, तो उन्होंने अमेरिका को इस डील से बाहर निकाल लिया और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए।

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ईरान का पलटवार: अमेरिका के कदम के बाद ईरान भड़क गया और उसने यूरेनियम को ज्यादा साफ करना शुरू कर दिया।

जून 2025 तक ईरान 60% शुद्धता तक पहुंच चुका था और उसके पास 400 किलो ऐसा यूरेनियम जमा हो गया था, जो बम बनाने के बेहद करीब था।

अब जब ट्रंप दोबारा सत्ता में हैं, तो वे इस पुरानी गलती को सुधारते हुए और दुनिया को महायुद्ध से बचाते हुए एक नया इतिहास लिखने जा रहे हैं। 19 जून की तारीख पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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