India EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच पिछले 18 वर्षों से चली आ रही खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है।
27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत-EU समिट में एक ऐसे समझौते पर मुहर लगी है जिसे दुनिया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है।
यह महज एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य को बदलने वाला एक ऐतिहासिक मोड़ है।

क्यों है यह ‘Mother of All Deals’?
यह समझौता सिर्फ सामान बेचने और खरीदने तक सीमित नहीं है।
इसमें ग्रीन एनर्जी, डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की तकनीक का सामूहिक लक्ष्य है।
एक तरफ यूरोप की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी है और दूसरी तरफ भारत का विशाल मिडिल क्लास मार्केट।
इन दोनों का मिलन वैश्विक अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देगा। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में कहें तो, “यह साझेदारी अब समाज की साझेदारी बन चुकी है।”
यह एग्रीमेंट 2027 तक पूरी तरह जमीन पर लागू हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय बाजारों और सड़कों पर इसका असर साफ दिखने लगेगा।
‘Mother Of All Deals’ ~ Congratulations Europe 🇪🇺, you got the Most powerful Economy of the world –
‘BHARAT THAT IS INDIA’ 🇮🇳 🔥
Where’s the Dead Economy Gang ~ Rahul Gandhi and Trump? 😅#IndiaEUTradeDeal pic.twitter.com/wNFHgxKlsU
— Deepak Kumar Nanda🇮🇳 (@DipuNanda) January 27, 2026
लग्जरी कारों के शौकीनों के लिए खुशखबरी
इस डील का सबसे चर्चित हिस्सा है विदेशी कारों पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty)।
अब तक अगर आप यूरोप से बनी हुई (CBU) मर्सिडीज, BMW या ऑडी भारत मंगवाते थे, तो उस पर 110% तक का भारी-भरकम टैक्स देना पड़ता था।
यानी कार की कीमत भारत आते-आते दोगुनी से ज्यादा हो जाती थी।
अब क्या बदलेगा?
- सरकार ने इस टैक्स को 110% से घटाकर सीधे 10% करने का फैसला किया है।
- यह नियम उन कारों पर लागू होगा जिनकी कीमत 15,000 यूरो (लगभग 13-14 लाख रुपये) से अधिक है।
- हालांकि, सरकार ने चालाकी से घरेलू कंपनियों (जैसे टाटा और महिंद्रा) के हितों की रक्षा भी की है। इसके लिए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों का कोटा तय किया गया है।
- इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ (EVs): इन्हें अगले 5 साल तक इस छूट से बाहर रखा गया है ताकि भारत का अपना EV बाजार मजबूत हो सके।
भारतीय कपड़ा, दवा और चमड़ा उद्योग की ‘लॉटरी’
भारत के लिए यह डील इसलिए अहम है क्योंकि यूरोप दुनिया के सबसे अमीर बाजारों में से एक है।
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जीरो टैक्स पर निर्यात: अब भारत के 99% से अधिक उत्पाद यूरोप के बाजारों में बिना किसी टैक्स (Zero Duty) के बिक सकेंगे।
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रोजगार के अवसर: कपड़ा, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी और लेदर इंडस्ट्री को इससे सीधा फायदा होगा। जानकारों का मानना है कि इससे भारत में लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी।
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दवाइयों की पहुंच: भारतीय जेनेरिक दवाओं के लिए यूरोपीय मानक अब आसान होंगे, जिससे भारत का फार्मा सेक्टर यूरोप में अपना दबदबा बना सकेगा।
Our states are set to reap big benefits from the #IndiaEUTradeDeal pic.twitter.com/3H7Rtt3qBf
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) January 27, 2026
चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति
कोरोना काल और रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया को सिखा दिया कि एक ही देश (चीन) पर निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है।
यूरोप अब अपने सप्लाई चेन के लिए एक भरोसेमंद साथी चाहता है और भारत इस भूमिका में फिट बैठता है।
यह समझौता भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
#WATCH | Delhi | PM Narendra Modi, the President of the European Commission, Ursula Von Der Leyen and the President of the European Council, António Luís Santos da Costa, witness the signing and exchange of the political declaration of the conclusion of negotiations of the… pic.twitter.com/SfT1SDjLTJ
— ANI (@ANI) January 27, 2026
प्रोफेशनल और आईटी सेक्टर को पंख
भारतीय युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए भी यह डील वरदान है।
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सर्विस सेक्टर: भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियर्स और एजुकेशन एक्सपर्ट्स को अब यूरोप के 144 सर्विस सेक्टर्स में काम करने का मौका मिलेगा।
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वीजा और मूवमेंट: अब भारतीय पेशेवरों का बिजनेस के सिलसिले में यूरोप जाना आसान हो जाएगा।
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डिजिटल इकोनॉमी: ऑनलाइन सेवाओं और तकनीक के आदान-प्रदान में भी तेजी आएगी।
#WATCH | Delhi | On signing of India-EU FTA, President of the European Commission, Ursula Von Der Leyen says,” PM Modi, we did it!… We delivered the mother of all deals…” pic.twitter.com/C4NZ7ozwQB
— ANI (@ANI) January 27, 2026
किसानों के हितों की रक्षा
भारत सरकार ने इस डील में अपने किसानों का पूरा ध्यान रखा है।
संवेदनशील क्षेत्र जैसे दूध, अनाज, पोल्ट्री और फल-सब्जियों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।
इसका मतलब है कि यूरोप से सस्ता डेयरी या कृषि उत्पाद भारत आकर हमारे किसानों के बाजार को खराब नहीं कर पाएगा।
वहीं दूसरी ओर, भारतीय फल, सब्जियां और सीफूड के लिए यूरोप का प्रीमियम बाजार खुल गया है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and President of the European Commission Ursula Von Der Leyen pose with leaders from both countries at the India-EU Business Forum underway at Bharat Mandapam.
(Video source: DD) pic.twitter.com/AvmeeCv7K6
— ANI (@ANI) January 27, 2026
2031 तक 51 अरब डॉलर का मुनाफा
आंकड़ों की बात करें तो 2031 तक दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक मुनाफा 51 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
फिलहाल यूरोपीय संघ भारत के कुल निर्यात में 17% की हिस्सेदारी रखता है, जो इस डील के बाद बढ़कर 23% तक जा सकती है।
#WATCH | Delhi: At the India-EU Business Forum, Prime Minister Narendra Modi says, “Indian investment in the EU has reached almost 40 billion euros. Today, there is deep cooperation between India and European companies in every sector, including R&D, manufacturing, and services,… pic.twitter.com/EtmoLMwjo1
— ANI (@ANI) January 27, 2026
क्या सस्ता होगा और क्या नहीं?
| क्या सस्ता होगा? | क्या सुरक्षित रखा गया? |
| यूरोपीय लग्जरी कारें (Audi, BMW) | भारतीय डेयरी उत्पाद (दूध, घी) |
| प्रीमियम वाइन और स्पिरिट्स | स्थानीय अनाज और पोल्ट्री |
| हाई-एंड मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स | बजट इलेक्ट्रिक कारें (अगले 5 साल तक) |
| यूरोपीय चॉकलेट और परफ्यूम | स्थानीय लघु उद्योग (MSME) |


